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'नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें': नवयुग कन्या महाविद्यालय में 'आत्मनिर्भर भारत के लिए नवाचार' पर प्रेरक संगोष्ठी

'आत्मनिर्भर भारत के लिए नवाचार': नवयुग कन्या महाविद्यालय में कौशल, टेक्नोलॉजी और पर्सनल ब्रांडिंग पर भव्य संगोष्ठी; विशेषज्ञों ने दिए स्टार्टअप सफलता के मंत्र

📍 स्थान: नवयुग कन्या महाविद्यालय, लखनऊ | 📅 दिनांक: 30 सितंबर 2026 | 🎓 श्रेणी: उच्च शिक्षा, उद्यमिता, स्टार्टअप इंडिया, कौशल विकास एवं महिला सशक्तिकरण

लखनऊ: नवयुग कन्या महाविद्यालय, लखनऊ में वाणिज्य विभाग, अर्थशास्त्र विभाग तथा इंडस्ट्री एकेडेमिया इंटीग्रेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत "आत्मनिर्भर भारत के लिए नवाचार" विषय पर एक प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कॉरपोरेट विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और मोटिवेटर्स ने छात्राओं को आधुनिक उद्यमिता, डिजिटल टूल्स, पर्सनल ब्रांडिंग और तकनीकी कौशल को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के व्यावहारिक गुर सिखाए।

📌 संगोष्ठी के प्रमुख प्रेरणादायक बिंदु:

  • समस्या-समाधान ही व्यापार: रोजमर्रा की परेशानियों को बिजनेस आइडिया में बदलकर सफल स्टार्टअप की नींव रखने का आह्वान।
  • सफल स्टार्टअप्स के उदाहरण: ओला, उबर, जोमैटो, लेंसकार्ट, अर्बन कंपनी, जेप्टो और फिजिक्सवाला की विकास यात्रा से छात्राओं को कराया रूबरू।
  • स्वदेशी की वैश्विक उड़ान: हल्दीराम का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक घरेलू भारतीय ब्रांड ने 160 से अधिक देशों में अपनी पहचान बनाई।
  • डिजिटल पहचान: लिंक्डइन और पर्सनल ब्रांडिंग के जरिए प्रतिस्पर्धी युग में पेशेवर साख बनाने पर विशेष मार्गदर्शन।
  • जॉब क्रिएटर बनने का आह्वान: 'नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनें' के मूलमंत्र पर जोर।

📊 प्रमुख वक्ता एवं संगोष्ठी के मुख्य विषयगत सत्र

प्रमुख वक्ता संस्थान / पद सत्र का मुख्य फोकस व संदेश
प्रियांक गुप्ता प्रोजेक्ट मैनेजर, सेंटम फाउंडेशन स्टार्टअप इंडिया, प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स और सेवा क्षेत्र के बिजनेस मॉडल।
डॉ. हर्षिता श्रीवास्तव आईआईएलएम (IILM) पर्सनल ब्रांडिंग, लिंक्डइन का प्रभावी उपयोग और डिजिटल प्रोफाइल मैनेजमेंट।
आशीष श्रीवास्तव मोटिवेटर एवं लाइफ कोच जीवन कौशल, आधुनिक उद्यमिता, स्वदेशी ब्रांड्स और रोजगार सृजन।
प्रो. मंजुला उपाध्याय प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय अध्यक्षीय उद्बोधन: संकट को अवसर में बदलना, निरंतर सीखना व आत्म-निर्भरता।

समस्याओं को समाधान में बदलकर खड़ा होता है बड़ा बिजनेस

सेंटम फाउंडेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रियांक गुप्ता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक सफल उद्यमी वही बनता है जो समाज की समस्याओं को गहराई से देखकर उनका सरल समाधान पेश करता है। उन्होंने ओला, उबर, जोमैटो, लेंसकार्ट और अर्बन कंपनी (Urban Company) का उदाहरण दिया।

उन्होंने समझाया कि कैसे घरों की रोजमर्रा की जरूरतों—जैसे साफ-सफाई, प्लंबिंग, सौंदर्य सेवाओं और त्वरित डिलीवरी की दिक्कतों को पहचानकर युवाओं ने आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तैयार किए और यूनिकॉर्न कंपनियां स्थापित कीं।

लिंक्डइन और पर्सनल ब्रांडिंग: करियर को नई ऊंचाई देने का माध्यम

आईआईएलएम की डॉ. हर्षिता श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा तकनीकी दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी प्रोफेशनल पहचान बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिंक्डइन के समुचित उपयोग और पर्सनल ब्रांडिंग के तरीकों पर प्रकाश डाला।

वहीं, प्रसिद्ध मोटिवेटर आशीष श्रीवास्तव ने छात्राओं में जोश भरते हुए जेप्टो, फिजिक्सवाला और हल्दीराम के विस्तार की गाथा साझा की। उन्होंने कहा कि हल्दीराम जैसे पारंपरिक ब्रांड ने स्थानीय स्तर से शुरुआत कर आज 160 से अधिक देशों में अपनी धाक जमाई है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कौशल, तकनीक और सामाजिक समावेश ही आधुनिक व्यापार की रीढ़ हैं।

"वर्तमान भारत असीम संभावनाओं का देश है। युवाओं को अब केवल 'नौकरी चाहने वाला' बनने की मानसिकता से बाहर निकलकर 'नौकरी देने वाला' यानी उद्यमी बनना होगा।"
— आशीष श्रीवास्तव (मोटिवेटर)

"आपदा को अवसर में बदलने की सीख है आत्मनिर्भरता": प्रो. मंजुला उपाध्याय

सत्र की अध्यक्षता कर रहीं महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में छात्राओं को निरंतर नया सीखने और वैश्विक स्पर्धा के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने किस तरह शून्य से शुरुआत कर पीपीई किट्स और वेंटिलेटर्स का विश्वस्तरीय स्वदेशी निर्माण कर पूरी दुनिया में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की थी।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन वाणिज्य विभाग की डॉ. चनप्रीत कौर ने किया। इस संगोष्ठी के सफल आयोजन में डॉ. अनुरिमा बनर्जी, डॉ. प्रतिभा सिंह चौहान, डॉ. सुनीता सिंह, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. चंदन मौर्य, डॉ. मनीषा बड़ौनिया, सुश्री दीक्षा, डॉ. सौम्या शुक्ला और डॉ. गरिमा मिश्रा का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में वाणिज्य और अर्थशास्त्र विभाग की सैकड़ों छात्राओं और प्रवक्ताओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

निष्कर्ष: यह संगोष्ठी छात्राओं को लीक से हटकर सोचने, नए स्टार्टअप्स की रूपरेखा तैयार करने और तकनीकी रूप से सक्षम होकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित करने में अत्यंत सफल रही।

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