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2000 हाथी, 50 गैंडे और 63 बाघ: मानस नेशनल पार्क में सिर्फ जानवर नहीं, पूरा इकोसिस्टम बचाने की अनूठी मुहिम

2 हजार हाथी, 50 गैंडे और 63 बाघ: मानस नेशनल पार्क में सिर्फ जानवर नहीं, पूरा इकोसिस्टम बचाने की जमीनी मुहिम; घासभूमि से लेकर दुर्लभ पक्षियों तक पर फोकस

📍 स्थान: बक्सा, मानस राष्ट्रीय उद्यान (असम) | 📅 दिनांक: 17 सितंबर 2026 | 🌿 श्रेणी: वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता एवं पीआईबी मीडिया दौरा
बक्सा (असम): भारत-भूटान सीमा की तलहटी में फैला मानस राष्ट्रीय उद्यान (Manas National Park) केवल 2000 हाथियों, 50 गैंडों और 63 रॉयल बंगाल टाइगर्स की मौजूदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ के नेतृत्व में मानस पहुंचे उत्तर प्रदेश के 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने यहां वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, घासभूमि प्रबंधन और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभूतपूर्व जमीनी प्रयासों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

📌 मानस राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण के मुख्य बिंदु:

  • समृद्ध वन्यजीव आंकड़े: करीब 2,000 जंगली हाथी, 40-50 एक सींग वाले गैंडे और 63 बाघों का प्राकृतिक पर्यावास।
  • जंगल की 'थाली' की सुरक्षा: शाकाहारी जीवों के चारे के लिए 16 प्रजातियों की विशेष घासों की वैज्ञानिक नर्सरी तैयार।
  • घासभूमि का संकट व कैम्पा (CAMPA): प्रतिवर्ष 6.5 वर्ग किमी घटती घासभूमि और आक्रामक खरपतवारों को हटाने हेतु यांत्रिक व कैम्पा फंड से पुनर्जीवन कार्य।
  • बंगाल फ्लोरिकन व दुधवा कनेक्शन: दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन के संरक्षण के तहत मानस से उत्तर प्रदेश के दुधवा नेशनल पार्क में पुनर्वास की कार्ययोजना।
  • महिला वनकर्मियों का पराक्रम: असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स की महिला जवानों द्वारा नर्सरी प्रबंधन और निगरानी की कमान।

📊 मानस राष्ट्रीय उद्यान: प्रमुख सांख्यिकी एवं पारिस्थितिकी आयाम

पारिस्थितिक घटक आंकड़े / स्थिति संरक्षण रणनीति
रॉयल बंगाल टाइगर 63 बाघ कड़ा एंटी-पोचिंग नेटवर्क एवं शिकार आधार में वृद्धि
एशियाई हाथी व गैंडे ~2,000 हाथी | 40-50 गैंडे घासभूमि विस्तार व कॉरिडोर सुरक्षा
घासभूमि (Grassland) प्रबंधन 6.5 वर्ग किमी/वर्ष का क्षरण 16 देशी घास प्रजातियों की नर्सरी व खरपतवार उन्मूलन
दुर्लभ पक्षी प्रजाति अति-संकटापन्न बंगाल फ्लोरिकन आवास सुधार एवं दुधवा नेशनल पार्क (उ.प्र.) के साथ समन्वय

घास की 16 प्रजातियां: जंगल की 'थाली' सुरक्षित करने की अनोखी पहल

मानस टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर युवराज सिंह ने बताया कि शाकाहारी वन्यजीवों की आबादी तभी सुरक्षित रह सकती है जब उनका पोषण चक्र अटूट रहे। मानस में आक्रामक विदेशी वनस्पति प्रजातियों (Invasive Species) के अनियंत्रित फैलाव और प्राकृतिक कारणों से ग्रासलैंड का दायरा प्रतिवर्ष लगभग 6.5 वर्ग किलोमीटर घट रहा था।

इस संकट से निपटने के लिए फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स ने 16 स्थानीय देशी घास प्रजातियों की विशेष नर्सरी तैयार की है। इन नर्सरी प्लॉट्स में घासों को वैज्ञानिक रूप से विकसित कर पार्क के उन खंडों में रोपा जा रहा है जहां चारागाह क्षीण हो चुके हैं। यह तकनीक हाथी, गैंडे, दलदली हिरण और जंगली भैंसों के लिए बारहमासी भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।

दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन: असम और उत्तर प्रदेश के मध्य संरक्षण का सेतु

मानस की जैव-विविधता केवल 'बिग फाइव' तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शुमार बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican) का भी प्रमुख शरणस्थल है।

"बंगाल फ्लोरिकन जैसी अति-संवेदनशील एवियन प्रजाति के संरक्षण के लिए मानस से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा नेशनल पार्क में ट्रांसलोकेशन और पर्यावास विकास के संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। यह अंतर-राज्यीय समन्वय देश में लुप्तप्राय जीवों के अस्तित्व को बचाने की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।"

भूटान सीमा से मनसा देवी तक: प्राकृतिक और सांस्कृतिक संगम

मानस राष्ट्रीय उद्यान का नाम इसके मध्य से प्रवाहित होने वाली सदानीरा मानस नदी के नाम पर रखा गया है, जिसके साथ बेकी और हकुआ नदियां मिलकर इस विशाल तराई परिदृश्य को सिंचित करती हैं। लोक मान्यता के अनुसार मानस का संबंध सर्प देवी मां मनसा से भी माना जाता है।

भौगोलिक रूप से यह उद्यान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क से सटा हुआ है। दोनों देशों के बीच यह अखंड वन क्षेत्र सीमापार वन्यजीव आवागमन और ट्रांसबाउंड्री बायोस्फीयर कंजर्वेशन का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।

कमांड में महिला वनकर्मी: असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स की अग्रिम पंक्ति

मीडिया दल के दौरे के दौरान एक अत्यंत प्रेरक पहलू सामने आया—असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स की महिला जवानों की सक्रिय भागीदारी। महिला वनकर्मियों ने मीडिया प्रतिनिधियों को ग्रासलैंड नर्सरी में ले जाकर बीजारोपण, प्लॉटिंग और जंगल में ट्रांसप्लांटेशन की जटिल प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। बंदूक संभालने से लेकर वनस्पति विज्ञान के अनुप्रयोग तक, ये महिला कर्मी मानस के संरक्षण की मजबूत रीढ़ बनी हुई हैं।

संरक्षण का समग्र संदेश: मानस राष्ट्रीय उद्यान यह सिद्ध करता है कि वन्यजीव संरक्षण केवल बाड़ लगाने या जानवरों की गिनती करने का नाम नहीं है। जब तक मिट्टी, जलधारा, घास के मैदान और सूक्ष्म जीवों का प्राकृतिक संतुलन नहीं सहेजा जाएगा, तब तक जंगल का अस्तित्व अधूरा रहेगा।

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