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Gomti Nagar Railway Station Commercial Project RLDA Delay: पजेशन न मिलने पर आवंटियों का विरोध

Gomtinaagar Railway Station Commercial Project RLDA Delay Outrage Lucknow News: गोमतीनगर रेलवे स्टेशन कॉमर्शियल प्रोजेक्ट में 3 साल की देरी; 95% भुगतान के बाद भी नहीं मिला दुकानों का कब्जा, आवंटियों में भारी आक्रोश

गोमतीनगर रेलवे स्टेशन कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स: 95% रकम चुकाने के 3 साल बाद भी दुकानों का पजेशन अधर में; आवंटियों का फूटा गुस्सा, 18% ब्याज की मांग

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रीमियम **गोमतीनगर रेलवे स्टेशन** से जुड़ी कॉमर्शियल परियोजना में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर आवंटियों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। चार साल पहले आरएलडीए (रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा दुकानें आवंटित करने और 95 प्रतिशत तक भुगतान जमा कराने के बावजूद अब तक पजेशन नहीं सौंपा गया है। गुरुवार को **आर वन और आर टू कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन** ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आपबीती साझा की।

📌 क्या है पूरा मामला और क्या थे वादे?

  • स्कीम की शुरुआत: संगठन के अध्यक्ष **सुधांशु वर्मा** ने बताया कि वर्ष 2020-21 में RLDA ने 'कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान' के तहत आर-1 (R-1) और आर-2 (R-2) टावरों में लगभग 150 से 200 लोगों को दुकानें आवंटित की थीं।
  • डेडलाइन से 3 साल आगे निकला समय: अथॉरिटी ने 30 सितंबर 2023 तक पजेशन देने का वादा किया था। लेकिन तय समय सीमा बीतने के लगभग तीन साल बाद भी काम अधूरा पड़ा है और पजेशन की कोई नई तारीख घोषित नहीं की गई है।
  • 95% तक भुगतान जमा: अधिकांश आवंटियों ने अपनी जीवन भर की पूंजी जमा कर दी है, लेकिन निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद सुस्त है।

“परियोजना में लगातार हो रही देरी के कारण आवंटियों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ गंभीर मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। लोग बैंकों की ईएमआई, दुकानों के किराये और अन्य खर्चों के बोझ तले दब गए हैं।”

— जयेश सूद, सचिव (R-1 & R-2 कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन)

💔 गाढ़ी कमाई दांव पर: सोना गिरवी रखा, मकान तक बेचे

आवंटी **विवेक अग्रवाल** ने पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि कई मध्यमवर्गीय आवंटियों ने दुकानें खरीदने के लिए अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स लगाईं, बैंक लोन लिए, सोना गिरवी रखा और कुछ ने तो अपने मकान तक बेच दिए। उम्मीद थी कि दुकान मिलते ही कारोबार शुरू होकर आमदनी होगी, लेकिन परियोजना लटकने से अब वे चौतरफा आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

⚠️ हाई कोर्ट के आदेश का भी असर नहीं, उल्टे थमा रहे 18% ब्याज का नोटिस

आवंटियों का आरोप है कि RLDA और प्रोजेक्ट ऑफिस में बार-बार पत्राचार के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट भी पहुंचा, जहां कोर्ट ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ प्रोजेक्ट 3 साल लेट है, वहीं दूसरी तरफ RLDA उन आवंटियों को नोटिस भेजकर 18% वार्षिक ब्याज के साथ बकाया 2-3 किश्तें तुरंत जमा करने का दबाव बना रहा है।

📢 आवंटियों की मुख्य मांगें:

  1. त्वरित पजेशन: बचा हुआ निर्माण कार्य प्राथमिकता पर पूरा कर पजेशन की पक्की (निश्चित) तारीख घोषित की जाए।
  2. 18% की दर से मुआवजा: पजेशन में हुई 3 साल की देरी के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए आवंटियों को पिछले 3 वर्षों का 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से मुआवजा दिया जाए।
  3. उत्पीड़न पर रोक: किश्तों के नाम पर भेजे जा रहे अनुचित ब्याज नोटिसों को तुरंत वापस लिया जाए।

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