“राम राज्य की स्थापना मात्र कल्पना नहीं, अपितु एक सार्थक प्रयास है”: लेटे हुए हनुमान मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य समापन; राज्याभिषेक पर झूमे श्रद्धालु
लखनऊ: चौक के पंचवटी घाट स्थित प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा का गुरुवार को भव्य एवं भक्तिमय माहौल में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस व्यासपीठ पर विराजमान परम पूज्य स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने विभीषण शरणागति, रावण वध और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। महाराज श्री ने कहा कि राम राज्य कोई काल्पनिक विचार नहीं, बल्कि एक सार्थक जीवन दर्शन है, जिसे केवल और केवल सनातन धर्म के शाश्वत मूल्य ही पोषित कर सकते हैं।
📌 कथा समापन सत्र के प्रमुख आध्यात्मिक बिंदु:
- शरणागति का संदेश: जब मनुष्य अहंकार त्यागकर सत्य और धर्म का मार्ग चुनता है, तो प्रभु श्रीराम उसे तत्काल अंगीकार कर लेते हैं।
- भीतर के रावण का संहार: रावण केवल त्रेतायुग की लंका में नहीं था; काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के रूप में वह आज भी मनुष्य के मानस में बैठा है, जिसका वध आवश्यक है।
- राम राज्याभिषेक का उल्लास: भगवान श्रीराम के सिंहासनारूढ़ होते ही कथा पंडाल ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
- गणमान्य उपस्थिति: समापन सत्र में यूपी सरकार के राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति, पूज्य संतगण और सामाजिक-राजनीतिक हस्तियां सम्मिलित हुईं।
📊 सप्त दिवसीय श्रीराम कथा: एक नजर में
| घटक / पहलू | विवरण |
|---|---|
| आयोजन स्थल | प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर, पंचवटी घाट, चौक, लखनऊ |
| कथा व्यास | परम पूज्य स्वामी विष्णु दास जी महाराज |
| अंतिम दिवस के प्रसंग | विभीषण शरणागति, रावण वध एवं श्रीराम राज्याभिषेक |
| कथा संयोजक | डॉ. पंकज सिंह भदौरिया |
| प्रमुख अतिथि | राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति, संघ विभाग प्रचारक अनिल जी भाईसाहब आदि |
"सत्य, न्याय और मर्यादा पर आधारित जीवन व्यवस्था है राम राज्य"
कथा व्यास स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने शरणागति की महत्ता समझाते हुए कहा कि भगवान के दरबार में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता। जो भी निष्कपट भाव से प्रभु के चरणों में आता है, वह भवसागर से पार उतर जाता है।
“राम राज्य केवल एक राजनीतिक या सत्ता व्यवस्था का नाम नहीं है। यह सत्य, न्याय, करुणा, मर्यादा, सेवा और लोककल्याण पर आधारित समग्र जीवन पद्धति है। जब तक समाज में नैतिक मूल्यों और परस्पर स्नेह का संचार नहीं होगा, तब तक आदर्श समाज की रचना अधूरी रहेगी। वास्तविक रामकथा का श्रवण तभी सार्थक है, जब हम अपने अंतर्मन में बैठे दुर्गुणों का संहार करें।”
— स्वामी विष्णु दास जी महाराज
कथा के दौरान भगवान श्रीराम के दस आदर्श लक्षणों की व्याख्या की गई। जैसे ही प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग आया, समूचा पंडाल पुष्पवर्षा और जयकारों से आनंदित हो उठा।
यजमानों और व्यवस्थापकों का सम्मान
कथा संयोजक डॉ. पंकज सिंह भदौरिया ने सात दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने के लिए सभी श्रद्धालुओं, यजमानों, ट्रस्टियों और सेवादारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद और भक्तों की सेवा भावना से ही यह भव्य आयोजन निर्विघ्न संपन्न हो सका। समापन के अवसर पर व्यवस्थापकों और यजमानों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
संतों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
सप्त दिवसीय कथा के पूर्णाहुति सत्र में धर्म, समाज और राजनीति की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया:
- विशिष्ट अतिथि: उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री श्री धर्मवीर प्रजापति।
- पूज्य संतजन: स्वामी श्री श्री 1008 दीपेकेश्वरानंद जी महाराज एवं स्वामी इंद्रेश कौशिक जी महाराज।
- संगठन एवं जननेता: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लखनऊ विभाग प्रचारक श्री अनिल जी भाईसाहब, भाजपा नेता प्रदीप सिंह (बब्बू) एवं रजनीश गुप्ता।
- मंदिर प्रबंधन एवं व्यवस्थापक: संजीव अग्रवाल, विमर्श रस्तोगी, उषा अग्रवाल, गरिमा टंडन, अलकेश सोती सहित आयोजन समिति के सदस्य और हजारों श्रद्धालु।



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