जंतर-मंतर विवाद पर सियासत तेज: सोनम वांगचुक प्रकरण की न्यायिक जांच की उठी मांग
संजय सिंह ने पुलिस कार्रवाई को बताया अलोकतांत्रिक, अमिताभ ठाकुर ने गृह सचिव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की
- विपक्ष का हमला: 'आप' के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
- निष्पक्ष जांच की मांग: आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।
- बड़ा सुझाव: गृह सचिव को लिखे पत्र में देश भर के प्रदर्शनों के लिए एक समान 'राष्ट्रीय प्रोटोकॉल' बनाने की वकालत की गई।
नई दिल्ली/लखनऊ: नई दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए घटनाक्रम को लेकर देश की राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई अब विवादों के घेरे में है। आम आदमी पार्टी (AAP) और आजाद अधिकार सेना सहित विभिन्न संगठनों ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संजय सिंह ने पुलिस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया
आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।
"सोनम वांगचुक के अनशन और प्रदर्शन के दौरान पुलिस का यह रवैया बेहद चिंताजनक है। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे लोगों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास हुआ। युवाओं और प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बजाय बल प्रयोग करना किसी भी सूरत में लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।" - संजय सिंह, राज्यसभा सांसद (AAP)
अमिताभ ठाकुर ने गृह सचिव को लिखा पत्र, रखीं ये बड़ी मांगें
दूसरी तरफ, आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सीधे भारत सरकार के गृह सचिव को एक पत्र भेजा है। ठाकुर ने मांग की है कि चूंकि इस घटना को लेकर पुलिस प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के दावों में भारी विरोधाभास है, इसलिए सत्य को सामने लाने के लिए एक उच्च स्तरीय पारदर्शी जांच जरूरी है।
गृह सचिव को भेजे पत्र के मुख्य बिंदु:
- न्यायिक जांच: जंतर-मंतर की घटना की सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
- साक्ष्यों की सुरक्षा: जांच पूरी होने तक घटना स्थल के सभी सीसीटीवी फुटेज, पुलिस वीडियो, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
- राष्ट्रीय प्रोटोकॉल: देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान "राष्ट्रीय प्रोटोकॉल" बनाया जाए, जिसमें प्रदर्शनकारियों और पुलिस दोनों के अधिकारों, दायित्वों तथा बल प्रयोग की एक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित हो।
जंतर-मंतर के इस घटनाक्रम को लेकर जहां एक ओर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर शासन और दिल्ली पुलिस प्रशासन की तरफ से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत और आधिकारिक स्पष्टीकरण आना बाकी है।

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