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यूपी पावर ट्रांसमिशन के निजीकरण पर रोक लगाए सरकार: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की मांग

निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की सीएम योगी से मांग

ट्रांसमिशन सेक्टर के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की मुख्यमंत्री से गुहार

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि प्रदेश के पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में 'टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग' (TBCB) के नाम पर तेजी से बढ़ाए जा रहे निजीकरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। संघर्ष समिति का स्पष्ट कहना है कि ट्रांसमिशन से संबंधित सभी नई परियोजनाएं, सब-स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण का दायित्व उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPTCL) को ही सौंपा जाना चाहिए।

⚡ "ट्रांसमिशन नेटवर्क है बिजली व्यवस्था की रीढ़"

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाला राज्य बन चुका है। इस विशाल विद्युत व्यवस्था की रीढ़ राज्य का ट्रांसमिशन नेटवर्क है, जो बिजली उत्पादन और वितरण के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। ऐसे रणनीतिक एवं संवेदनशील क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले करना न केवल प्रदेश के हितों के विरुद्ध है, बल्कि भविष्य में विद्युत सुरक्षा और विश्वसनीय आपूर्ति के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

📉 सरकारी निर्माण सस्ता, निजी TBCB से बढ़ेगा उपभोक्ताओं पर बोझ

संघर्ष समिति ने विभिन्न अध्ययनों और व्यावहारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए निजीकरण की खामियां उजागर की हैं:

  • कम लागत में निर्माण: यदि ट्रांसमिशन सब-स्टेशन, लाइनें एवं अन्य परियोजनाएं राज्य की सरकारी कंपनी UPPTCL द्वारा निर्मित की जाती हैं, तो उनकी लागत निजी क्षेत्र द्वारा TBCB के माध्यम से विकसित परियोजनाओं की तुलना में काफी कम आती है।
  • व्हीलिंग चार्ज में राहत: सरकारी परियोजनाओं की कम लागत का सीधा लाभ ट्रांसमिशन व्हीलिंग चार्ज में कमी के रूप में आम उपभोक्ताओं को मिलता है।
  • महंगी बिजली की मार: इसके विपरीत, महंगी निजी परियोजनाओं का अतिरिक्त वित्तीय बोझ अंततः आम बिजली उपभोक्ताओं पर ही डाला जाता है।

🏛️ राज्य के नियंत्रण को कमजोर करने की कोशिश

समिति ने चिंता जताई कि वर्तमान में अधिकांश ट्रांसमिशन परियोजनाएं टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के नाम पर निजी कंपनियों या पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन को दी जा रही हैं। इससे राज्य सरकार का अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क पर प्रशासनिक व तकनीकी नियंत्रण लगातार कमजोर हो रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में सरकारी नेटवर्क को और अधिक सशक्त तथा आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है।

📢 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नीतिगत निर्णय की अपील

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग नीति की व्यापक समीक्षा की जाए। प्रदेश एवं उपभोक्ताओं के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए ट्रांसमिशन सेक्टर के निजीकरण पर तुरंत रोक लगाने तथा सरकारी ट्रांसमिशन प्रणाली (UPPTCL) को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय शीघ्र लिए जाएं। इससे प्रदेश में मजबूत, सुरक्षित, विश्वसनीय और कम लागत वाली विद्युत व्यवस्था विकसित हो सकेगी।

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