'हिंदी में दवा लिखें चिकित्सक, मरीज को पता होना चाहिए क्या खा रहा है': डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने डॉक्टरों से की अपील; अवधी-भोजपुरी में संवाद पर भी जोर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के चिकित्सकों से एक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील आग्रह किया है। उन्होंने डॉक्टरों से चिकित्सीय पर्चे (Prescription) पर दवाओं और पैथोलॉजी/रेडियोलॉजी जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आह्वान किया है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि एक मरीज और उसके तीमारदार को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसे कौन-सी औषधि दी जा रही है और उसके सेवन की सही विधि क्या है।
📌 उपमुख्यमंत्री के संदेश के प्रमुख बिंदु:
- हिंदी व देवनागरी में पर्चा: दवाओं के नाम, खुराक और जांचों का विवरण देवनागरी लिपि में साफ-साफ लिखा जाए।
- मरीज की समझ प्राथमिकता: मरीज को स्पष्ट पता होना चाहिए कि वह किस बीमारी के लिए कौन-सी दवा का सेवन कर रहा है।
- मातृभाषा में संवाद: ग्रामीण व स्थानीय मरीजों की सुविधा के लिए चिकित्सकों से अवधी, भोजपुरी और बुंदेली में बात करने की अपील।
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती: इस अवसर को भारतीय भाषाओं के अधिकाधिक प्रयोग के 'संकल्प दिवस' के रूप में रेखांकित किया गया।
- वैश्विक प्रेरणा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक मंचों पर भारतीय भाषाओं के प्रयोग का दिया गया प्रेरक उदाहरण।
📊 चिकित्सा में भाषाई सरलीकरण: पहल एवं उसके प्रत्यक्ष लाभ
| प्रस्तावित बदलाव | मौजूदा स्थिति | मरीज को मिलने वाला लाभ |
|---|---|---|
| दवाओं के नाम | अंग्रेजी कर्सिव (अस्पष्ट लिखावट) | हिंदी में होने से गलत दवा मिलने का जोखिम शून्य |
| खुराक व सेवन विधि | लैटिन/मेडिकल संकेत (OD, BD, TDS) | सुबह-दोपहर-शाम स्पष्ट समझ, त्वरित रिकवरी |
| परामर्श की भाषा | अंग्रेजी या अत्यधिक औपचारिक भाषा | अवधी/भोजपुरी में खुलकर रोग साझा कर सकेंगे |
"मरीज और डॉक्टर के बीच भाषा न बने बाधा": ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को भेजे अपने पत्र में इस बात पर बल दिया कि पर्चे पर लिखी दवाओं और जांचों के नाम इतने सुपाठ्य होने चाहिए कि सामान्य साक्षर व्यक्ति भी उन्हें आसानी से पढ़ सके। अक्सर देखा जाता है कि अंग्रेजी की अस्पष्ट लिखावट के कारण मेडिकल स्टोर संचालक भी भ्रमित होते हैं, जिससे मरीजों को गलत दवाएं मिलने की आशंका बनी रहती है।
"चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सर्वोच्च सेवा कार्य है। जब एक चिकित्सक मरीज से उसकी अपनी बोली—चाहे वह अवधी हो, भोजपुरी हो या बुंदेली—में बात करता है, तो मरीज का आधा तनाव वहीं खत्म हो जाता है। मरीज को अपनी बीमारी, दी जा रही दवा और उसके प्रभाव की पूरी जानकारी उसकी मातृभाषा में मिलनी चाहिए।"
— ब्रजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उप्र)
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरणा और भारतीय भाषाओं का सम्मान
डिप्टी सीएम ने अपने पत्र में एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का स्मरण कराते हुए कहा कि इस पावन अवसर को भारतीय भाषाओं के अधिकाधिक प्रयोग के 'संकल्प दिवस' के रूप में अंगीकार किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक आचरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर भी हिंदी और भारतीय भाषाओं में संवाद कर देश की सांस्कृतिक गरिमा को विश्वभर में स्थापित किया है। इसी तर्ज पर चिकित्सा जगत में भी भाषाई औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागकर लोकभाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आयुर्वेद और भारतीय जीवनशैली से जोड़ने का क्रम
उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजधानी लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस से जुड़े सम्मेलन में भी उपमुख्यमंत्री ने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और आयुर्वेद को प्रत्येक परिवार की जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया था। चिकित्सा पर्चों में हिंदी का उपयोग इसी समग्र कल्याणकारी सोच का विस्तार माना जा रहा है।


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