बिजली के दर्दनाक हादसे में दोनों हाथ गंवाने वाले नीरज को KGMU ने दिया आत्मनिर्भरता का नया सहारा: PMR विभाग ने निःशुल्क उपलब्ध कराए प्रोस्थेटिक हाथ
लखनऊ: चिकित्सा केवल शारीरिक व्याधियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टूटे हुए मानवीय हौसलों को पुनः उड़ान देने का भी सामर्थ्य रखती है। इसका सजीव उदाहरण किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग में देखने को मिला। भदोही निवासी 22 वर्षीय युवक नीरज यादव, जिसने जनवरी 2026 में एक गंभीर विद्युत दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिए थे, को संस्थान के चिकित्सकों ने आधुनिक प्रोस्थेटिक हाथ (कृत्रिम हाथ) लगाकर आत्मनिर्भर जीवन का नया संबल प्रदान किया है।
📌 मानवीय पहल एवं पुनर्वास के मुख्य बिंदु:
- हादसा और संघर्ष: जनवरी 2026 में बिजली करंट की चपेट में आने से भदोही के 22 वर्षीय नीरज के दोनों हाथ काटने पड़े थे।
- आर्थिक तंगी से पार: निजी अस्पतालों में ₹50,000 की लागत वाले प्रोस्थेटिक हाथों को KGMU ने समाजसेवियों के सहयोग से बिल्कुल निःशुल्क उपलब्ध कराया।
- सेवा संकल्प अभियान: KGMU कुलपति प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद के मार्गदर्शन में संचालित अभियान के तहत मिली सहायता।
- प्रशिक्षण व रिहैबिलिटेशन: हाथ लगाने के साथ-साथ दैनिक क्रियाकलापों और हाथ के संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
- PMR टीम का प्रयास: विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता व विशेषज्ञों की टीम ने तकनीकी व सामाजिक स्तर पर समन्वय कर दी नई जिंदगी।
📊 मरीज विवरण एवं पुनर्वास प्रक्रिया का खाका
| विवरण / पैरामीटर | तथ्य एवं चिकित्सकीय जानकारी |
|---|---|
| मरीज का नाम व पता | नीरज यादव (उम्र 22 वर्ष), निवासी जनपद भदोही, उत्तर प्रदेश |
| दुर्घटना का कारण | जनवरी 2026 में उच्च क्षमता विद्युत करंट की चपेट में आने से दोनों हाथ कटे (Bilateral Amputation) |
| उपचार व पुनर्वास इकाई | प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक यूनिट, PMR विभाग, KGMU |
| उपचार की लागत (निजी बनाम KGMU) | निजी केंद्रों पर लगभग ₹50,000; KGMU में स्वयंसेवी सहयोग से पूर्णतः निःशुल्क |
| वर्तमान स्थिति | हाथों का सफल प्रत्यारोपण, नियमित ग्रिपिंग व दैनिक क्रियाओं की ट्रेनिंग जारी |
गरीबी बनी थी रोड़ा: इनर व्हील क्लब के सहयोग से जुटाया गया फंड
दुर्घटना के बाद नीरज के सामने सबसे बड़ा संकट आजीविका और सामान्य गतिविधियों का था। परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति के कारण कृत्रिम अंग लगवाना उनके लिए असंभव प्रतीत हो रहा था। जुलाई 2026 में नीरज जब KGMU के PMR विभाग पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उनकी व्यथा को गंभीरता से समझा।
संस्थान के चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मानवीय पहल करते हुए इनर व्हील क्लब तथा अन्य स्वयंसेवी संगठनों से संपर्क स्थापित किया। इन संस्थाओं के सहयोग से जरूरी ₹9,500 की आंतरिक सामग्री लागत जुटाई गई और शेष विनिर्माण व चिकित्सकीय प्रक्रिया को विभागीय स्तर पर निःशुल्क संपन्न कराया गया।
सिर्फ अंग नहीं, स्वावलंबन का मिला संबल
प्रोस्थेटिक हाथ लगाए जाने के बाद KGMU की विशेषज्ञ टीम ने नीरज का पुनर्वास प्रशिक्षण प्रारंभ किया। उन्हें वस्तुओं को पकड़ने, लिखने, भोजन करने और रोजमर्रा के आवश्यक कार्य स्वयं करने का अभ्यास कराया जा रहा है।
"आर्थिक रूप से वंचित और असहाय मरीजों को उन्नत पुनर्वास सेवाएं प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और एक गरिमामयी जीवन देना ही हमारे विभाग का प्राथमिक ध्येय है। नीरज का मुस्कुराता चेहरा और उसका बढ़ता आत्मविश्वास हमारी पूरी टीम के लिए सबसे बड़ा पारितोषिक है।"
— डॉ. अनिल कुमार गुप्ता (विभागाध्यक्ष, PMR विभाग, KGMU)
इस मानवीय मिशन में जुटी समर्पित मेडिकल टीम
KGMU कुलपति प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद की प्रेरणा से संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ के तहत इस जटिल पुनर्वास को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम में निम्नलिखित विशेषज्ञ शामिल रहे:
- डॉ. अनिल कुमार गुप्ता: विभागाध्यक्ष, PMR विभाग
- डॉ. आराधना शुक्ला: असिस्टेंट प्रोफेसर
- शगुन सिंह: इंचार्ज, प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक यूनिट
- विमलेश एवं मनोज: कुशल बायोमेडिकल तकनीशियन
- शोभाराम यादव: मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर (MSSO)


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