नवयुग कन्या महाविद्यालय एवं केन्या के यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू के बीच अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर: शोध, नवाचार और वैश्विक अवसरों को लगेंगे नए पंख
लखनऊ: राजधानी के राजेंद्र नगर स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित संबद्ध संस्थान नवयुग कन्या महाविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक क्षितिज पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वैश्विक स्तर पर अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान के पारस्परिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महाविद्यालय ने पूर्वी अफ्रीकी राष्ट्र केन्या स्थित प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू (University of Embu, Kenya) के साथ एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी के सतत मार्गदर्शन और दूरदर्शी विमर्श से साकार हुई यह साझेदारी छात्राओं और प्राध्यापकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच खोलने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
📌 अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समझौता: प्रमुख बिंदु
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारी: नवयुग कन्या महाविद्यालय (लखनऊ) एवं यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू (केन्या) के मध्य शैक्षणिक व शोध सहयोग।
- शीर्ष नेतृत्व का प्रतिनिधित्व: यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू के कुलपति प्रो. डैनियल मुगेंडी न्जिरू ने साझेदारी का प्रतिनिधित्व किया।
- सहयोग के प्रमुख आयाम: संयुक्त अनुसंधान, वैश्विक इंटर्नशिप, छात्र प्रशिक्षण, संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) एवं शोध संसाधनों का साझाकरण।
- प्रशासनिक एवं IQAC समन्वय: प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय के मार्गदर्शन, आईक्यूएसी संयोजिका प्रो. संगीता कोतवाल के सहयोग तथा समन्वयक डॉ. नेहा अग्रवाल के विशेष प्रयासों से समझौता हुआ संपन्न।
- वैश्विक दृष्टिकोण: छात्राओं को अंतरराष्ट्रीय शोध और बहुसांस्कृतिक अकादमिक वातावरण से जुड़ने का सीधा अवसर मिलेगा।
📊 नवयुग कन्या महाविद्यालय व यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू समझौता: रूपरेखा तालिका
| आयाम / विवरण | आधिकारिक विवरण एवं उद्देश्य |
|---|---|
| सहभागी संस्थान | नवयुग कन्या महाविद्यालय (लखनऊ, भारत) एवं यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू (केन्या) |
| समझौता हस्ताक्षर तिथि | 08 अक्टूबर 2026 |
| केन्याई संस्थान का नेतृत्व | प्रो. डैनियल मुगेंडी न्जिरू (कुलपति, University of Embu) |
| प्रेरणा एवं मुख्य मार्गदर्शन | प्रो. जे. पी. सैनी (माननीय कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय) |
| महाविद्यालयीय नेतृत्व एवं समन्वय | प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या), प्रो. संगीता कोतवाल (IQAC संयोजिका), डॉ. नेहा अग्रवाल (MoU समन्वयक) |
| प्रमुख शैक्षणिक उद्देश्य | संयुक्त शोध पत्र, संयुक्त संगोष्ठियां/कार्यशालाएं, इंटर्नशिप, फैकल्टी व स्टूडेंट एक्सचेंज |
अनुसंधान, इंटर्नशिप और फैकल्टी डेवलपमेंट के नए आयाम
इस द्विपक्षीय समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों की अकादमिक शक्तियों को जोड़कर छात्राओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी शिक्षा से लैस करना है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा:
- संयुक्त अनुसंधान एवं शोध प्रकाशन: दोनों संस्थानों के प्राध्यापक और शोधार्थी समकालीन वैज्ञानिक, सामाजिक व पर्यावरण से जुड़े विषयों पर मिलकर शोध कार्य करेंगे।
- वैश्विक छात्र इंटर्नशिप व प्रशिक्षण: छात्राओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यावहारिक अनुभव, ऑनलाइन/ऑफलाइन मेंटरशिप और विशिष्ट तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
- संकाय विकास कार्यक्रम (FDP): दोनों देशों की शिक्षण विधियों, नवाचारों और शैक्षणिक तकनीकों को साझा करने के लिए शिक्षकों के पारस्परिक संवाद सत्र आयोजित होंगे।
- संयुक्त सम्मेलन एवं कार्यशालाएं: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों और क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का संयुक्त मंच तैयार किया जाएगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी का विजन और महाविद्यालय का नेतृत्व
यह ऐतिहासिक उपलब्धि लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी के अंतरराष्ट्रीयकरण और वैश्विक शैक्षणिक रैंकिंग में विस्तार के विजन के अनुरूप साकार हुई है। उनके सतत प्रोत्साहन ने महाविद्यालय को विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ संस्थागत जुड़ाव स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान की।
“उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल स्थानीय स्तर पर उपाधि प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैश्विक सोच, अनुसंधान की दृष्टि और बहु-सांस्कृतिक ज्ञान का संचार करना है। यूनिवर्सिटी ऑफ एम्बू के साथ यह समझौता हमारी छात्राओं को वैश्विक स्तर पर सीखने और शोध करने के असीम अवसर देगा।”
— प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय)
आंतरिक गुणवत्ता संवर्धन प्रकोष्ठ (IQAC) की प्रभावी भूमिका
महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने में प्रो. संगीता कोतवाल (संयोजिका, IQAC) का मार्गदर्शन अत्यंत प्रभावी रहा। संस्थागत गुणवत्ता संवर्धन और अकादमिक विकास के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता ने इस समझौते की ठोस नींव तैयार की।
वहीं, इस अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को धरातल पर उतारने में IQAC सदस्य एवं MoU समन्वयक डॉ. नेहा अग्रवाल के समर्पित प्रयासों की केंद्रीय भूमिका रही। अंतरराष्ट्रीय संपर्क स्थापित करने, विधिक व शैक्षणिक शर्तों के प्रारूपण तथा दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य निरंतर संवाद कायम रखने में उनके योगदान की महाविद्यालय परिवार ने मुक्तकंठ से सराहना की।


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