यूपी के 5 जिलों में लगेंगे आकाशीय बिजली चेतावनी सेंसर: IITM पुणे के सहयोग से योगी सरकार की तकनीक आधारित पहल; सोनभद्र के 32 गांवों में बनेगा विशेष सिस्टम
लखनऊ: प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने और समय पूर्व अलर्ट जारी करने के संकल्प के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने अत्याधुनिक तकनीकी नेटवर्क बिछाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के तकनीकी सहयोग से प्रदेश के 5 संवेदनशील जिलों में आकाशीय बिजली चेतावनी सेंसर (Lightning Detection Sensors) स्थापित किए जा रहे हैं। ये सेंसर आकाशीय विद्युत की वायुमंडलीय गतिविधियों का त्वरित विश्लेषण कर बिजली गिरने से पहले सटीक पूर्व चेतावनी जारी करेंगे।
📌 आकाशीय बिजली चेतावनी परियोजना: मुख्य बिंदु
- 5 चिन्हित जनपद: एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र में स्थापित किए जा रहे हैं अत्याधुनिक लाइटनिंग सेंसर।
- IITM पुणे से तकनीकी करार: भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे के डाटा और एल्गोरिदम से संचालित होगा सेंसर ग्रिड।
- सोनभद्र के लिए ₹1.33 करोड़ की विशेष योजना: दुद्धी ब्लॉक के 32 अति-संवेदनशील गांवों में स्वतंत्र ‘लाइटनिंग डिटेक्शन एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम’ की स्थापना।
- अन्नदाताओं को सुरक्षा कवच: खुले खेतों में कार्य कर रहे किसानों, श्रमिकों और पशुपालकों को बिजली गिरने से पहले सुरक्षित आश्रय लेने का मिलेगा पर्याप्त समय।
- सक्रिय बचाव रणनीति: आपदा के पश्चात राहत देने के बजाय घटना से पूर्व बचाव (Proactive Prevention) की शासकीय नीति पर अमल।
📊 उत्तर प्रदेश लाइटनिंग सेंसर परियोजना: रूपरेखा व जिलेवार कवरेज
| परियोजना आयाम | आधिकारिक स्थिति एवं तकनीकी विवरण |
|---|---|
| प्राथमिक चयनित जनपद (5 जिले) | एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र |
| तकनीकी भागीदार संस्थान | भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे |
| सोनभद्र विशेष अर्ली वार्निंग बजट | ₹1.33 करोड़ (दुद्धी ब्लॉक के 32 ग्रामीण क्लस्टरों हेतु) |
| कार्यप्रणाली एवं उद्देश्य | इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज की ट्रैकिंग और रियल-टाइम सायरन/एसएमएस अलर्ट |
| प्रमुख लाभार्थी वर्ग | किसान, मनरेगा मजदूर, पशुपालक एवं ग्रामीण तराई आबादी |
'राहत से पहले बचाव': राहत आयुक्त कार्यालय का तकनीकी मॉडल
राहत आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के तराई और विंध्य-बुंदेलखंड अंचल में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात) से भारी जान-माल का नुकसान दर्ज किया जाता रहा है। पारंपरिक रूप से प्रशासन घटना के बाद अनुग्रह राशि बांटने तक सीमित रहता था, लेकिन अब रणनीति पूरी तरह बदल चुकी है।
“आपदा प्रबंधन की आधुनिक रणनीति का मूल मंत्र है कि नुकसान होने से पहले ही खतरे की पहचान कर ली जाए। आईआईटीएम पुणे के सहयोग से लगाए जा रहे ये सेंसर वायुमंडल में बादलों के घर्षण और विद्युत आवेश (Electric Charge) को 30 से 45 मिनट पूर्व ही भांप लेंगे। इससे जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और ग्राम प्रधानों के जरिए स्थानीय आबादी को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए सायरन व मैसेज अलर्ट भेजा जा सकेगा।”
— राहत आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन
सोनभद्र के दुद्धी ब्लॉक में ₹1.33 करोड़ से बनेगा विशेष सुरक्षा चक्र
भौगोलिक दृष्टि से पठारी और वनाच्छादित क्षेत्र होने के कारण सोनभद्र जिला आकाशीय बिजली के लिहाज से अति-संवेदनशील (High-Risk Zone) माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष कदम उठाया है:
- 32 गांवों का चयन: जिले के दुद्धी ब्लॉक के 32 सर्वाधिक प्रभावित गांवों में ₹1.33 करोड़ की लागत से 'लाईटनिंग डिटेक्शन एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम' स्थापित किया जा रहा है।
- ऑडियो-विजुअल सायरन सिस्टम: सेंसर से संकेत मिलते ही ग्रामीण क्षेत्रों में लगे लाउडस्पीकर/सायरन स्वतः बज उठेंगे ताकि मोबाइल नेटवर्क से दूर खेतों में काम कर रहे किसान भी तुरंत सतर्क हो सकें।
- सामुदायिक शरण स्थल: गांवों में स्थित पक्के पंचायत भवनों और प्राथमिक विद्यालयों को आपातकालीन लाइटनिंग शेल्टर के रूप में चिन्हित किया गया है।
किसानों और श्रमिकों को मिलेगा सीधा जीवनदान
कृषि कार्यों के दौरान खेत में काम कर रहे किसान और पशु चराने वाले चरवाहे अक्सर वर्षा से बचने के लिए ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े हो जाते हैं, जो वज्रपात का प्राथमिक निशाना बनते हैं। सेंसर नेटवर्क और जागरूकता अभियानों के माध्यम से ग्रामीणों को 'दामिनी ऐप' और स्थानीय सायरन के जरिए पेड़ के नीचे न रुकने तथा खुले स्थानों से दूर रहने की समय पर सलाह मिल सकेगी।
इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (Quick Response Teams) को भी सटीक जीपीएस लोकेशन के साथ अलर्ट मिलेगा, जिससे किसी भी आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में चिकित्सा दल तत्काल मौके पर रवाना हो सकेगा।


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