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पुलिस और आवश्यक सेवाकर्मी भी हैं 'कोरोना योद्धा', ड्यूटी पर जान गंवाने पर मिलेंगे 50 लाख

High Court Decision: आवश्यक सेवाकर्मी भी हैं 'कोरोना योद्धा', कोविड ड्यूटी में जान गंवाने पर ₹50 लाख अनुग्रह राशि देने का आदेश

ऐतिहासिक फैसला: हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कोरोना महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं में तैनात सभी सरकारी कर्मचारी 'कोरोना वॉरियर' माने जाएंगे। कोर्ट ने ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जान गंवाने वाले कर्मी के आश्रितों को ₹50 लाख की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया है।

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना काल में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों के हक में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। न्यायालय ने साफ किया है कि कोरोना ड्यूटी की परिभाषा केवल अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सा कर्मियों तक सीमित नहीं है। महामारी के दौरान अग्रिम पंक्ति में रहकर जनता की सेवा करने वाले पुलिस, बिजली, जल और टेलीफोन विभाग के कर्मी भी इसके हकदार हैं।

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⚖️ कोर्ट ने राज्य सरकार को दिए सख्त निर्देश

  • 👮‍♂️ हेड कांस्टेबल की पत्नी की याचिका स्वीकार: न्यायालय ने लखनऊ में कोरोना ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप की पत्नी सेम्मा भारती की याचिका को स्वीकार कर लिया है।
  • 🗓️ पुरानी अस्वीकृति का आदेश रद्द: खंडपीठ ने 27 अगस्त 2024 के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके जरिए सेम्मा भारती के ₹50 लाख की सहायता राशि के दावे को पहले खारिज कर दिया गया था।
  • ⏱️ 8 सप्ताह की समयसीमा: न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वे आठ सप्ताह के भीतर पीड़ित परिवार को ₹50 लाख की अनुग्रह राशि का भुगतान करें।
  • 🛡️ 11 अप्रैल 2020 का शासनादेश: कोर्ट ने कहा कि आवश्यक सेवाओं के कर्मचारी संक्रमण नियंत्रण की अग्रिम पंक्ति में कार्यरत थे, इसलिए उन्हें 11 अप्रैल 2020 के शासनादेश के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

📊 केस से जुड़े मुख्य तथ्य (Case Overview)

🏛️ सुनवाई करने वाली अदालत हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ (खंडपीठ)
👥 माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ एवं न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी
👤 दिवंगत कोरोना योद्धा हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप
👩‍💼 याचिकाकर्ता (आश्रित) सेम्मा भारती (दिवंगत हेड कांस्टेबल की पत्नी)
💰 अनुग्रह राशि (Compensatory Amount) ₹50,000,000 (50 लाख रुपये)

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब पुलिस के अलावा बिजली, जल, दूरसंचार और अन्य आवश्यक सरकारी विभागों के उन सभी कर्मियों के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्होंने कोविड-19 की रोकथाम, जनजागरूकता और संक्रमित लोगों की सहायता के दौरान अपनी जान गंवाई थी। कोर्ट के इस रुख से साफ है कि संकट के समय देश की सेवा करने वाले हर एक फ्रंटलाइन कर्मी के योगदान का पूरा सम्मान किया जाएगा।

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