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यूरिया की कालाबाजारी पर कृषि मंत्री का बयान भ्रामक, किसान नेताओं की सीएम से मांग

Azamgarh Farmer Union Statement Surya Pratap Shahi: यूरिया की कालाबाजारी और लूट पर कृषि मंत्री का बयान भ्रामक, किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

यूरिया की कालाबाजारी पर बोले किसान नेता: "कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का बयान भ्रामक, जमीनी हकीकत से बेखबर सरकार"; मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

आजमगढ़। पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के उस बयान को पूरी तरह भ्रामक और जमीनी हकीकत से परे बताया है, जिसमें उन्होंने प्रदेश में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया था। किसान नेताओं का कहना है कि वर्तमान में धान की फसल के लिए यूरिया की भारी किल्लत है और किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

“कृषि मंत्री का यह दावा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है, पूरी तरह गलत है। साधन सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है और सरकार ने खाद वितरण को खुले बाजार के हवाले कर दिया है, जहाँ किसानों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।”

— विरेंद्र यादव (महासचिव, पूर्वांचल किसान यूनियन) व राजीव यादव (महासचिव, सोशलिस्ट किसान सभा)

🚨 ₹236 की बोरी के नाम पर ₹600 की वसूली का आरोप

किसान नेताओं ने खाद वितरण प्रणाली में जारी कथित भ्रष्टाचार और अवैध उगाही पर कई गंभीर आरोप लगाए:

  • टैगिंग का खेल: यूरिया की सरकारी दर ₹236 प्रति बोरी तय है, लेकिन दुकानदारों द्वारा इसके साथ जबरन जिंक और सल्फर के पैकेट थमाकर किसानों से ₹600 तक ऐंठे जा रहे हैं।
  • कमीशनखोरी का आरोप: नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला स्तर पर कृषि अधिकारियों की शह पर दुकानदारों को खुले बाजार में ओवररेटिंग और कालाबाजारी की खुली छूट मिली हुई है।
  • समितियों की बदहाली: सरकारी साधन सहकारी समितियों पर यूरिया का स्टॉक न होने के कारण गरीब किसान महंगे दामों पर निजी दुकानों से खाद खरीदने पर विवश हैं।

🔍 संपत्ति और आय की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

किसान प्रतिनिधियों ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कृषि विभाग के अधिकारियों से लेकर संबंधित उच्च स्तर तक की संपत्तियों की निष्पक्ष जांच करा दी जाए, तो बड़ी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

📢 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की यह प्रमुख मांगें:

  1. तत्काल हस्तक्षेप: प्रदेश भर के किसानों को धान की फसल हेतु साधन सहकारी समितियों के माध्यम से पर्याप्त यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।
  2. ओवररेटिंग पर रोक: यूरिया के साथ जिंक और सल्फर की जबरन टैगिंग पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।
  3. दोषियों पर कार्रवाई: खाद की कालाबाजारी और अवैध वसूली में संलिप्त अधिकारियों व दुकानदारों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कराकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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