'प्रकृति के लिए बढ़ाएँ कदम': ब्रह्माकुमारीज़ लखनऊ ने निकाली 'वॉक फॉर मदर अर्थ' वॉकथॉन; 1090 चौराहे से जनेश्वर मिश्र पार्क तक 500 प्रतिभागियों ने दिया पर्यावरण चेतना का संदेश
लखनऊ: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के 90वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित नवदशकोत्सव के अंतर्गत रविवार को राजधानी में ‘वॉक फॉर मदर अर्थ — प्रकृति के लिए बढ़ाएँ कदम’ वॉकथॉन का गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। शहर के प्रसिद्ध 1090 चौराहे से प्रारंभ होकर एशिया के विशालतम जनेश्वर मिश्र पार्क तक पहुंची इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के संवर्धन तथा पाँचों मूल तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के प्रति सकारात्मक व कृतज्ञतापूर्ण संकल्प रखने के लिए प्रेरित करना था।
📌 'वॉक फॉर मदर अर्थ' वॉकथॉन: मुख्य बिंदु
- 90वां स्थापना वर्ष: ब्रह्माकुमारीज़ के नवदशकोत्सव के तहत पर्यावरण जागरूकता अभियान का आयोजन।
- 500 प्रतिभागियों की सहभागिता: लखनऊ के विभिन्न केंद्रों से आए लगभग 500 भाई-बहनों ने योगयुक्त एवं शांत भाव से की पदयात्रा।
- पदयात्रा मार्ग: 1090 चौराहे (गोमती नगर) से आरंभ होकर जनेश्वर मिश्र पार्क के मुख्य द्वार पर हुआ समापन।
- पंचतत्वों के प्रति कृतज्ञता: प्रकृति के पांचों तत्वों को सकारात्मक प्रकंपन (वाइब्रेशंस) देने और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने पर बल।
- वरिष्ठ बहनों का नेतृत्व: राजयोगिनी राधा दीदी, मंजू दीदी, सुमन दीदी और इंदिरा दीदी के सानिध्य में यात्रा संपन्न हुई।
📊 वॉकथॉन 2026: आयोजन रूपरेखा एवं संदेश
| आयोजन आयाम | विवरण एवं आध्यात्मिक संकल्प |
|---|---|
| अभियान का शीर्षक | ‘वॉक फॉर मदर अर्थ — प्रकृति के लिए बढ़ाएँ कदम’ |
| ऐतिहासिक संदर्भ | ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का 90वां स्थापना वर्ष (नवदशकोत्सव) |
| पदयात्रा मार्ग (Route) | 1090 चौराहा से जनेश्वर मिश्र पार्क, लखनऊ |
| सहभागिता संख्या | लगभग 500 राजयोगी साधक एवं पर्यावरण प्रेमी नागरिक |
| केंद्रीय दर्शन | मन के शुद्ध संकल्पों से पंचतत्वों का शुद्धिकरण एवं पर्यावरण संतुलन |
'विचारों का प्रभाव प्रकृति पर पड़ता है': राजयोगिनी राधा दीदी
सभा को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ गोमती नगर केंद्र की प्रभारी राजयोगिनी राधा दीदी ने बाह्य पर्यावरण और आंतरिक चेतना के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मानव मन दूषित और अशांत होता है, तो उसका सीधा नकारात्मक असर बाह्य प्रकृति पर भी पड़ता है।
“हमारे मन के विचारों और भावनाओं का गहरा प्रभाव हमारे व्यवहार, आपसी रिश्तों और प्रकृति पर पड़ता है। यदि हम अपने भीतर शांति, प्रेम, आनंद और परोपकार की भावना धारण कर सकारात्मक प्रकंपन (वाइब्रेशंस) फैलाएं, तो प्रकृति स्वतः संतुलित होगी। प्रकृति हमें जीवन पर्यंत निस्वार्थ भाव से देती है; अतः उसके पाँचों तत्वों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और शुभ संकल्प रखना हमारी आध्यात्मिक जिम्मेदारी है।”
— राजयोगिनी राधा दीदी (प्रभारी, ब्रह्माकुमारीज़ गोमती नगर, लखनऊ)
मधुर गीतों और तख्तियों के साथ गुंजायमान हुआ मार्ग
वॉकथॉन के दौरान संपूर्ण वातावरण अत्यंत शांत, अनुशासित और आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। प्रतिभागियों ने हाथों में पर्यावरण संरक्षण के संदेश लिखी तख्तियां थाम रखी थीं, जिन पर 'प्रकृति का सम्मान—सृष्टि का कल्याण', 'शुद्ध विचार—स्वच्छ पर्यावरण' जैसे प्रेरक नारे अंकित थे।
- शांतिपूर्ण योगयुक्त मार्च: बिना किसी कोलाहल के, ईश्वरीय स्मृति और मधुर गीतों की धुन पर प्रतिभागियों ने अनुशासन की मिसाल पेश की।
- जीवनशैली में बदलाव का आह्वान: वॉकथॉन के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक का उपयोग कम करने, जल बचाने और पौधारोपण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
- सामूहिक प्रसाद वितरण: जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचने पर पदयात्रा शांति प्रार्थना के साथ संपन्न हुई और सभी प्रतिभागियों को सात्विक प्रसाद वितरित किया गया।
वरिष्ठ राजयोगिनी शिक्षकों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस विशाल पदयात्रा का मार्गदर्शन लखनऊ की वरिष्ठ राजयोगिनी शिक्षकों ने किया। यात्रा में राधा दीदी के साथ वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका मंजू दीदी, सुमन दीदी एवं इंदिरा दीदी प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। सभी ने लखनऊवासियों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण की रक्षा को केवल औपचारिक दिवसों तक सीमित न रखकर अपने दैनिक आचरण में शामिल करें।


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