फैजुल्लागंज में छठे दिन भी जलभराव से हाहाकार: घरों में फंसे 500 से अधिक परिवारों का पलायन शुरू; डीएम बोले- अगले 24 घंटे अहम, 182 करोड़ से बनेगा नया सुरक्षा बंधा
लखनऊ: गोमती नदी के अप्रत्याशित रूप से बढ़े जलस्तर के कारण राजधानी के फैजुल्लागंज और आसपास के तटीय निचले इलाकों में शनिवार को लगातार छठे दिन भी भीषण जलभराव बना रहा। गुरुवार को पानी कम होने से जगी राहत की उम्मीदें शनिवार को नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से टूट गईं। शारदा नगर, कैलाश विहार, मिल्लत नगर और दाऊदनगर की गलियों में कमर तक पानी भर जाने से हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। अंदरूनी बस्तियों में फंसे 500 से अधिक परिवारों के सामने पेयजल और भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते कई नागरिकों ने अपने घरों को छोड़कर रिश्तेदारों व सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
📌 फैजुल्लागंज बाढ़ संकट के प्रमुख बिंदु:
- 500+ परिवार प्रभावित: शारदा नगर, कैलाश विहार, मिल्लत नगर, राम विहार, मामा कॉलोनी, दाऊदनगर और लौहरामऊ जलमग्न।
- नाव ही एकमात्र सहारा: मुख्य मार्ग से लेकर घरों के दरवाजों तक नावें चल रहीं; बिजली कटने से पानी की मोटरें बंद, पेयजल का भीषण संकट।
- डीएम की चेतावनी: जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर ने कहा—"अगले 24 घंटे अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं, स्थिति सामान्य होने में 1 सप्ताह लगेगा।"
- ड्रोन से एंटी-लार्वा छिड़काव: नगर निगम द्वारा भारी पंपसेटों से पानी निकासी, ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव और मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था।
- स्थायी समाधान की पहल: आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज तक ₹182.13 करोड़ की लागत से नया बंधा बनेगा; ग्रीन कॉरिडोर का ₹300 करोड़ वाला तटबंध बना कई इलाकों की ढाल।
📊 फैजुल्लागंज राहत एवं बचाव अभियान: एक नजर में
| प्रमुख क्षेत्र / विषय | मौजूदा स्थिति व प्रशासनिक प्रबंध |
|---|---|
| सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र | शारदा नगर, कैलाश विहार, दाऊदनगर, मामा कॉलोनी, मिल्लत नगर |
| अस्थायी आश्रय स्थल (Shelters) | इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा, पलटन छावनी, उमराव हाता, दाऊदनगर ट्रांजिट हॉस्टल |
| आपातकालीन राहत आपूर्ति | राशन किट (आटा, दाल, चावल, तेल-मसाले), मोमबत्ती, माचिस, सैनिटरी पैड व पानी टैंकर |
| स्वास्थ्य व स्वच्छता प्रबंध | ड्रोन से एंटी-लार्वा स्प्रे, नावों से सघन फॉगिंग, मेडिकल कैंप्स व हैवी पंपसेट |
| दीर्घकालिक सुरक्षा परियोजनाएं | ₹182.13 करोड़ का प्रस्तावित फैजुल्लागंज बंधा + ₹300 करोड़ का ग्रीन कॉरिडोर बंधा |
घरों में सीलन और बीमारियों का खौफ: नाव बनी आवागमन का साधन
फैजुल्लागंज की गलियों में कई दिनों से पानी जमा होने के कारण मकानों की नींव और दीवारों में सीलन आ चुकी है। जलभराव के चलते शॉर्ट सर्किट के खतरे को टालने के लिए विद्युत आपूर्ति काट दी गई है, जिससे बिजली न होने से सबमर्सिबल और वॉटर मोटर पूरी तरह ठप हैं। हैंडपंपों में गंदा पानी आने से लोग बूंद-बूंद पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
"घर के चारों तरफ पानी भरा है। बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है। बच्चों की तबीयत बिगड़ने का डर सता रहा है। खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है, इसलिए अब ताला लगाकर रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं।"
