भारतीय भाषाओं के लिए एकसमान तकनीकी शब्दावली तैयार करने की आवश्यकता: वर्धा विवि में बोले चमू कृष्ण शास्त्री; कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की अध्यक्षता
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा के भाषाविज्ञान विभाग एवं हिंदी साहित्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 'भारतीय भाषाओं के लिए करणीय कार्य' विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के ग़ालिब सभागार में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय भाषा समिति (भारत सरकार) के अध्यक्ष चमू कृष्ण शास्त्री ने अपने विचार रखे। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और डिजिटल युग में सभी भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए एकसमान तकनीकी शब्दावली (Uniform Technical Terminology) विकसित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की।
📌 व्याख्यान के मुख्य विचार एवं सूत्र:
- एकसमान तकनीकी शब्दावली: विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उच्च शिक्षा में परस्पर समन्वय के लिए भारतीय भाषाओं की सांझी तकनीकी पारिभाषिक शब्दावली तैयार हो।
- NEP-2020 का प्रभाव: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय भाषाओं को मुख्यधारा की शिक्षा में प्रतिष्ठित कर नई ऊर्जा प्रदान की है।
- अनुवाद नहीं, अनुकृति की परंपरा: भारत में भाषाओं के बीच कभी टकराव नहीं रहा; प्राचीन ग्रंथों का भाषाई रूपांतरण कथावस्तु की अनुकृति और आत्मीयता से हुआ।
- भाषा संवर्धन के छह स्तंभ: निरंतर बोलने वाले लोग, माध्यम भाषा के रूप में प्रयोग, सतत शब्द निर्माण, तकनीक का अंगीकरण, शिक्षण सामग्री और राजाश्रय (शासकीय संरक्षण)।
- विश्वविद्यालय की शोध प्रतिबद्धता: कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने भारतीय भाषा परिवार के अंतर्गत पठन-पाठन और अंतःविषयक शोध को गति देने की घोषणा की।
📊 व्याख्यान एवं आयोजन रूपरेखा: एक नजर में
| घटक / पहलू | आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| आयोजक संस्था | महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा |
| संबंधित विभाग | भाषाविज्ञान विभाग एवं हिंदी साहित्य विभाग |
| व्याख्यान का विषय | 'भारतीय भाषाओं के लिए करणीय कार्य' |
| मुख्य वक्ता | चमू कृष्ण शास्त्री (अध्यक्ष, भारतीय भाषा समिति, भारत सरकार) |
| कार्यक्रम की अध्यक्षता | प्रो. कुमुद शर्मा (कुलपति, MGAHV वर्धा) |
| आयोजन स्थल | ग़ालिब सभागार, विश्वविद्यालय परिसर |
भाषा विकास के व्यावहारिक आयाम: शब्द निर्माण और तकनीक का समन्वय
अपने संबोधन में भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत का ऐतिहासिक भाषाई ताना-बाना कभी विवाद का कारण नहीं रहा, बल्कि सभी भारतीय भाषाओं के बीच आंतरिक आत्मीयता और सह-अस्तित्व की सुदृढ़ परंपरा रही है। प्राचीन काल में जब भी किसी महाकाव्य या ग्रंथ का अन्य भारतीय भाषाओं में विस्तार हुआ, तो वह शाब्दिक अनुवाद के बजाय मूल कथावस्तु के अनुरूप 'अनुकृति' के रूप में लोकभाषाओं में रचा गया।
“भाषा के निरंतर विकास के लिए आवश्यक है कि उसे बोलने वाले लोग सक्रिय रहें, वह शिक्षा व दैनिक संवाद में माध्यम भाषा बने, उसमें नए शब्दों के निर्माण की निरंतर गति बनी रहे और वह आधुनिक सूचना तकनीक को अपनाए। साथ ही स्तरीय पठन सामग्री का निर्माण और राज्य का संरक्षण मिलने से भारतीय भाषाओं का संरक्षण स्वतः सुनिश्चित होगा।”
— चमू कृष्ण शास्त्री (अध्यक्ष, भारतीय भाषा समिति)
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन ने भारतीय भाषाओं को अकादमिक और तकनीकी पटल पर पुनः स्थापित करने का ऐतिहासिक अवसर दिया है।
'भारतीय भाषाओं के हृदय की धड़कन एक है': प्रो. कुमुद शर्मा
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि भारत की विभिन्न भाषाएं परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सांस्कृतिक देह के अंग हैं। सभी भारतीय भाषाओं के लिए अनुकूल और स्वस्थ वातावरण तैयार करना समाज और शैक्षणिक संस्थानों का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
उन्होंने भारतीय भाषा परिवार द्वारा संचालित पहलों की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंधों, शिक्षण सामग्री निर्माण और तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
विभागों की सहभागिता एवं औपचारिक सत्र
कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत भाषण भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन भाषाविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आम्रपाल शेंदरे ने किया, जबकि सत्र के अंत में भाषाविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एच.ए. हुनगुंद ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं परास्नातक विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


0 टिप्पणियाँ