UP Power News: वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की होगी स्वतंत्र समीक्षा, बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने किया नियामक आयोग के फैसले का स्वागत
लखनऊ, 5 जुलाई: उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली वितरण क्षेत्र में लागू की गई विवादित 'वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग प्रणाली' (Vertical Restructuring System) का स्वतंत्र मूल्यांकन (Policy Impact Assessment) कराने और उसकी समीक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं। 'विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश' ने आयोग के इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे जनहित और उपभोक्ता हित में बेहद समयोचित कदम बताया है।
संघर्ष समिति का शुरू से ही आरोप रहा है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग एक अवैज्ञानिक, अव्यावहारिक और उपभोक्ता-विरोधी व्यवस्था है, जिसने विभाग के स्थापित ढांचे को कमजोर किया है। समिति ने मांग की है कि इस स्वतंत्र समीक्षा के बाद इस व्यवस्था को तत्काल वापस लिया जाए।
"निजीकरण की सोच से प्रेरित है वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग"
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था दुनिया के विकसित विद्युत तंत्रों में भी सामान्य रूप से लागू नहीं है। इसे कुछ निजी कंपनियों के मॉडल से प्रेरित होकर थोपा गया है, जो यूपी जैसे विशाल सार्वजनिक विद्युत तंत्र के लिए अनुपयुक्त है। इसके पीछे सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर कर निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने की मंशा दिखती है।
वर्टिकल व्यवस्था से बढ़ीं उपभोक्ताओं की मुश्किलें और खत्म हुई जवाबदेही
समिति ने स्पष्ट किया कि जब से यह नई प्रणाली लागू हुई है, आम उपभोक्ताओं की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं। बिजली आपूर्ति, मेंटेनेंस (अनुरक्षण), और राजस्व (रिवेन्यू) जैसे कार्यों को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित कर दिए जाने के कारण अधिकारियों के बीच से आपसी तालमेल गायब हो चुका है।
- जवाबदेही का अभाव: कार्यों के बंटवारे के कारण कोई भी विंग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता, जिससे उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है।
- मानव संसाधन की कमी: विद्युत नियामक आयोग ने भी माना है कि उपकेंद्रों और फीडरों पर मेंटेनेंस व्यवस्था की समीक्षा और पर्याप्त कर्मचारियों (Human Resources) की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
नियमित पदों की बहाली और संविदा कर्मियों की वापसी की मांग
नियामक आयोग के इस कड़े रुख के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) प्रबंधन के सामने अपनी प्रमुख मांगें दोहराई हैं:
| श्रेणी | प्रमुख मांगें |
|---|---|
| नियमित कर्मचारी | वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर समाप्त किए गए सभी नियमित पद तत्काल पुनर्बहाल किए जाएं और नए पदों का सृजन हो। |
| संविदा कर्मी | सेवा से हटाए गए अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मचारियों को बिना शर्त तत्काल ड्यूटी पर वापस लिया जाए। |
| प्रबंधन से अपील | प्रबंधन हठधर्मिता छोड़कर दमनकारी कार्रवाइयां वापस ले और बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए समिति के साथ सकारात्मक संवाद शुरू करे। |
कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि बिना पर्याप्त तकनीकी स्टाफ और नियमित कर्मचारियों के उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति देना संभव नहीं है। अब देखना यह होगा कि नियामक आयोग के इस समीक्षा निर्देश के बाद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन क्या सुधारात्मक कदम उठाता है।


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