UP News: यूपी के हर जिले में बनेगा मॉडल विलेज, बायोगैस प्लांट के लिए IIT दिल्ली की तकनीक का सहारा लेगी योगी सरकार
लखनऊ, 7 जुलाई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो संरक्षण अभियान और ग्रामीण विकास के विजन को अब आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से एक नई उड़ान मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के हर जिले में एक 'मॉडल विलेज' (Model Village) विकसित करने की योजना पर काम कर रही है, जहां बड़े पैमाने पर बायोगैस संयंत्र (Biogas Plants) स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञों की टीम तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।
इस मुहिम के तहत झांसी का ग्राम पलींदा प्रदेश के लिए एक बड़ी मिसाल बनने जा रहा है, जहां पहले चरण में 18 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य इस पूरे गांव को 'प्राकृतिक कृषि ग्राम' के रूप में तब्दील करने का है, जिससे ग्रामीणों को मुफ्त रसोई ईंधन और बेहतरीन जैविक खाद मिल सके।
गो संरक्षण से ग्रीन एनर्जी: योजना के मुख्य बिंदु और तकनीकी टीम
| प्रमुख श्रेणी | विवरण एवं महत्वपूर्ण जानकारियां |
|---|---|
| तकनीकी पार्टनर | आईआईटी दिल्ली का बायोगैस डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर। |
| मुख्य विशेषज्ञ और टीम | प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय (नेतृत्वकर्ता), रत्नेश तिवारी, अक्षय श्रीवास्तव, चिंतन दवे और डॉ. मंगाराम। |
| झांसी का पलींदा मॉडल | प्रथम चरण में 18 बायोगैस प्लांट स्थापित। हर घर तक बायोगैस पहुंचाकर इसे पूर्ण प्राकृतिक कृषि ग्राम बनाने का लक्ष्य। |
| किसानों को फायदा | रासायनिक खादों पर निर्भरता खत्म होगी; उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद (Organic Fertilizer) मुफ्त मिलेगी। |
"ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी एक नई दिशा" — श्याम बिहारी गुप्ता
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया, "योगी सरकार का यह अभियान सिर्फ गो संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने वाला है। बायोगैस के इस मॉडल को जल्द ही यूपी के सभी जिलों में स्केल-अप किया जाएगा, जिससे बाजारों में रसायन मुक्त (Chemical-Free) शुद्ध खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।"
ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर यूपी का नया ग्रीन मॉडल
आईआईटी दिल्ली की यह टीम गांवों में बायोगैस प्लांट लगाने से लेकर उसके सुचारू रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी सपोर्ट और ट्रेनिंग भी प्रदान करेगी। नवीकरणीय गोबर गैस के इस बेहतरीन प्रयोग से जहां एक ओर गांवों को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडरों पर निर्भरता भी कम होगी। सरकार की तैयारी आने वाले समय में राज्य के हर कोने में इसी तर्ज पर ग्रीन एनर्जी ग्रिड तैयार करने की है।

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