68500 शिक्षक भर्ती: अभ्यर्थियों ने घेरा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का आवास; पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशानुसार 40% कटऑफ पर नियुक्ति की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने शनिवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास का घेराव किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि शासन स्तर पर बैठकों में मुख्यमंत्री से वार्ता कर अंतिम निर्णय लेने का भरोसा दिया गया था, किंतु समय बीतने के बाद भी कोई ठोस शासनादेश जारी नहीं हुआ। इसी उपेक्षा से नाराज अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचकर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों को तत्काल लागू करने की मांग उठाई।
📌 प्रदर्शन एवं भर्ती विवाद के मुख्य बिंदु:
- प्रमुख मांग: राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश के तहत OBC वर्ग को आरक्षित श्रेणी मानते हुए 150 में से 60 अंक (40%) के आधार पर संशोधित परिणाम जारी हो।
- आवास घेराव: बेसिक शिक्षा मंत्री की बैठक में मिले आश्वासन पर अमल न होने के विरोध में डिप्टी सीएम आवास का घेराव।
- प्रशासनिक स्वीकारोक्ति: बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विज्ञापनों में OBC वर्ग को 5% छूट देकर आरक्षित वर्ग में रखा जाना चाहिए था, जो उस समय नहीं हुआ।
- मुख्यमंत्री स्तर से हल: मामले को सात वर्ष बीतने के कारण अधिकारियों ने माना कि नीतिगत समाधान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से ही संभव है।
- ईको गार्डन में धरना: लखनऊ के ईको गार्डन में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का अनवरत धरना बदस्तूर जारी।
📊 68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विवाद का गणित
| श्रेणी / वर्ग | निर्धारित कट-ऑफ (अंक / %) | अभ्यर्थियों की मांग / आयोग की संस्तुति |
|---|---|---|
| सामान्य वर्ग (General) | 67 अंक (45%) | यथावत रखा गया |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 67 अंक (आरक्षण लाभ नहीं मिला) | 5% की छूट के साथ 60 अंक (40%) पर संशोधित परिणाम जारी हो |
| एससी / एसटी वर्ग (SC/ST) | 60 अंक (40%) | आरक्षण का लाभ पूर्व से अनुमन्य |
10 सितंबर की उच्चस्तरीय बैठक और विधिक पेच
अभ्यर्थियों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने बताया कि बीते 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई थी।
बैठक में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए यह बात स्वीकार की गई थी कि नियमों के अनुसार ओबीसी वर्ग को 5 प्रतिशत की छूट मिलनी चाहिए थी और उन्हें आरक्षित श्रेणी में माना जाना था। हालांकि, उस समय यह छूट दिए बिना ही विज्ञापन जारी हुआ और भर्ती प्रक्रिया संपन्न कराकर नियुक्तियां दे दी गईं।
"चूंकि इस भर्ती प्रक्रिया को लगभग 7 वर्ष का लंबा समय बीत चुका है, इसलिए विधिक और प्रशासनिक रूप से इस जटिल मामले में अंतिम निर्णय केवल मुख्यमंत्री स्तर से ही लिया जा सकता है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री से वार्ता कर रास्ता निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई प्रगति न होने के कारण हमें उप मुख्यमंत्री के द्वार पर आना पड़ा।"
— तूफान सिंह (अभ्यर्थी प्रतिनिधि एवं आंदोलन संयोजक)
ईको गार्डन में अनवरत संघर्ष जारी
उपमुख्यमंत्री आवास पर घेराव के साथ-साथ राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन धरना स्थल पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का क्रमिक व अनवरत धरना जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। जब तक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों का अनुपालन करते हुए पात्र अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान नहीं किए जाते, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।



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