📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...
Voice of Capital को Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएं
ताजा खबरों के लिए हमें Google पर Follow करें

Pages

प्रख्यात रंगकर्मी डॉ. सतीश पावड़े को डी.लिट. की पूर्णकालिक शोध उपाधि: इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ ने की घोषणा; 'नाट्यशास्त्र' पर किया शोध

प्रख्यात रंगकर्मी एवं समीक्षक डॉ. सतीश पावड़े को डी.लिट. (विद्यावाचस्पति) उपाधि: इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ ने की घोषणा; 'नाट्यशास्त्र' पर चार वर्ष किया शोध

📍 स्थान: वर्धा (महाराष्ट्र) / खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) | 📅 दिनांक: 07 अक्टूबर 2026 | 🎓 श्रेणी: उच्च शिक्षा, कला एवं संस्कृति, नाट्यशास्त्र शोध, अकादमिक सम्मान

वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रदर्शनकारी कला विभाग के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर, प्रसिद्ध नाटककार, निर्देशक एवं नाट्य समीक्षक डॉ. सतीश पावड़े को साहित्य विद्या की सर्वोच्च शोध उपाधि डी.लिट. (विद्यावाचस्पति) प्रदान करने की आधिकारिक घोषणा की गई है। छत्तीसगढ़ स्थित देश के प्रतिष्ठित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कला संकाय द्वारा यह घोषणा की गई। डॉ. पावड़े ने विगत चार वर्षों के कठिन परिश्रम के उपरांत “नाट्यशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन एवं विश्लेषण” विषय पर अपना शोधकार्य पूर्ण किया है।

📌 डॉ. सतीश पावड़े की उपलब्धि के मुख्य बिंदु:

  • सर्वोच्च शोध उपाधि: इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छ.ग.) के कला संकाय द्वारा डी.लिट. उपाधि की संस्तुति।
  • शोध का केंद्रीय विषय: भारतीय नाट्यपरंपरा, भरतमुनि के नाट्यशास्त्र तथा उसके समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण।
  • 28 पुस्तकों के लेखक: नाट्यलेखन, समीक्षा, संपादन, चरित्र-लेखन और अनुवाद पर 28 से अधिक प्रमाणिक पुस्तकें प्रकाशित।
  • महाराष्ट्र की पहली शोध उपाधि का रिकॉर्ड: वर्ष 1996 में नागपुर विश्वविद्यालय से ललित कला संकाय (नाट्यकला) में महाराष्ट्र की पहली पीएचडी उपाधि प्राप्त करने का ऐतिहासिक गौरव।
  • आगामी समीक्षा ग्रंथ: अगले माह अनामिका प्रकाशन (प्रयागराज) द्वारा उनकी बहुप्रतीक्षित पुस्तक "नाट्यशास्त्र: परंपरा, प्रयोग आणि विमर्श" का प्रकाशन प्रस्तावित।

📊 डी.लिट. शोध एवं अकादमिक प्रोफाइल: एक नजर में

विवरण घटक तथ्य व जानकारी
शोधकर्ता / व्यक्तित्व डॉ. सतीश पावड़े (वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर, MGAHV वर्धा)
उपाधि प्रदानकर्ता संस्थान इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़)
डी.लिट. शोध विषय “नाट्यशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन एवं विश्लेषण”
पूर्व शोध रिकॉर्ड महाराष्ट्र में नाट्यकला विषय की प्रथम शोध उपाधि (1996, नागपुर विवि)
प्रकाशित कृतियां नाट्य विधा, आलोचना व अनुवाद की 28 पुस्तकें प्रकाशित

नाट्यशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन: चार वर्षों की गंभीर शोध साधना

भारतीय रंगमंच के आधार स्तंभ भरतमुनि प्रणीत ‘नाट्यशास्त्र’ को सामान्यतः केवल प्रदर्शन और रस-सिद्धांत की दृष्टि से देखा जाता रहा है। डॉ. पावड़े ने अपने चार वर्षीय शोध कार्य में नाट्यशास्त्र के गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक, जातिगत और लोक-पारस्परिक संदर्भों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया है। उनका यह शोध प्राचीन भारतीय रंग-परंपरा के उन आयामों को उद्घाटित करता है, जो आधुनिक समाज के लिए भी प्रासंगिक हैं।

"नाट्यशास्त्र केवल एक रंगमंचीय मैन्युअल नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय समाज का जीवंत दर्पण है। उसका समाजशास्त्रीय विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि कला और समाज का संबंध कितना अटूट और लोक-उन्मुख रहा है।"

राष्ट्रीय फेलोशिप और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक योगदान

डॉ. सतीश पावड़े को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित रवीन्द्रनाथ टैगोर रिसर्च फेलोशिप तथा संगीत नाटक अकादमी की विशेष शोध परियोजना स्कॉलरशिप प्राप्त हो चुकी है। भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों के अलावा उन्होंने कनाडा और श्रीलंका में भी भारतीय नाट्यशास्त्र और रंगमंच पर विशेष व्याख्यान दिए हैं।

वर्तमान में डॉ. पावड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रहे हैं:

  • श्रीलंका की प्लेटो अकादेमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के वरिष्ठ अकादमिक सलाहकार।
  • टाइम्स इंटरनेशनल अकादमी फॉर ग्रेजुएट स्टडीज में वरिष्ठ अकादमिक सलाहकार।
  • संगीतसूर्य केशवराव भोसले सांस्कृतिक परिषद (भारत गणराज्य) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष।
  • पूर्व में महाराष्ट्र राज्य नाटक सेंसर बोर्ड के तीन बार सदस्य एवं मराठी विश्वकोश नाट्यज्ञानमंडल के दो बार सलाहकार रहे हैं।

महाराष्ट्र में पहली पीएचडी से लेकर डी.लिट. तक का सफर

डॉ. पावड़े के अकादमिक जीवन की यह उपलब्धि एक दुर्लभ निरंतरता को दर्शाती है। वर्ष 1996 में उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय से प्रदर्शनकारी कला (नाट्यकला) में महाराष्ट्र की पहली पीएचडी उपाधि प्राप्त कर इतिहास रचा था। अब खैरागढ़ विश्वविद्यालय से डी.लिट. की यह सर्वोच्च उपाधि उनके तीन दशकों के अनवरत नाट्य-अध्ययन, निर्देशन, लेखन और चिंतन पर आधिकारिक मुहर है।

अकादमिक जगत में हर्ष: उनकी इस विशिष्ट उपलब्धि पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय परिवार, रंगकर्मियों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें