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UP Electricity News: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की एडवाइजरी लागू करे पॉवर कॉरपोरेशन, बिना मैनपावर पीक डिमांड संभालना मुश्किल

UP Power Crisis & Manpower Shortage: केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की एडवाइजरी पर हो तत्काल कार्रवाई, मैनपावर बिना पीक डिमांड प्रबंधन असंभव - संघर्ष समिति

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की एडवाइजरी पर तत्काल कार्रवाई करे पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन; मैनपावर की भारी कमी दूर किए बिना पीक डिमांड का प्रबंधन असंभव: संघर्ष समिति

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा आगामी पीक सीजन में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जारी एडवाइजरी का कड़ाई से पालन कराया जाए। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा निगमों में व्याप्त मैनपावर की भारी कमी दूर किए बिना CEA के निर्देशों का पालन करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

⚡ केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की एडवाइजरी में क्या हैं निर्देश?

  • ओवरलोडिंग की पहचान: 80% से अधिक लोड वाले फीडरों व ट्रांसफार्मरों तथा 75% से अधिक लोड वाले पावर ट्रांसफार्मरों की तत्काल समीक्षा हो।
  • क्षमता वृद्धि: 90% से अधिक लोड वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाए।
  • मेंटेनेंस कार्य: सब-स्टेशनों, फीडरों और ट्रांसफार्मरों का समय से पूर्व निवारक अनुरक्षण (Preventive Maintenance) किया जाए।
  • तकनीकी प्रबंधन: स्मार्ट मीटर डाटा, जीआईएस (GIS) आधारित नेटवर्क प्लानिंग, मोबाइल ट्रांसफार्मर तथा स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

📉 3.73 करोड़ उपभोक्ता पर बचे केवल 30 हजार से कम कर्मचारी

संघर्ष समिति ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रदेश में ऊर्जा निगमों की जमीनी स्थिति को उजागर किया है:

  • विशाल नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में अब लगभग 3 करोड़ 73 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं और लाखों किलोमीटर लंबा वितरण नेटवर्क फैला हुआ है।
  • कर्मचारियों की भारी कमी: विशाल विद्युत तंत्र के संचालन के बावजूद कर्मचारियों की संख्या लगातार घटकर 30 हजार से भी कम रह गई है।
  • संविदा कर्मियों की छंटनी: पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर अनुभवी और कुशल संविदा कर्मचारियों को हटाया गया है, जबकि नियमित पदों पर लंबे समय से भर्ती नहीं हुई है।

🚨 पीक डिमांड प्रबंधन पर मंडराया संकट

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि पर्याप्त तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध न होने के कारण फील्ड स्तर पर लाइन पेट्रोलिंग, दोष निवारण, ट्रांसफार्मर बदलने और आपातकालीन मरम्मत जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। केवल कागजी आदेश जारी करने से बिजली व्यवस्था नहीं चलाई जा सकती; इसके लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों, तकनीशियनों और लाइनमैनों की उपलब्धता अनिवार्य है।

📢 संघर्ष समिति की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रमुख मांगें:

  1. ऊर्जा निगमों के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियमित भर्तियां शुरू की जाएं।
  2. सेवा से हटाए गए अनुभवी व कुशल संविदा कर्मियों को तुरंत काम पर वापस लिया जाए।
  3. फील्ड स्टाफ की संख्या में वृद्धि की जाए और वितरण तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

समिति का कहना है कि इन ठोस कदमों के बिना आगामी पीक सीजन में प्रदेश के नागरिकों को निर्बाध व गुणवत्तापूर्ण बिजली दे पाना मुमकिन नहीं होगा।

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