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Jio Transformation: 'अब सिर्फ टेलीकॉम ऑपरेटर नहीं रहा जियो'—आकाश अंबानी; स्वदेशी 5G स्टैक और 1009 वैश्विक पेटेंट से विश्व बाजार में देगा दस्तक

टेलीकॉम से आगे बढ़कर ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी बन रहा जियो: 5G, क्लाउड, AI और 6G पर बड़ा दांव; 6,817 पेटेंट के साथ दुनिया में तकनीक निर्यात करने की तैयारी

📍 स्थान: लखनऊ / मुंबई | 📅 दिनांक: 24 सितंबर 2026 | 🌐 श्रेणी: टेक ट्रांसफॉर्मेशन, रिलायंस जियो, AI एवं वैश्विक दूरसंचार

लखनऊ: भारत के दूरसंचार क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के बाद रिलायंस जियो (Reliance Jio) अब अपनी पहचान को केवल एक कनेक्टिविटी ऑपरेटर तक सीमित नहीं रखना चाहता। कंपनी अपने अगले रणनीतिक चरण में एक पूर्णकालिक ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में रूपांतरित हो रही है। स्वदेशी 5G स्टैक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड, 6G और बौद्धिक संपदा (IPR) पर केंद्रित रणनीति के तहत जियो भारत में परखी जा चुकी उन्नत तकनीकों को अब वैश्विक बाजारों में निर्यात और लाइसेंस करने की तैयारी में है।

📌 जियो के तकनीकी रूपांतरण के मुख्य बिंदु:

  • ग्लोबल टेक विजन: जियो अब विदेशी कंपनियों के सॉफ्टवेयर का उपभोक्ता नहीं, बल्कि खुद नेटवर्क सॉफ्टवेयर व डिजिटल प्लेटफॉर्म का उत्पादक बन गया है।
  • बौद्धिक संपदा की ताकत: 31 मार्च 2026 तक कुल 6,817 पेटेंट दाखिल किए गए, जिनमें से 1,009 को दुनियाभर में वैश्विक मंजूरी मिल चुकी है।
  • WIPO में 12वां स्थान: 2026 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की पीसीटी रैंकिंग में जियो दुनिया की शीर्ष 20 कंपनियों में 12वें पायदान पर पहुंचा।
  • विशाल यूजर बेस पर टेस्टिंग: 52.4 करोड़ से ज्यादा कुल ग्राहकों और 26.8 करोड़ 5G यूजर्स वाले विशाल नेटवर्क पर तकनीक को पहले ही आजमाया जा चुका है।
  • 11 हजार से ज्यादा इंजीनियर्स: जियो की टेक व इंजीनियरिंग टीम में 11,303 प्रोफेशनल्स शामिल हैं, जो कुल कर्मचारियों का लगभग 40% है।

📊 जियो प्लेटफॉर्म्स: टेक्नोलॉजी और पेटेंट पोर्टफोलियो (प्रमुख आंकड़े)

पैरामीटर / मानक आंकड़ा / स्थिति (FY 2025-26) उद्योग में महत्व
दाखिल किए गए कुल पेटेंट 6,817 पेटेंट 4G, 5G, 6G, AI और क्लाउड में मजबूत IP
वैश्विक स्वीकृत पेटेंट 1,009 पेटेंट को मंजूरी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मान्यता
WIPO ग्लोबल पीसीटी रैंकिंग विश्व में 12वां स्थान ग्लोबल टॉप-20 में शामिल भारतीय कंपनी
इंजीनियरिंग वर्कफोर्स 11,303 विशेषज्ञ (कुल बल का ~40%) स्वदेशी R&D और इनोवेशन की रीढ़
5G ग्राहक व वायरलेस ट्रैफिक 26.8 करोड़ 5G यूजर्स (55% ट्रैफिक) दुनिया का सबसे बड़ा लाइव 5G SA नेटवर्क

"भारत को तकनीक बनाने वाले देश के रूप में स्थापित करेंगे": आकाश अंबानी

जियो प्लेटफॉर्म्स के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कंपनी के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कहा कि जियो अब पारंपरिक टेलीकॉम परिभाषा से बाहर निकल चुका है।

"जियो अब केवल एक टेलीकॉम सेवा प्रदाता नहीं है। हम भारत के भीतर अगली पीढ़ी के कनेक्टिविटी समाधान, डिजिटल उत्पाद, एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म और एआई-संचालित तकनीकें विकसित कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य इन तकनीकों को पहले घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक सिद्ध करना और फिर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ले जाना है, जिससे भारत सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि तकनीक का वैश्विक निर्माता बनकर उभरे।"
— आकाश अंबानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, जियो प्लेटफॉर्म्स)

स्वदेशी 5G स्टैक और '5G-in-a-box' का वैश्विक पोटेंशियल

जियो ने अपना खुद का 5G Core और OSS/BSS सिस्टम विकसित किया है। इसके बाद कोर, रेडियो और ऑपरेशंस सॉफ्टवेयर को मिलाकर एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जियो नेटवर्क पर लगभग 241 एक्साबाइट (EB) का भारी डेटा ट्रैफिक रिकॉर्ड किया गया।

कंपनी ने ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के लिए अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो (UBR) तकनीक भी तैयार की है, जिसने बिना ऑप्टिकल फाइबर के घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाया (जिससे फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में जियो की हिस्सेदारी 43% पहुंची)। इसके अतिरिक्त, छोटे आकार का निजी 5G समाधान ‘5G-in-a-box’, 1 Tbps यूजर-प्लेन फंक्शन और मिलीमीटर-वेव आधारित छोटे सेल विकसित किए गए हैं, जो अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों के लिए बेहद मुफीद और किफायती हैं।

AI Everywhere और 6G के वैश्विक मानकों में भारत की हिस्सेदारी

रिलायंस के विजन ‘AI Everywhere, For Everyone’ के तहत जियो अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं, नेटवर्क ऑपरेशंस और ग्राहक इंटरफेस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को तेजी से इंटीग्रेट कर रहा है। इसके साथ ही:

  • एंटरप्राइज व क्लाउड: स्टैंडअलोन नेटवर्क स्लाइसिंग, एज कंप्यूटिंग और ऑटोनॉमस नेटवर्क मैनेजमेंट के जरिए कॉर्पोरेट्स को सेवाएं।
  • 6G स्टैंडर्डाइजेशन: भावी 6G तकनीक के वैश्विक नियम और आर्किटेक्चर तय करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी।
  • लाइसेंसिंग मॉडल: जिस तकनीक को 52 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं पर परखा जा चुका है, उसे वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों को सॉफ्टवेयर लाइसेंस के रूप में बेचने की तैयारी।
भविष्य का परिदृश्य: आगामी दशक में जियो का यह परिवर्तन भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा। आयातित तकनीक पर निर्भरता खत्म कर घरेलू पेटेंट और स्वदेशी सॉफ्टवेयर निर्यात करने से भारत विश्व मंच पर एक संप्रभु टेक महाशक्ति के रूप में स्थापित होगा।

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