आपदा प्रबंधन के लिए तैयार हैं हिंदी विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट: आधुनिक राहत सामग्री से लैस हुए कैडेट, 'आपदा मित्र' के रूप में करेंगे सहयोग
वर्धा: प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित आपात स्थितियों से निपटने तथा त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में नागरिक प्रशासन को सहयोग देने के लिए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा के राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) कैडेट पूरी तरह तैयार हैं। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान कैडेटों को अत्याधुनिक आपदा प्रबंधन किट (Disaster Management Kit) प्रदान की गई। महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) से प्रशिक्षित ये कैडेट अब जमीनी स्तर पर 'आपदा मित्र' स्वयंसेवकों की भूमिका निभाएंगे।
📌 एनसीसी आपदा प्रबंधन किट वितरण: मुख्य बिंदु
- सुरक्षा एवं रेस्क्यू किट: कैडेट्स को जीवनरक्षक सुरक्षा उपकरण, रेस्क्यू रोप (बचाव रस्सियां), हाई-बीम टॉर्च, प्राथमिक उपचार (First Aid) सामग्री और रेनकोट वितरित।
- SDMA का विशेष प्रशिक्षण: कैडेट्स ने एनसीसी शिविर के दौरान महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से राहत एवं बचाव की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- 'आपदा मित्र' की दोहरी भूमिका: बाढ़, आगजनी, भूस्खलन अथवा आकस्मिक दुर्घटनाओं में जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय को देंगे त्वरित सहायता।
- कुलपति का संदेश: कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कैडेटों के सामाजिक दायित्व, निष्ठा और समर्पण भाव की सराहना की।
- कुशल मार्गदर्शन: एसोसिएट एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. अनिकेत अनिल आंबेकर की देखरेख में संपन्न हुआ किट वितरण।
📊 आपदा प्रबंधन तैयारी: रूपरेखा व किट विवरण
| आयाम / विवरण | आधिकारिक स्थिति एवं सामग्री विवरण |
|---|---|
| संबद्ध संस्था व दल | एनसीसी विंग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा |
| प्रशिक्षण एजेंसी | महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) |
| प्राप्त किट सामग्री | सुरक्षा हेलमेट/उपकरण, रेस्क्यू रोप, टॉर्च, फर्स्ट एड बॉक्स, रेनकोट एवं आपात किट |
| प्रदत्त भूमिका / दायित्व | 'आपदा मित्र' स्वयंसेवक (आपदा के समय फर्स्ट रिस्पॉन्डर) |
| मार्गदर्शक अधिकारी | लेफ्टिनेंट डॉ. अनिकेत अनिल आंबेकर (एसोसिएट एनसीसी अधिकारी) |
एसडीएमए से मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण: 'आपदा मित्र' के रूप में मिली पहचान
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के एनसीसी विंग ने अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में आपदा प्रतिक्रिया को प्राथमिक विषय के रूप में शामिल किया है। एनसीसी शिविर के दौरान कैडेटों को महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के विशेषज्ञों द्वारा भूकंप, बाढ़, आकाशीय बिजली, आगजनी और औद्योगिक दुर्घटनाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) की बारीकियों से अवगत कराया गया।
इस विशेष प्रशिक्षण के उपरांत कैडेट्स को आधिकारिक तौर पर 'आपदा मित्र' स्वयंसेवकों की दक्षता प्राप्त हुई है। किसी भी अप्रत्याशित संकट के समय जब पेशेवर बचाव दल पहुंचने में समय लगता है, तब ये कैडेट 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (First Responder) के रूप में प्राथमिक चिकित्सा और बचाव कार्य शुरू करने में सक्षम होंगे।
'संकट में सेवा ही युवाओं का सर्वोच्च राष्ट्रधर्म': कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने एनसीसी कैडेटों के उत्साह और सामाजिक समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट के समय समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने वाले संवेदनशील और कर्मठ नागरिक तैयार करना इसका ध्येय है।
“आपदा की घड़ी में सबसे पहले वह हाथ काम आता है जो प्रशिक्षित और निस्वार्थ हो। हमारे एनसीसी कैडेट्स को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से युक्त देखकर यह विश्वास और दृढ़ होता है कि वे किसी भी प्राकृतिक या मानव-जनित संकट के समय स्थानीय प्रशासन और पीड़ित समुदाय की रक्षा में उत्कृष्ट भूमिका निभाएंगे।”
— प्रो. कुमुद शर्मा (कुलपति, MGAHV वर्धा)
गरिमामयी उपस्थिति में सौंपी गई रेस्क्यू सामग्री
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एसोसिएट एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. अनिकेत अनिल आंबेकर के कुशल निर्देशन में सभी पात्र कैडेट्स को किट वितरित की गई।
- कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रीति खोडे ने कैडेटों को अनुशासन और तत्परता का संदेश दिया।
- परेड प्रशिक्षक आकाश मांडदे एवं एनसीसी कार्यालय के सचिन नाखले ने सामग्री वितरण और व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग दिया।
- किट प्राप्त करने के बाद सभी एनसीसी कैडेटों ने सामूहिक संकल्प व्यक्त किया कि वे आपदा के समय ‘सेवा, सुरक्षा और सहयोग’ के मूल मंत्र पर चलते हुए सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े रहेंगे।


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