हिंदी विश्वविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर निकाली गई भव्य जागरूकता रैली: श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन से गांधी हिल तक गूंजा सकारात्मकता का संदेश
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के शिक्षा विद्यापीठ अंतर्गत मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को परिसर में एक व्यापक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली का उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैली भ्रांतियों और संकोच को दूर कर भावनात्मक संतुलन व संवाद के महत्व को रेखांकित करना रहा। इस वर्ष यह दिवस ‘जीवन के वास्तविक अनुभवों को सुना जाए: वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव’ की केंद्रीय थीम पर आयोजित किया गया।
📌 मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली के मुख्य बिंदु:
- रैली का मार्ग: रैली का शुभारंभ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन से हुआ, जो परिसर के गांधी हिल मार्ग से गुजरते हुए पुनः मुखर्जी भवन पहुंचकर संपन्न हुई।
- केंद्रीय विषय: 'जीवन के वास्तविक अनुभवों को सुना जाए: वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव' विषय पर छात्रों ने जन-जागरूकता के नारे लगाए।
- वरिष्ठ संकाय सदस्यों की सहभागिता: शिक्षा विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. गोपाल कृष्ण ठाकुर सहित मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापकों ने रैली का नेतृत्व किया।
- सार्थक संदेश: मानसिक तनाव को छुपाने के बजाय अपनों से साझा करने और समय पर परामर्श लेने के प्रति जागरूक किया गया।
📊 जागरूकता रैली: एक नजर में
| पहलू / घटक | आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| आयोजनकर्ता विभाग | मनोविज्ञान विभाग (शिक्षा विद्यापीठ), MGAHV वर्धा |
| रैली का मार्ग | डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन → गांधी हिल → मुखर्जी भवन |
| केंद्रीय थीम | जीवन के वास्तविक अनुभवों को सुना जाए: वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव |
| प्रमुख नेतृत्व | प्रो. गोपाल कृष्ण ठाकुर (अधिष्ठाता, शिक्षा विद्यापीठ) |
| प्रतिभागी | विभाग के शिक्षक, काउंसलर्स, शोधार्थी एवं परास्नातक विद्यार्थी |
परिसर में मानसिक स्वास्थ्य संवाद को बढ़ावा देने की पहल
प्रातः काल विश्वविद्यालय के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन के समक्ष विद्यार्थी और शिक्षक एकत्रित हुए। हाथों में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक जीवनशैली से संबंधित स्लोगन की तख्तियां लिए प्रतिभागियों ने गांधी हिल की ओर प्रस्थान किया। रैली के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि मानसिक तनाव किसी भी उम्र या वर्ग में हो सकता है, और इसे सामाजिक कलंक मानने के बजाय एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या की तरह देखना चाहिए।
“मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि संपूर्ण भावनात्मक और सामाजिक तंदुरुस्ती है। जब हम वास्तविक अनुभवों और समस्याओं को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनते हैं, तभी समाज में वास्तविक बदलाव की शुरुआत होती है।”
वरिष्ठ संकाय सदस्यों और शोधार्थियों की सक्रिय उपस्थिति
इस अवसर पर शिक्षा विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. गोपाल कृष्ण ठाकुर ने रैली को दिशा दी और छात्रों के प्रयासों की सराहना की। रैली में मनोविज्ञान विभाग की परामर्शदाता (Counselors) डॉ. स्मृति त्रिपाठी एवं डॉ. ज्योति सावळे, सहायक प्रोफेसर डॉ. ब्रिजेश यादव, सहायक प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार त्रिपाठी, डॉ. प्रेरणा तथा योग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राहुल जाटव ने सक्रिय सहभागिता की।
शिक्षा विभाग और मनोविज्ञान विभाग के शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ रैली को सफल बनाया। उल्लेखनीय है कि इस तीन दिवसीय अभियान के तहत विगत दिवस व्याख्यान और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था, जबकि 12 अक्टूबर को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।



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