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Thakur Roshan Singh Nawada Village Khannaut Bridge Shahjahanpur: पक्के पुल से बदली नवादा की तस्वीर

Kakori Train Action Day Special Thakur Roshan Singh Village Nawada Khannaut Bridge Shahjahanpur UP News: काकोरी ट्रेन एक्शन डे स्पेशल: शहीद ठाकुर रोशन सिंह की जन्मभूमि का 70 साल का दर्द मिटा, खन्नौत पर पक्के पुल ने बदली नवादा की तस्वीर

शहीद की जन्मभूमि का 70 साल का दर्द मिटा: खन्नौत नदी पर पक्के पुल ने बदली नवादा की तस्वीर; 3 पीढ़ियों के संघर्ष के बाद सीएम योगी ने पूरा किया वादा

शाहजहांपुर। देश की आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अमर शहीद **ठाकुर रोशन सिंह** की जन्मभूमि नवादा ने आजादी के बाद भी दशकों तक विकास से कटे रहने का दंश झेला। खन्नौत नदी पर पक्का पुल न होने के कारण बारिश और बाढ़ के दौरान गांव का संपर्क महीनों तक टूटा रहता था। लेकिन उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद खन्नौत नदी पर पक्का पुल बनकर तैयार हुआ और करीब तीन पीढ़ियों से चली आ रही इस भीषण समस्या का स्थायी समाधान हो गया।

🏛️ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया था संज्ञान

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर खन्नौत नदी पर पुल निर्माण की मांग रखी थी। इसके बाद 25 फरवरी 2018 को शाहजहांपुर में खन्नौत नदी पर पक्के पुल, सड़क व अन्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। निर्माण पूरा होने के बाद 30 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री खुद नवादा गांव पहुंचे, शहीद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों से मुलाकात की।

📜 अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह का गौरवशाली इतिहास

  • जन्म: 19 दिसंबर 1892 को शाहजहांपुर के नवादा गांव में ठाकुर जंगी सिंह और कौशल्या देवी के घर हुआ।
  • अद्वितीय साहस (1922): बरेली में प्रदर्शन के दौरान ब्रिटिश पुलिस के लाठीचार्ज के बीच उन्होंने एक अंग्रेज अधिकारी की बंदूक छीन ली थी, जिसके लिए उन्हें 2 साल की कठोर जेल हुई।
  • क्रांतिकारी सफर: जेल से छूटने के बाद वे 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' के सक्रिय सदस्य बने।
  • काकोरी कांड व बलिदान: 1925 के काकोरी कांड के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। 19 दिसंबर 1927 को प्रयागराज की नैनी जेल में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के साथ ठाकुर रोशन सिंह को भी फांसी दी गई।

🌉 पक्का पुल बना तो आसान हुई जिंदगियां

खन्नौत नदी पर पक्का पुल बनने से नवादा और आसपास के दर्जनों गांवों की तस्वीर बदल चुकी है:

  • निर्बाध आवागमन: बारिश के मौसम में गांव के कटने का डर अब खत्म हो गया है।
  • शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा: विद्यार्थियों का स्कूल-कॉलेज पहुंचना और मरीजों को आपात स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचाना आसान हुआ है।
  • किसानों को लाभ: किसान अपनी फसलों को आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं।
  • स्मारक एवं डिग्री कॉलेज: क्षेत्र में डिग्री कॉलेज और शहीद ठाकुर रोशन सिंह के पैतृक घर को स्मारक के रूप में विकसित किया गया है, जो नई पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा दे रहा है।

“नवादा की कहानी केवल एक पुल निर्माण की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गांव की तीन पीढ़ियों के संघर्ष और उस अमर शहीद के सम्मान की गाथा है, जिसने भारत मां की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी।”

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