“साहब! अब हम कहां जाएंगे”: 20–25 साल की सेवा के बाद भी भविष्य अनिश्चित; संविदा टीबी कर्मचारियों ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से उठाई समायोजन की मांग
लखनऊ। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में वर्षों से समर्पित भाव से काम कर रहे संविदा टीबी कर्मचारियों के भविष्य का मुद्दा अब शासन के चौखट पर पहुँच गया है। पिछले **20 से 25 वर्षों** से लगातार टीबी मरीजों की सेवा में लगे अधिकांश कर्मचारी अब **45 से 55 वर्ष** की उम्र पार कर चुके हैं। ऐसे में भविष्य की अनिश्चितता को लेकर उनके मन में गहरा संकट है कि जीवन के इस पड़ाव पर वे कहां जाएंगे।
📋 संघ अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्र ने उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखी मांगें
उत्तर प्रदेश क्षय रोग वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष **करुणा शंकर मिश्र** ने उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री **बृजेश पाठक** से मुलाकात कर संविदा कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से रखा:
- पद सृजन व नियमानुसार समायोजन: वर्षों से कार्यरत अनुभवी कर्मचारियों के लिए स्थाई पदों का सृजन कर उनका समायोजन किया जाए।
- विभागीय स्तर पर अटका प्रस्ताव: संघ ने बताया कि शासन के निर्देशों के बावजूद विभागीय स्तर पर पद सृजन का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
- लंबित समस्याओं का समाधान: सेवाकाल से जुड़ी अन्य लंबे समय से लंबित मांगों का त्वरित निस्तारण कराया जाए।
“आप सब निश्चिंत रहें। सरकार आपकी सेवाओं और समर्पण से भली-भांति अवगत है। आपकी समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं।”
— बृजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री (उत्तर प्रदेश)✨ उपमुख्यमंत्री के आश्वासन से जगी नई आस
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा कर्मचारियों की पीड़ा को संवेदनशीलता से सुने जाने के बाद कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर उम्मीद की एक नई किरण जगी है। संघ ने मांग की है कि पद सृजन का प्रस्ताव जल्द तैयार कराकर समायोजन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।


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