📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...
Voice of Capital को Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएं
ताजा खबरों के लिए हमें Google पर Follow करें

Pages

आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज में POCSO जागरूकता अभियान: सिविल जज शैलेश कुमार सिंह ने छात्राओं को सिखाया 'NO-GO-TELL' का मंत्र

आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज में पॉक्सो जागरूकता अभियान का आयोजन: सिविल जज शैलेश कुमार सिंह ने छात्राओं को समझाया 'NO-GO-TELL' का सुरक्षा सिद्धांत

📍 स्थान: आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज, लखनऊ | 📅 दिनांक: 01 अक्टूबर 2026 | ⚖️ श्रेणी: विधिक साक्षरता, पॉक्सो कानून (POCSO Act), बालिका सुरक्षा एवं स्कूल शिक्षा

लखनऊ: राजधानी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज में छात्राओं को लैंगिक अपराधों से सुरक्षित रखने और उनके विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पॉक्सो अधिनियम 2012 (POCSO Act) पर एक विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सिविल जज शैलेश कुमार सिंह ने छात्राओं से सीधा संवाद करते हुए आत्मरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं और विधिक अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।

📌 जागरूकता कार्यशाला के मुख्य बिंदु:

  • सशक्त सुरक्षा कानून: सिविल जज शैलेश कुमार सिंह ने पॉक्सो एक्ट 2012 को बच्चों की सुरक्षा की मजबूत विधिक ढाल बताया।
  • सुरक्षा मंत्र (NO-GO-TELL): छात्राओं को असहज स्थिति में 'ना कहना' (NO), वहां से 'दूर जाना' (GO), और तुरंत 'बताना' (TELL) का सिद्धांत सिखाया गया।
  • पहचान की गोपनीयता: न्यायाधीश ने आश्वस्त किया कि किसी भी शिकायत के दौरान पीड़ित बालिका की पहचान कानूनी रूप से पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
  • इमरजेंसी नंबर 1098: संकट की स्थिति में चौबीसों घंटे सक्रिय चाइल्डलाइन 1098 और स्थानीय पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली समझाई।
  • चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी: प्रधानाचार्या डॉ. ममता किरन राव ने विद्यालय स्तर पर सक्रिय आंतरिक सुरक्षा समिति की व्यवस्था पर प्रकाश डाला।

📊 पॉक्सो विधिक जागरूकता सत्र: कार्यक्रम का विवरण

प्रमुख घटक विवरण व मुख्य बातें
आयोजन स्थल आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज, लखनऊ
मुख्य / विशिष्ट अतिथि सिविल जज शैलेश कुमार सिंह
सत्र की अध्यक्षता डॉ. ममता किरन राव (प्रधानाचार्या)
मुख्य विषय व सिद्धांत POCSO Act 2012, गुड टच-बैड टच, 'NO-GO-TELL' फॉर्मूला
आपातकालीन सुरक्षा माध्यम चाइल्डलाइन हेल्पलाइन नंबर: 1098

"कानून हर बच्ची के साथ, संकोच छोड़कर खुलकर बोलें": सिविल जज शैलेश कुमार सिंह

समारोह में छात्राओं को विधिक दृष्टिकोण से शिक्षित करते हुए सिविल जज श्री शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी बच्चे की सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखना न्यायपालिका और समाज का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने व्यावहारिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के जरिए छात्राओं को 'गुड टच और बैड टच' के बीच का अंतर बारीकी से समझाया।

"पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) बच्चों को लैंगिक शोषण और दुर्व्यवहार से बचाने वाला सबसे सशक्त कानूनी सुरक्षा कवच है। कभी भी किसी भी असहज स्थिति में चुप न बैठें। हमेशा याद रखें— NO-GO-TELL; यानी गलत व्यवहार का तुरंत विरोध करें (NO कहें), उस स्थान से तुरंत सुरक्षित दूरी बनाएं (GO), और अपने माता-पिता, शिक्षक या 1098 पर सूचित करें (TELL)। कानून पूरी दृढ़ता के साथ आपके साथ खड़ा है और आपकी पहचान हमेशा सुरक्षित रखी जाती है।"
— शैलेश कुमार सिंह (सिविल जज, लखनऊ)

"जागरूक और निडर बनाना ही सच्ची शिक्षा": प्रधानाचार्या डॉ. ममता किरन राव

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. ममता किरन राव ने कहा कि शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ छात्राओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सचेत करना ही वास्तविक शिक्षा का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेज परिसर में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए एक समर्पित चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी (Child Protection Committee) सक्रिय रूप से काम कर रही है।

उन्होंने माननीय सिविल जज महोदय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सारगर्भित उद्बोधन ने छात्राओं के मन से भय को दूर कर उनमें नया आत्मविश्वास भरा है। विद्यालय प्रबंधन यह सुनिश्चित करता रहेगा कि छात्राओं के लिए एक सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त परिवेश बना रहे।

शिक्षकों और अभिभावकों ने लिया बाल सुरक्षा का संकल्प

कार्यशाला के दौरान छात्राओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षकगण और अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने, उनके साथ मैत्रीपूर्ण संवाद बनाए रखने और समाज को बाल अपराधों से मुक्त करने का सामूहिक संकल्प लिया।

निष्कर्ष: आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज में आयोजित इस विधिक साक्षरता सत्र ने बालिकाओं को आत्मरक्षा, कानूनी सुरक्षा प्रावधानों और हेल्पलाइन नंबरों की सटीक समझ देकर उन्हें मानसिक व विधिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें