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काशी में AI सेंसर और कलर कोडिंग से होगा भीड़ प्रबंधन, विश्वनाथ धाम का रास्ता बताएंगी गलियां

काशी होगी हाईटेक: AI सेंसर और डिजिटल तकनीक से होगा भीड़ प्रबंधन

काशी होगी हाईटेक: AI सेंसर और डिजिटल तकनीक से होगा भीड़ प्रबंधन, बाबा विश्वनाथ धाम का रास्ता बताएंगी गलियां

वाराणसी। पुरातन, दिव्य और भव्य काशी अब आधुनिक तकनीक से लैस होने जा रही है। काशी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब भीड़, जाम और रास्तों की परेशानी से काफी राहत मिलने वाली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेंसर, डिजिटल साइनेज, जेनरेटिव एआई और स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम के माध्यम से शहर में भीड़ प्रबंधन और सुगम आवागमन की नई व्यवस्था विकसित की जा रही है।

इस योजना के तहत काशी की गलियां और सड़कें अब श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ धाम और ऐतिहासिक गंगा घाटों तक पहुंचने का रास्ता बताएंगी। डिजिटल साइनेज और पारंपरिक म्यूरल साइनेज के साथ एआई आधारित पैदल नेविगेशन और 'क्राउड इंटेलिजेंस ऐप' यात्रियों को सही मार्ग की जानकारी देगा।

🔮 टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन की सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज में चयन

यह पहल विशेष रूप से वाराणसी जैसे घनी आबादी वाले ऐतिहासिक शहर को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसका विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन की ‘सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज’ योजना के तहत वाराणसी को चुना गया था। दुनिया के कई बड़े शहरों के साथ काशी को भी इस प्रतिष्ठित परियोजना में शामिल किया गया है।

⏰ चार घंटे पहले मिल जाएगी भीड़ की जानकारी

काशी में क्राउड मैनेजमेंट के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एआई सिस्टम चार घंटे पहले ही अनुमान लगा सकेगा कि किस क्षेत्र में कितनी भीड़ बढ़ सकती है। इससे पुलिस और प्रशासन समय रहते भीड़ नियंत्रण, रूट डायवर्जन और वैकल्पिक व्यवस्था कर सकेंगे।

सिटी डेटा के सीईओ अपूर्व कुमार के अनुसार, सिटीफ्लो बिग डेटा और जेनरेटिव एआई तकनीक के माध्यम से भीड़ का विश्लेषण किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए 8 एआई सेंसर को बढ़ाकर जल्द ही 50 से अधिक किया जाएगा, जो सीधे काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को डेटा भेजेंगे।

🎨 रंगों से बताएंगी गलियां बाबा के द्वार का रास्ता (Color Coding System)

काशी में श्रद्धालुओं के लिए रास्तों को आसान बनाने के लिए एक विशेष **कलर कोडिंग सिस्टम** लागू किया जाएगा। अलग-अलग रंगों की लाइनों के माध्यम से लोग अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकेंगे:

  • पीले रंग की लाइन: श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच सकेंगे।
  • नीले रंग की लाइन: गंगा घाटों तक पहुंचने का सीधा रास्ता मिलेगा।
  • लाल रंग की लाइन: वापसी (Exit) मार्ग की जानकारी देगी।

इसके अलावा गलियों में म्यूरल पेंटिंग और डिजिटल साइनेज के माध्यम से भी यात्रियों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

📱 भीड़ वाले रास्तों से बचाएगा स्मार्ट ऐप

वोजिक एआई (Wojic AI) के सीईओ अर्जित विश्वास ने बताया कि विकसित किया जा रहा ऐप रियल टाइम डेटा की मदद से यात्रियों को भीड़ वाले मार्गों से बचाकर वैकल्पिक गलियों की ओर ले जाएगा। साथ ही, ऐप के माध्यम से पर्यटकों को आसपास के दर्शनीय स्थलों और स्थानीय दुकानों की जानकारी मिलेगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ होगा।

♿ दिव्यांग, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सुविधा

अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट तक विशेष नेविगेशन सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसके तहत दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं के लिए रैंप, व्हीलचेयर सुविधा, चेंजिंग रूम और शौचालय जैसी सुविधाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। प्रमेया कंसल्टिंग की सीईओ रिद्धि शाह के अनुसार, 'नई चाल' एआई इकोसिस्टम के जरिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा रही है।

🗓️ दो साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि वाराणसी नगर निगम और वाराणसी स्मार्ट सिटी की ओर से टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन, चैलेंज वर्क्स और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया के सहयोग से यह पहल शुरू की गई है। इस परियोजना को अगले दो वर्षों में पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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