अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों का 29 जुलाई को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन: बिजली के निजीकरण, 4 श्रम संहिताओं व बीज विधेयक के खिलाफ बनेगी देशव्यापी रणनीति
लखनऊ। संयुक्त किसान मोर्चा तथा 10 अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों का एक विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने लखनऊ में यह जानकारी दी।
🎯 राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे:
- इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) विधेयक: बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देने वाले संशोधन विधेयक का विरोध।
- बिजली वितरण का निजीकरण: उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व कर्नाटक में बिजली निजीकरण की तेज होती प्रक्रिया को रोकना।
- लेबर कोड्स: मजदूर व कर्मचारी हितों के प्रतिकूल चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) का विरोध।
- प्रस्तावित बीज विधेयक: किसानों के हितों पर प्रभाव डालने वाले नए बीज विधेयक के खिलाफ रणनीति।
⚡ देशव्यापी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे बिजली कर्मचारी
संघर्ष समिति ने बताया कि इससे पूर्व 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल के बावजूद सरकारों की नीतियों में सुधार नहीं आया है। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि यदि 29 जुलाई के सम्मेलन में बिजली के निजीकरण, श्रम विरोधी व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ किसी राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया जाता है, तो देश भर के बिजली कर्मचारी उसका पूर्ण समर्थन करेंगे।
🚨 यूपी में 606 दिनों से जारी है बिजली कर्मियों का आंदोलन
उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी पिछले 606 दिनों से लगातार आंदोलनरत हैं। इस संघर्ष के दौरान हजारों कर्मियों पर दंडात्मक कार्रवाइयां की गई हैं।
📜 ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते के पालन की मांग
संघर्ष समिति ने मांग उठाई है कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ 19 मार्च 2023 को हुए समझौते के अनुसार, मार्च 2023 के आंदोलन और निजीकरण विरोधी आंदोलनों के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी अनुचित, उत्पीड़नात्मक एवं प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों को तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि उद्योगों में शांति व सौहार्द का माहौल बना रहे।


0 टिप्पणियाँ