• 20 जुलाई संसद मार्च को ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट का समर्थन
• शांतिपूर्ण आंदोलन पर दमन लोकतंत्र को करेगा कमजोर
नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करते हुए उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन से एकजुटता व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च का समर्थन किया है।
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर राहुल दास, राष्ट्रीय संगठन महासचिव कशु शुभमूर्ति, उत्तर प्रदेश के महासचिव दिनकर कपूर और राष्ट्रीय सचिव व दिल्ली विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह के साथ प्रख्यात गांधीवादी और छात्र युवा संघर्ष वाहनी के पहले संयोजक आचार्य शुभमूर्ति ने अनशन स्थल पर जाकर जारी आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने जारी बयान में कहा है कि कहीं भी सरकार और उसकी जवाबदेही दिखाई नहीं देती। संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर पूरे देश को गहरी क्षति पहुंचाने का काम किया है। मोदी सरकार में लोकतांत्रिक आंदोलन और असहमति की आवाज के प्रति संवेदनहीनता और दमन इस सरकार की आम कार्यशैली बनी हुई है।
असहमति का स्वर रखने वाले और न्यूनतम नीट (NEET) परीक्षा, पेपर लीक और सीबीएसई ओएसएम (CBSE OSM) परीक्षा प्रणाली में हुई धांधली के लिए जवाबदेही तय करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की न्यूनतम मांग को भी सरकार सुनने को तैयार नहीं है।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर सवाल: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जो शांतिपूर्ण तरीके से इस मांग पर अनशनरत थे, उन्हें जबरन अनशन स्थल से सादी वर्दी में पुलिस उठा ले गई। सामान्य सुविधाओं वाले सफदरजंग जैसे अस्पताल में उन्हें भर्ती कर दिया गया और परिवारजनों के कहने के बावजूद उन्हें बेहतर इलाज के लिए ले जाने नहीं दिया जा रहा है। यह सरकार के इस दावे की सच्चाई को सामने लाता है कि वह सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर बेहद चिंतित थी और इसीलिए उसने उन्हें अनशन से हटाया है।
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने देश की सभी लोकतांत्रिक शक्तियों से 20 जुलाई के कार्यक्रम और आंदोलन का समर्थन करने की अपील भी की है।
रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान की शुरुआत
साथ ही ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने कहा है कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन और आवासीय जमीन जैसे संवैधानिक अधिकारों को देने और इसके लिए संसाधन जुटाने के लिए कॉरपोरेट की संपत्ति पर समुचित टैक्स लगाने और पूंजी का नियमन व नियंत्रण करने जैसे सवालों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए एक बड़ा जन अभियान वक्त की जरूरत है।
इसी दिशा में रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान की तरफ से 9 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के 10 जिलों में एक यात्रा भी शुरू की जा रही है।

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