NHM कर्मचारियों का आंदोलन चौथे दिन भी जारी: 12 अक्टूबर को लखनऊ में जुटेंगे प्रदेशभर के कर्मी; न्यूनतम ₹18,000 वेतन और नियमितीकरण पर शासन से वार्ता का इंतजार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को चौथे दिन भी जारी रहा। राजधानी के ईको गार्डन धरना स्थल पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले डटे हजारों कर्मचारियों ने शासन से अपनी लंबित समस्याओं पर तत्काल वार्ता शुरू करने की अपील की। लगातार चार दिन बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से सकारात्मक संवाद की पहल न होने से नाराज संघर्ष समिति ने सोमवार, 12 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी महाजुटान का आह्वान किया है।
📌 आंदोलन और 12 अक्टूबर के महाजुटान के मुख्य बिंदु:
- 12 अक्टूबर को लखनऊ कूच: प्रदेश के सभी 75 जनपदों से हजारों संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी सोमवार सुबह ईको गार्डन पहुंचेंगे।
- न्यूनतम वेतन की गारंटी: सभी संवर्गों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम ₹18,000 प्रतिमाह मूल मानदेय और वार्षिक वेतनवृद्धि की मांग।
- नियमितीकरण व समायोजन: वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों को राज्य स्वास्थ्य व्यवस्था में रिक्त पदों के सापेक्ष नियमित करने का प्रस्ताव।
- सामाजिक सुरक्षा लाभ: पात्र कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से EPF, ESI, ग्रेच्युटी और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का वैधानिक लाभ मिले।
- सर्व-संवर्ग एकजुटता: CHO, RBSK, आयुष डॉक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और डेटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त रूप से मैदान में।
📊 NHM संविदा कर्मचारी आंदोलन: प्रमुख मांगें एवं स्थिति
| प्रमुख बिंदु / मांग | कर्मचारियों का पक्ष व वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| धरना स्थल व अवधि | ईको गार्डन, लखनऊ (लगातार चौथा दिन जारी) |
| न्यूनतम मानदेय मांग | न्यूनतम ₹18,000 प्रतिमाह + अनुभव के आधार पर ग्रेड-पे निर्धारण |
| स्थायीकरण नीति | राज्य स्वास्थ्य संवर्ग में सीधी सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण |
| सामाजिक सुरक्षा सुरक्षा कवच | EPF, ESI, ग्रेच्युटी एवं स्वास्थ्य बीमा का अनिवार्य कवरेज |
| आगामी रणनीति | 12 अक्टूबर 2026 को प्रदेशभर के स्वास्थ्य कर्मियों का विशाल प्रदर्शन |
संवादहीनता से आक्रोश: वार्ता की पहल न होने पर तेज हुआ आंदोलन
ईको गार्डन में धरनारत कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान, संचारी रोग नियंत्रण, जच्चा-बच्चा सुरक्षा और ग्रामीण हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के संचालन में जी-जान से जुटे हैं। सीमित मानदेय और अनिश्चित भविष्य के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया गया।
“चार दिनों से हजारों कर्मचारी धूप और विपरीत मौसम में ईको गार्डन में बैठे हैं, लेकिन अभी तक शासन की ओर से वार्ता के लिए कोई औपचारिक पहल नहीं की गई है। इस संवादहीनता ने कर्मचारियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। जब तक हमारी पांच सूत्रीय मांगों पर लिखित और समयबद्ध समझौता नहीं होता, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
— संयुक्त संघर्ष समिति प्रवक्ता
न्यूनतम ₹18 हजार मानदेय, आउटसोर्स निगम में समायोजन और गृह जनपद तबादला
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार के समक्ष अपनी विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की है:
- सम्मानजनक वेतन ढांचा: मंहगाई के अनुपात में किसी भी संविदाकर्मी का वेतन ₹18,000 से कम न हो तथा वरिष्ठता के आधार पर वार्षिक वेतनवृद्धि पारदर्शी रूप से जोड़ी जाए।
- पारदर्शी स्थानांतरण नीति: पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए महिला व पुरुष कर्मियों को गृह जनपद अथवा समीपस्थ जिलों में पारस्परिक स्थानांतरण (Mutual Transfer) की सुविधा दी जाए।
- आउटसोर्स कर्मियों का संरक्षण: बिचौलियों और ठेकेदारों के शोषण को समाप्त कर आउटसोर्स कर्मियों को प्रस्तावित आउटसोर्स सेवा निगम अथवा DHS में उनकी वरिष्ठता और पूर्व सेवाकाल को सुरक्षित रखते हुए समायोजित किया जाए।
रविवार को भी डटे रहे सभी संवर्ग, सोमवार को ऐतिहासिक महाजुटान की तैयारी
रविवार को आयोजित सभा में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), स्टाफ नर्स, एएनएम (ANM), आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, टीबी संवर्ग, काउंसलर, डेंटल सर्जन और डेटा एंट्री ऑपरेटरों के प्रांतीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संघर्ष समिति ने 12 अक्टूबर की रणनीति साझा करते हुए कहा कि सोमवार सुबह प्रदेश के हर कोने से कर्मचारी बसों और ट्रेनों के जरिए राजधानी पहुंच रहे हैं। यदि शासन ने तुरंत सार्थक और सकारात्मक वार्ता शुरू नहीं की, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाले बड़े लोकतांत्रिक कदम की ओर बढ़ सकता है।


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