जनभवन में क्षमावाणी पर्व एवं त्यागी-व्रती सम्मान समारोह: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं— 'क्षमा भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि; वास्तविक विजय स्वयं पर विजय है'
लखनऊ: जैन धर्म के पावन दशलक्षण महापर्व के समापन के उपलक्ष्य में जनभवन (राजभवन) स्थित गांधी सभागार में ‘क्षमावाणी पर्व एवं त्यागी-व्रती सम्मान - मिच्छामि दुक्कडम’ समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बतौर मुख्य अतिथि सहभागिता करते हुए कठिन तप, उपवास और साधना करने वाले त्यागी-व्रतीजनों को सम्मानित किया। राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि क्षमा भारतीय संस्कृति का वह अमूल्य आभूषण है जो अंतःकरण के मैल को दूर कर टूटे मानवीय संबंधों को पुनः जोड़ता है।
📌 क्षमावाणी समारोह के मुख्य आकर्षण:
- पावन सान्निध्य: परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज के आध्यात्मिक सान्निध्य में अनुष्ठान संपन्न।
- त्यागी-व्रतियों का वंदन: दशलक्षण पर्व के दौरान कठोर संयम, मौन व उपवास साधना करने वाले श्रावकों का सम्मान।
- राज्यपाल का संदेश: वास्तविक विजय दूसरों पर अधिकार जमाना नहीं, बल्कि अपने क्रोध, मान, माया और लोभ को जीतना है।
- विशिष्ट अतिथि: प्रदेश की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य एवं अयोध्या जैन तीर्थ के पीठाधीश स्वस्ति श्री रविन्द्र कीर्ति स्वामी जी की उपस्थिति।
- जनभवन के नवाचार: 422 वंचित बच्चों के आदर्श विद्यालय, गौ-सेवा और 20 हजार फलदार व औषधीय पौधरोपण की राज्यपाल ने दी जानकारी।
📊 क्षमावाणी पर्व समारोह: प्रमुख अतिथि एवं आध्यात्मिक उपस्थिति
| प्रमुख व्यक्तित्व | पद / दायित्व | समारोह में भूमिका व संदेश |
|---|---|---|
| श्रीमती आनंदीबेन पटेल | राज्यपाल, उत्तर प्रदेश | मुख्य अतिथि; त्यागी-व्रतियों का सम्मान एवं 'मिच्छामि दुक्कडम' का दर्शन प्रस्तुत किया। |
| आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज | जैन संत एवं दिगंबर जैनाचार्य | पावन सान्निध्य; विश्व के सभी जीवों के प्रति मैत्री और अहिंसा का उद्बोधन। |
| श्रीमती बेबी रानी मौर्य | कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश शासन | विशिष्ट अतिथि; जैन दर्शन को मानवता के कल्याण और त्याग का प्रतीक बताया। |
| स्वस्ति श्री रविन्द्र कीर्ति स्वामी जी | पीठाधीश, अयोध्या जैन तीर्थ | विशिष्ट अतिथि; तीर्थ परंपरा और क्षमा की सार्वभौमिक महत्ता पर विचार रखे। |
"सुविधाओं का नहीं, साधना का मार्ग चुनते हैं त्यागी-व्रती": राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभागार में उपस्थित साधकों और नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म का आधार 'अहिंसा परमो धर्म:' है। त्यागी-व्रतीजन समाज में आत्मसंयम, त्याग और निष्काम सेवा के साक्षात आदर्श हैं।
"जैन दर्शन ने पूरी दुनिया को सिखाया है कि असली विजय किसी दूसरे पर आधिपत्य स्थापित करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार पर विजय पाना है। 'मिच्छामि दुक्कडम' केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए हृदय से क्षमा याचना करने और अंतर्मन में बंधी वैर-विरोध की गांठों को हमेशा के लिए खोल देने का महान आध्यात्मिक संकल्प है।"
— आनंदीबेन पटेल (राज्यपाल, उत्तर प्रदेश)
उन्होंने जनभवन में संचालित सेवा प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि परिसर में 422 वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त आदर्श माध्यमिक विद्यालय चल रहा है। इसके साथ ही सतत गौ-सेवा, नियमित निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और पर्यावरण संवर्धन हेतु 20 हजार पौधों का रोपण किया गया है।
मैत्री भाव से ही समाप्त होते हैं हिंसा और विकार: आचार्य सुबल सागर महाराज
समारोह में अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति के मन में संसार के सभी छोटे-बड़े प्राणियों के प्रति मैत्री का भाव जाग्रत होता है, तभी समाज से हिंसा, दुर्भावना और अशांति समाप्त होती है। सच्चा सुख भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और क्षमाशीलता में समाहित है।
कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने विचार रखते हुए कहा कि जैन धर्म द्वारा प्रतिपादित सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के सिद्धांत वर्तमान वैश्विक तनाव और संघर्ष के युग में शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
जीतो (JITO) व समाज के गणमान्य नागरिकों की रही व्यापक सहभागिता
समारोह में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) लखनऊ चैप्टर एवं सकल दिगंबर व श्वेतांबर जैन समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने भाग लिया। इनमें जीतो के अध्यक्ष पवन कुमार जैन, महासचिव अभिषेक जैन, स्वागताध्यक्ष प्रदीप जैन, उपाध्यक्ष संजीव जैन, पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया और चैतन्य कौशिक सहित समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि, मातृशक्ति और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


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