कलियुग के 'श्रवण कुमार': 24 पोते कंधों पर पालकी उठाकर 95 वर्षीय दादी को ले गए हरिद्वार; कराया गंगा स्नान, सिवाया टोल पर थमे राहगीरों के कदम
मेरठ। सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं और दिलों को छू लिया। बुलंदशहर के सिकंदराबाद स्थित हसनपुर जागीर निवासी 95 वर्षीय सोनदेवी पालकी में हाथ जोड़कर 'हर-हर महादेव' का जयघोष कर रही थीं, और उनके 24 पोते बारी-बारी से अपने कंधों पर पालकी उठाकर आगे बढ़ रहे थे।
🚩 'महाकाल ग्रुप' ने पूरा किया दादी का संकल्प
95 वर्षीय सोनदेवी की वर्षों से इच्छा थी कि वे हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। उम्र के इस पड़ाव पर जब यह संभव नहीं दिख रहा था, तब परिवार के युवाओं ने 'महाकाल ग्रुप' बनाकर इस इच्छा को अपना संकल्प बनाया और दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार गंगा स्नान कराया।
🔄 हर कुछ दूरी पर बदलते हैं पोतों के कंधे
सोनदेवी के पोतों ने बताया कि यात्रा के दौरान पालकी उठाने के लिए खास योजना बनाई गई है:
- बारी-बारी से सेवा: टोली में शामिल सभी 24 युवा रिश्ते में सोनदेवी के पोते हैं। कोई भी एक युवा लगातार पालकी नहीं उठाता।
- सुगम यात्रा: कुछ दूरी तय करने के बाद दूसरे पोते तुरंत कंधा संभाल लेते हैं, ताकि दादी को यात्रा के दौरान कोई झटका या परेशानी महसूस न हो।
- योगी सरकार के इंतजामों की तारीफ: पोतों ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा कांवड़ मार्ग पर किए गए बेहतरीन इंतजामों की वजह से कांवड़ियों को कोई असुविधा नहीं हो रही है।
📍 सिवाया टोल प्लाजा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
जैसे ही यह अनोखा कारवां सिवाया टोल प्लाजा पर पहुंचा, पालकी में बैठी सोनदेवी का आशीर्वाद लेने और इस भावुक पल को कैमरे में कैद करने के लिए लोगों का जमावड़ा लग गया। दादी पूरे रास्ते हाथ जोड़कर 'बोल बम' का जयघोष करती रहीं और पोते पूरे उत्साह से सेवा में जुटे रहे।
“दादी की खुशी और उनका मुस्कुराता चेहरा ही हमारे लिए भगवान शिव का सबसे बड़ा आशीर्वाद है। बुजुर्गों की सेवा से बड़ी कोई भक्ति नहीं हो सकती।”
— महाकाल ग्रुप (सोनदेवी के पोते)✨ आस्था के साथ भारतीय संस्कारों की मिसाल
कांवड़ यात्रा में भक्ति और डीजे की धुनों के बीच यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि सनातन संस्कारों और बुजुर्गों के प्रति आदर-सम्मान का सबसे सुंदर प्रतीक बनकर उभरा है। सड़क से गुजरने वाले हर राहगीर ने इन युवाओं के समर्पण को सलाम किया।

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