जलकल विभाग में 2007 की बैकलॉग भर्ती पर उठे गंभीर सवाल: बिना अनिवार्य अर्हता नियुक्ति का आरोप; जलकल कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री योगी से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
लखनऊ। जलकल कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) ने नगर निगम लखनऊ के जलकल विभाग में वर्ष 2007 में हुई बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का पर्दाफाश करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। संघ ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
📄 संघ द्वारा उठाए गए मुख्य आरोप व अनियमितताएं:
- बिना अनिवार्य ITI अर्हता के नियुक्ति: शासन के स्पष्ट शासनादेशों (30 दिसंबर 1981 व 10 दिसंबर 1982) के तहत जूनियर फिटर पद हेतु संबंधित ट्रेड में ITI प्रमाण पत्र होना अनिवार्य था। आरोप है कि 17/18 दिसंबर 2007 को संबंधित अभ्यर्थी को बिना इस अनिवार्य अर्हता के पद पर नियुक्त कर लिया गया।
- विभागीय शर्तों का उल्लंघन: वर्ष 2015 में कर्मचारी को इस शर्त पर ITI प्रशिक्षण की अनुमति दी गई थी कि भविष्य में इसका कोई वित्तीय या पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। संघ का आरोप है कि जलकल प्रशासन ने अपने ही आदेशों को दरकिनार कर बाद में इस प्रशिक्षण का वित्तीय लाभ वेतन आदि में प्रदान कर दिया।
📌 जलकल कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें:
- उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच: वर्ष 2007 की बैकलॉग भर्ती एवं नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- अभिलेखों का पुनरीक्षण: नियुक्ति के समय लागू शासनादेशों, नियमावली एवं शैक्षणिक योग्यताओं का पुन: परीक्षण हो।
- दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई: जांच में नियमों के उल्लंघन पर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।
- अवैध नियुक्ति निरस्त करने की मांग: तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए गैर-कानूनी नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
“कर्मचारियों की भर्ती में नियमों, योग्यता और पारदर्शिता का पालन होना अनिवार्य है। संघ किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि एक पारदर्शी और नियमसंगत प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।”
— तूफानी, अध्यक्ष (जलकल कर्मचारी संघ, उ०प्र० लखनऊ)

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