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UNGA 2026 में रिलायंस फाउंडेशन ने पेश किया भारत का AI विकास मॉडल: पांचवें 'इंडिया डे' में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक सहयोग पर दिया जोर

संयुक्त राष्ट्र में रिलायंस फाउंडेशन ने प्रस्तुत किया भारत का AI विकास मॉडल: पांचवें 'इंडिया डे' में डिजिटल क्रांति व महिला नेतृत्व पर मंथन; विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिया वैश्विक सहयोग का संदेश

📍 स्थान: न्यूयॉर्क / मुंबई | 📅 दिनांक: 29 सितंबर 2026 | 🌐 श्रेणी: अंतरराष्ट्रीय संबंध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एवं वैश्विक विकास
Minister Kamina Johnson Smith of Jamaica, Minister S Jaishankar of India, and Celeste Connors, President of East-West Centre, USA

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें ऐतिहासिक सत्र के दौरान रिलायंस फाउंडेशन, भारत में संयुक्त राष्ट्र (UN in India) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के संयुक्त तत्वावधान में पांचवें ‘इंडिया डे’ (India Day) का भव्य आयोजन किया गया। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत के तकनीकी नवाचारों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और समावेशी विकास के ऐसे सफल मॉडलों को प्रस्तुत किया गया, जिन्हें 'ग्लोबल साउथ' सहित समूचे विश्व में व्यापक पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

📌 पांचवें 'इंडिया डे' के प्रमुख आकर्षण:

  • वैश्विक मंच पर विमर्श: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सहित जमैका, सूरीनाम और घाना के शीर्ष मंत्रियों ने विकासशील देशों के सहयोग पर विचार रखे।
  • विशेष प्रकाशन का विमोचन: 'When Silicon Meets the Soil: India’s AI Revolution' शीर्षक से विशेष रिपोर्ट जारी, जिसमें 12 केस स्टडीज और 6 उभरते प्रयोग शामिल हैं।
  • थीमैटिक सत्र: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, महिला-नेतृत्व वाला विकास, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित 4 विषयगत सत्र।
  • मानवीय संवेदना संग AI: रिलायंस फाउंडेशन ने तकनीक को इंसानी संवेदना और समावेशी साझेदारी से जोड़ने की वकालत की।
  • एसडीजी 2030 लक्ष्य: संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत के स्केलेबल मॉडल्स को वैश्विक स्तर पर अपनाने का आह्वान।

📊 'इंडिया डे' 2026: प्रमुख सत्र, वक्ता एवं रणनीतिक बिंदु

प्रमुख सत्र / संस्था प्रमुख नेतृत्व / वक्ता रणनीतिक फोकस व विचार
रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स (Ruptures & Ramparts) डॉ. एस. जयशंकर (विदेश मंत्री, भारत) वैश्विक साझेदारी, यूएन की भूमिका और विकासशील देशों में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर।
ग्रामीण व डिजिटल सशक्तिकरण रोहित कंसल (सचिव, ग्रामीण विकास विभाग) जन-सुलभ इंफ्रास्ट्रक्चर; AI को आम इंसानों और स्थानीय भाषाओं के अनुकूल बनाना।
स्वास्थ्य व ऊर्जा रूपांतरण पुण्या सलीला श्रीवास्तव व संतोष कुमार सारंगी स्वास्थ्य ढांचे संग AI का एकीकरण और ग्रीन एनर्जी ग्रिड का कुशल प्रबंधन।
सहयोग एवं वैश्विक साझेदारी बी. श्रीनिवासन (रिलायंस फाउंडेशन) एआई व विकास को सीमाओं से परे ले जाना; मानवीय संवेदना के साथ जनसेवा।

वैश्विक सहयोग और बहुपक्षीय सुधारों पर विदेश मंत्री का जोर

उच्चस्तरीय सत्र ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स’ को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि आज की तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) को एकजुट होकर तकनीकी और आर्थिक समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र के पुनरुद्धार और बहुपक्षीय सहयोग को अनिवार्य बताया।

"भारत की तकनीकी ताकत केवल हमारे अपने विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के लिए भी एक मार्गदर्शक मॉडल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) तभी सार्थक हैं जब वे अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंचें और उनके जीवन को सुगम बनाएं।"
— डॉ. एस. जयशंकर (विदेश मंत्री, भारत)

इंसानी संवेदना के साथ तकनीक का तालमेल: रिलायंस फाउंडेशन

रिलायंस फाउंडेशन के एग्जीक्यूटिव लीड बी. श्रीनिवासन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल कुछ देशों या बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास की वास्तविक परिभाषा व्यापक सहयोग, संवेदनशीलता और साझा समृद्धि में निहित है।

भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीस्नर ने रेखांकित किया कि वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने के लिए समय बहुत कम बचा है, ऐसे में भारत के सफल, कम लागत और बड़े पैमाने पर परखे गए मॉडल्स को विकासशील दुनिया तक पहुंचाना गेम-चेंजर साबित होगा। वहीं, ओआरएफ अध्यक्ष समीर सरन ने कहा कि 'इंडिया डे' नवाचार, सुदृढ़ डेटा गवर्नेंस और संस्थागत विश्वास का संगम है।

'व्हेन सिलिकॉन मीट्स द सॉयल': भारत की जमीनी एआई क्रांति

समारोह के दौरान ‘When Silicon Meets the Soil: India’s AI Revolution’ (जब सिलिकॉन का मिलन मिट्टी से होता है) शीर्षक से एक विशेष रिपोर्ट जारी की गई। यह प्रकाशन भारत के जीवंत एआई परिदृश्य का दस्तावेजीकरण करता है:

  • 12 सफल केस स्टडीज: कृषि, टेली-मेडिसिन, प्राथमिक शिक्षा और आपदा पूर्वानुमान में एआई के जमीनी अनुप्रयोग।
  • 6 उभरते पायलट प्रोजेक्ट: बहुभाषी वॉयस बॉट्स और स्थानीय भाषाओं में जटिल सरकारी सेवाओं का सरलीकरण।
  • अंतिम छोर तक विस्तार: रिपोर्ट रेखांकित करती है कि कैसे भारत में एआई का उपयोग खेतों में कीट नियंत्रण, आशा बहुओं द्वारा स्वास्थ्य ट्रैकिंग और स्थानीय कारीगरों के सशक्तिकरण में हो रहा है।
वैश्विक निष्कर्ष: संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पांचवां ‘इंडिया डे’ यह सिद्ध करता है कि भारत केवल सॉफ्टवेयर का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्तरदायी, समावेशी और मानव-केंद्रित एआई क्रांति का वैश्विक प्रणेता बनकर उभर रहा है।

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