नैनीताल बैंक में बड़ा लोन घोटाला: जाली दस्तावेजों और फर्जी संपत्ति मालिकों के जरिए हड़पे ₹1.87 करोड़, वकील व वैल्यूअर सहित 18 पर FIR दर्ज
लखनऊ: राजधानी के डालीगंज स्थित नैनीताल बैंक की शाखा में फर्जी दस्तावेज, जाली पहचान पत्र और संपत्ति के कूटरचित अभिलेखों के जरिए लगभग 1.87 करोड़ रुपये के ऋण हड़पने का बड़ा मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन द्वारा कोर्ट में अर्जी दाखिल किए जाने के बाद, अदालत के आदेश पर हसनगंज कोतवाली पुलिस ने पैनल अधिवक्ता, वैल्यूअर और लोन धारकों सहित कुल 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व साजिश की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है।
📌 लोन घोटाले से जुड़े मुख्य बिंदु:
- घोटाले की कुल राशि: करीब ₹1,87,55,682 (ब्याज व अन्य मिलाकर ₹1.94 करोड़ तक)।
- बैंक शाखा: नैनीताल बैंक, डालीगंज शाखा, लखनऊ।
- कार्यप्रणाली: असली मालिकों की जगह फर्जी लोगों को खड़ा कर और जाली मुहर-हस्ताक्षर से होम लोन व सीसी लोन पास कराए गए।
- आरोपियों की संख्या: पैनल एडवोकेट्स, वैल्यूअर और मुख्य लाभार्थियों सहित 18 पर मुकदमा।
- कार्रवाई: कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हसनगंज पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।
एनपीए होने के बाद खुली पोल: असली मालिकों की जगह खड़े किए डमी लोग
बैंक शाखा प्रबंधन के अनुसार, 17 मई से 27 जून 2025 के दौरान डालीगंज शाखा से ताबड़तोड़ कई आवास ऋण (Home Loans) स्वीकृत किए गए थे। जब इन ऋण खातों में नियमित किस्तों की अदायगी नहीं हुई, तो बैंक ने नियमों के तहत इन्हें गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) घोषित कर दिया।
इसके बाद जब बैंक की आंतरिक सतर्कता टीम ने भौतिक सत्यापन किया, तो होश उड़ाने वाले तथ्य सामने आए:
- फर्जी सेल डीड: रजिस्ट्री व बंधक रखे गए संपत्ति दस्तावेजों पर अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर और मुहर पाए गए।
- डमी प्रॉपर्टी ओनर: वास्तविक संपत्ति मालिकों के स्थान पर फर्जी लोगों को खड़ा कर संपत्तियां बैंक के पास गिरवी रख दी गईं।
- मालिकों का इनकार: मौके पर जांच के दौरान असली भू-स्वामियों ने ऐसी किसी भी संपत्ति पर लोन लेने की जानकारी से साफ इनकार कर दिया।
बैंक के पैनल अधिवक्ता और वैल्यूअर की संदिग्ध भूमिका
बैंक ने अपनी जांच रिपोर्ट में अपने अधिकृत पैनल अधिवक्ताओं आशीष सिंह और नरेंद्र सिंह मेहता तथा पैनल वैल्यूअर सत्येंद्र कुमार वर्मा पर भी सीधे मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
"आरोप है कि लीगल पैनल वकीलों ने स्वामित्व की गहन जांच किए बिना जानबूझकर क्लीन टाइटल सर्च रिपोर्ट तैयार की, जबकि वैल्यूअर ने मिलीभगत कर संपत्तियों का मूल्यांकन बाजार भाव से कई गुना अधिक दिखाया, जिससे जालसाजों को करोड़ों का ऋण आसानी से मिल गया।"
📊 फर्जी दस्तावेजों पर स्वीकृत प्रमुख ऋणों का विवरण
| आरोपी / खाताधारक का नाम | हड़पी गई ऋण राशि |
|---|---|
| भावना रस्तोगी | ₹20.00 लाख |
| दिवाकर उपाध्याय | ₹20.00 लाख |
| अभिषेक अस्थाना | ₹20.00 लाख |
| मोहम्मद उमैर | ₹20.00 लाख |
| शहजाद आलम | ₹20.00 लाख |
| मुकेश यादव | ₹20.00 लाख |
| शेख मोहम्मद सलीम | ₹19.00 लाख |
| मोहम्मद रेहान | ₹18.00 लाख |
| आफताब आलम | ₹18.00 लाख |
| मो. उमेर | ₹10.00 लाख |
| मॉडर्न फर्नीचर | ₹9.50 लाख |
कोर्ट के आदेश पर इन 18 आरोपितों पर दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस के अनुसार मामले में भारती अग्रवाल, रूचि अग्रवाल, ज्ञान सिंह, बाबू लाल, आशीष सिंह, नरेंद्र सिंह मेहता, सत्येंद्र कुमार वर्मा, भावना रस्तोगी, दिवाकर उपाध्याय, अभिषेक अस्थाना, मोहम्मद उमैर, शेख मोहम्मद सलीम, मोहम्मद रेहान, आफताब आलम, शहजाद आलम, मुकेश यादव, मॉडर्न फर्नीचर और मो. उमेर के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज हुआ है।
हसनगंज कोतवाली प्रभारी निरीक्षक चितवन कुमार ने बताया कि सभी बैंक खातों, मूल रजिस्ट्री फाइलों और गवाहों के बयानों की फोरेंसिक व तकनीकी जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर शीघ्र आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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