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UP Electricity Shock: यूपी में 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं को झटका! बिना सूचना बढ़ाया लोड, 12 लाख गरीबों की सब्सिडी छिनी

UP Electricity Shock: यूपी में 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं को झटका! बिना सूचना बढ़ाया लोड, 12 लाख गरीबों की सब्सिडी छिनी

लखनऊ, 4 जुलाई: उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिना किसी पूर्व सूचना के राज्य के लगभग 46.79 लाख (करीब 47 लाख) उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार (लोड) बढ़ा दिया है। इस कार्रवाई से सबसे बड़ा झटका सूबे के गरीब परिवारों को लगा है, क्योंकि लोड बढ़ने के कारण लगभग 25 प्रतिशत (करीब 12 लाख) गरीब उपभोक्ता सरकार द्वारा मिलने वाली बिजली सब्सिडी के दायरे से बाहर हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध' बताया है और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

नियामक आयोग के नियमों की अनदेखी का आरोप

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित अवधि से अधिक लोड का उपयोग करता है, तो उसे पहले पूर्व सूचना देकर स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए। यदि लगातार तीन महीने तक अधिक भार का उपयोग हुआ, तभी कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने उपभोक्ताओं को समय रहते सचेत करने के बजाय सीधे वित्तीय वर्ष 2025-26 के डेटा के आधार पर स्वीकृत लोड 1 किलोवाट से बढ़ाकर 2 किलोवाट या उससे अधिक कर दिया है।

लोकसभा के जवाब और यूपी के नियमों में विरोधाभास: देश के ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं से मैक्सिमम डिमांड (MD) पेनल्टी नहीं वसूली जाएगी। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में पहले स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से एमडी पेनल्टी वसूली गई और अब उसी को आधार बनाकर उनका स्वीकृत भार भी बढ़ा दिया गया। उपभोक्ता परिषद ने इसे पूरी तरह अनुचित और विभाग का 'दोहरा मापदंड' करार दिया है।

गरीब और मध्यम वर्ग पर कितना पड़ेगा आर्थिक बोझ?

जिन 47 लाख उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उनमें लगभग 50% स्मार्ट मीटर धारक हैं और 25% 'लाइफलाइन' श्रेणी के गरीब उपभोक्ता हैं जिन्हें रियायती दरों पर बिजली मिलती थी। लोड 1kW से 2kW होने पर उन पर हर महीने होने वाला असर इस प्रकार है:

  • ग्रामीण गरीब उपभोक्ता: पहले 1 किलोवाट पर ₹50 फिक्स्ड चार्ज और निर्धारित खपत पर करीब ₹300 बिल देते थे। अब लोड 2 किलोवाट होने पर फिक्स्ड चार्ज बढ़कर ₹180 हो जाएगा। इससे उन पर औसतन ₹165 प्रतिमाह का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
  • शहरी गरीब उपभोक्ता: फिक्स्ड चार्ज और ऊर्जा शुल्क दोनों में बढ़ोतरी होने के कारण शहरी गरीब घरेलू उपभोक्ताओं पर औसतन ₹435 प्रतिमाह का भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।

अस्थायी उपयोग को स्थायी मान लेना अन्यायपूर्ण

परिषद का तर्क है कि गरीब परिवारों में अक्सर शादी-विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों या त्योहारों जैसे विशेष अवसरों पर कुछ समय के लिए बिजली का उपयोग बढ़ जाता है। ऐसे किसी अस्थायी उपयोग को आधार मानकर सीधे फिक्स्ड लोड बढ़ा देना और उनकी सब्सिडी छीन लेना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग: उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मामले में तुरंत दखल दिया जाए। बिना सूचना बढ़ाए गए लोड की समीक्षा की जाए, पात्र गरीबों की बिजली सब्सिडी तुरंत बहाल की जाए, और उपभोक्ताओं को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए ताकि भविष्य में उनके हितों की रक्षा हो सके।

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