'रामकाज में कालनेमि बनकर घुसेंगे बाबरी के भक्त, पहचानें उनकी साजिश': श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव में बोले सीएम योगी; विरोधियों पर साधा निशाना
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के सूत्रधार और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ समारोह में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने वालों पर कड़ा प्रहार किया और बजरंग दल व विहिप कार्यकर्ताओं को सचेत किया कि रामकाज में विघ्न डालने के लिए ‘बाबरी के भक्त’ कालनेमि का रूप धरकर घुसपैठ करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसी साजिशों को बेनकाब करने का आह्वान किया।
📌 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- कालनेमि की साजिशों से सतर्कता: रामकाज को बदनाम और कमजोर करने के लिए बाबरी के पैरोकार अब छद्म रूप में सामने आ रहे हैं।
- वैचारिक विजय: जो दल और नेता कभी रामभक्तों पर गोलियां चलवाते थे, आज वे स्वयं को रामभक्त सिद्ध करने की होड़ में हैं।
- अशोक सिंघल का पराक्रम: 500 वर्षों से बिखरी हिंदू शक्ति को एकजुट कर आंदोलन को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया।
- विपक्षी अड़ंगों की याद: न्यायालय में कांग्रेस, सपा और वामपंथियों द्वारा राम मंदिर निर्माण रोकने हेतु खड़े किए गए अवरोधों का उल्लेख।
- गोरक्षा आचरण का विषय: प्रदेश की 7,700 गोशालाओं में 16 लाख गोवंश संरक्षित; प्रति गोवंश ₹1,500 प्रतिमाह भरण-पोषण।
📊 श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन: संघर्ष से भव्य मंदिर निर्माण का सफर
| वर्ष / मील का पत्थर | ऐतिहासिक घटनाक्रम / नेतृत्व | प्रभाव एवं स्वरूप |
|---|---|---|
| 1528 | जन्मभूमि पर मंदिर का विध्वंस | संतों, नागाओं और वीरों का 500 वर्षों का अनवरत संघर्ष |
| 1982-1983 | अशोक सिंघल को विहिप का दायित्व, मुक्ति यज्ञ समिति का गठन | बिखरे हिंदू समाज को संगठित कर जन-आंदोलन का रूप दिया |
| 2 नवंबर 1990 | अयोध्या में कारसेवकों पर लाठीचार्ज व गोलीबारी | दमन के सामने नहीं झुके अशोक सिंघल, सिंह गर्जना जारी रही |
| वर्तमान स्वरूप (2026) | अयोध्या में भव्य मंदिर, राम पथ व भक्ति पथ का निर्माण | अशोक सिंघल के सपनों का साकार स्वरूप, वैश्विक आकर्षण |
"वाणी तभी मंत्र बनती है जब कथन और आचरण में भेद न हो"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और अशोक सिंघल के बीच के आत्मीय संबंधों का स्मरण करते हुए कहा कि दोनों महापुरुष घंटों बैठकर मंदिर की रूपरेखा और आंदोलन की रणनीति बनाते थे।
"अशोक सिंघल जी को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने जो कहा, उसे अपने जीवन में चरितार्थ करके दिखाया। 'राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम' उनके जीवन का मूलमंत्र बन गया था। आज जो लोग राम मंदिर का विरोध करते थे, जिन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर सवाल खड़े करते हुए हलफनामे दाखिल किए थे, वही अब राजनीतिक मजबूरी में खुद को रामभक्त साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। यही विश्व हिन्दू परिषद की सबसे बड़ी वैचारिक विजय है।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
कांग्रेस, सपा और वामपंथियों ने अदालतों में रोके थे रास्ते
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मामला न्यायालय में था, तब एक तरफ अशोक सिंघल के नेतृत्व में साक्ष्य जुटाए जा रहे थे, तो दूसरी ओर कांग्रेस, सपा और वामपंथी दल फैसला न आने देने के लिए निरंतर अवरोध खड़े कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिलान्यास और भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण मिलने के बाद भी विपक्षी दलों के नेताओं ने वोट बैंक के भय से उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। अशोक सिंघल द्वारा जलाई गई ज्योति केवल मंदिर तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह देश के सांस्कृतिक मानबिंदुओं की पुनर्स्थापना और औपनिवेशिक दासता के प्रतीकों को समाप्त करने का महायज्ञ थी।
गोरक्षा भाषण नहीं, आचरण का विषय: 16 लाख गोवंश का संरक्षण
गोरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि यह केवल भाषणबाजी या सड़क पर प्रदर्शन का विषय नहीं है। वर्ष 2017 में सरकार बनते ही अवैध बूचड़खानों को बंद कराया गया। आज प्रदेश की 7,700 से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया गया है, जिनके भरण-पोषण के लिए प्रत्येक गोवंश ₹1,500 प्रतिमाह सीधे प्रदान किए जा रहे हैं।
विहिप नेतृत्व एवं पूज्य संतों ने किया नमन
विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने राम मंदिर निर्माण को हिंदू स्वाभिमान से जोड़कर पूरे विमर्श को बदल दिया। उन्होंने एकल विद्यालयों और पूर्वोत्तर में शिक्षा प्रकल्पों के माध्यम से वंचित वर्गों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जगतगुरु श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज ने कहा कि अशोक सिंघल का त्याग और संघर्ष युगों-युगों तक प्रेरणा देता रहेगा। समारोह के दौरान अशोक सिंघल के जीवन और संघर्ष पर आधारित एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) का भी प्रदर्शन किया गया।


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