— ममता मिश्रा व कौशल्या देवी (स्थानीय निवासी, फैजुल्लागंज)
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की राहत सामग्री मुख्य रास्तों पर तो बंट रही है, लेकिन गलियों के आखिरी छोर पर स्थित मकानों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। शुक्रवार को बिंदु बोरा द्वारा बांटी गई खाद्य सामग्री और पानी की बोतलों से कुछ हद तक राहत मिली, लेकिन लगातार सहायता की दरकार बनी हुई है।
नगर आयुक्त ने संभाला मोर्चा: पंपसेट और ड्रोन तकनीक से राहत कार्य
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने शनिवार को दाऊदनगर और जलमग्न कॉलोनियों का स्थलीय निरीक्षण किया। नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने मुख्य ओवरब्रिज और निचले इलाकों में हाई-कैपेसिटी डीजल पंपसेट लगाकर पानी को नदी के बहाव की ओर खींचने का काम शुरू किया है।
मच्छरजनित बीमारियों जैसे डेंगू और मलेरिया के फैलाव को रोकने के लिए संकरी गलियों में ड्रोन के जरिए एंटी-लार्वा रसायनों का छिड़काव कराया जा रहा है। साथ ही नावों पर फॉगिंग मशीनें रखकर गली-गली धुआं कराया जा रहा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आटा, दाल, चावल, बिस्किट, माचिस, मोमबत्ती, नमक, तेल-मसाले, आलू-प्याज, कपड़े और सैनिटरी पैड युक्त राहत किट नावों के जरिए घर-घर वितरित की जा रही हैं।
"अगले 24 घंटे नाजुक, स्थिति सामान्य होने में लगेगा 1 सप्ताह": डीएम विशाख जी.
जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर ने हालात की गंभीरता पर बात करते हुए बताया कि गोमती के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी आने के कारण अगले 24 घंटे बेहद नाजुक हैं। इसके पश्चात ही जलस्तर में स्थिरता या गिरावट आने की संभावना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी का जलस्तर कम होने के बाद भी गलियों और घरों से पानी पूरी तरह निकलने और सामान्य जीवन बहाल होने में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। प्रशासन ने सभी राहत शिविरों को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रखा है।
दीर्घकालिक समाधान: ₹182 करोड़ का नया बंधा और ग्रीन कॉरिडोर का सुरक्षा कवच
गोमती के उफान के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा बनाया जा रहा ग्रीन कॉरिडोर बंधा कई कॉलोनियों के लिए जीवनदान साबित हुआ है। पिपराघाट से शहीद पथ और किसान पथ तक करीब 11 किलोमीटर लंबाई में बन रहे इस ₹300 करोड़ के तटबंध ने गोमती नगर विस्तार, सीजी सिटी, मलेशेमऊ और सरसवां को जलमग्न होने से बचा लिया है। शनिवार को डीएम और एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने रिवरफ्रंट और ग्रीन कॉरिडोर तटबंध का निरीक्षण कर जलस्तर का जायजा लिया।
फैजुल्लागंज के लिए नया प्रोजेक्ट: फैजुल्लागंज, दाऊदनगर और मामा कॉलोनी को प्रतिवर्ष आने वाली इस त्रासदी से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए एलडीए ने वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में ₹182.13 करोड़ का विशेष प्रस्ताव शामिल किया है। इसके तहत आईआईएम रोड से खदरा होते हुए हार्डिंग ब्रिज तक एक अभेद्य सुरक्षा तटबंध (बंधा) का निर्माण कराया जाएगा, जिससे भविष्य में गोमती का बढ़ा पानी बस्तियों में प्रवेश नहीं कर सकेगा।


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