पंतनगर रामलीला में शूर्पणखा का नासिका छेदन, खर-दूषण वध और सीता हरण का मंचन: भरत-कैकेयी संवाद से लेकर अरण्य कांड तक बाल कलाकारों ने जीवंत किए दृश्य
लखनऊ: राजधानी के पंतनगर में पंतनगर सांस्कृतिक समिति, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित पारंपरिक श्रीरामलीला महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को रामायण के कई अत्यंत मार्मिक एवं रोमांचक प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। भरत के ननिहाल से लौटने और माता कैकेयी से संवाद से लेकर शूर्पणखा का नासिका छेदन, खर-दूषण वध और लंकापति रावण द्वारा कपटपूर्वक सीता हरण तक के दृश्यों ने पंडाल में उपस्थित सैकड़ों दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंच पर स्थानीय बाल कलाकारों के धाराप्रवाह संवाद और भावपूर्ण अभिनय ने पूरे प्रसंग को जीवंत बना दिया।
📌 पंतनगर श्रीरामलीला महोत्सव: तीसरे दिन के मुख्य बिंदु
- समारोह का शुभारंभ: मुख्य अतिथि विजय विश्वास पंत और विशिष्ट अतिथि भवान सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित कर किया मंच पूजन।
- आरंभिक वंदना: बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत देवी आरती एवं 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' स्तुति से हुआ कार्यक्रम का आगाज।
- अयोध्या से चित्रकूट गमन: भरत-कैकेयी संवाद, मंथरा पर शत्रुघ्न का क्रोध और चित्रकूट में श्रीराम से मिलाप का भावुक मंचन।
- अरण्य कांड के दृश्य: पंचवटी में शूर्पणखा का आगमन, लक्ष्मण द्वारा नासिका छेदन, खर-दूषण का वध और मारीच का स्वर्ण मृग बनना।
- सीता हरण का कारुणिक प्रसंग: जोगी भेष में रावण द्वारा माता सीता के हरण के दृश्य ने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया।
📊 पंतनगर रामलीला 2026: तीसरे दिन के पात्र एवं कलाकार
| रामायण का पात्र | अभिनय करने वाले बाल कलाकार |
|---|---|
| भगवान श्रीराम | इशाना जोशी |
| लक्ष्मण | कार्तिक रौतेला |
| माता सीता | कोमल पांडेय |
| भरत एवं शत्रुघ्न | पार्थ उप्रेती (भरत) एवं जय उप्रेती (शत्रुघ्न) |
| कैकेयी एवं शूर्पणखा | ऋचा उप्रेती (दोहरा सशक्त अभिनय) |
| मंथरा | अंशिका रस्तोगी |
| खर एवं दूषण | प्रशांत उप्रेती (खर) एवं मानस नयाल (दूषण) |
| मारीच (स्वर्ण मृग) एवं जोगी रावण | कौशल पांडेय (मारीच) एवं भुवन चंद्र जोशी (जोगी रावण) |
भरत-कैकेयी संवाद से लेकर दंडकवन प्रस्थान की मार्मिक कथा
लीला मंचन के पहले चरण में अयोध्या के दुखद घटनाक्रम को दर्शाया गया। ननिहाल से लौटकर जब राजकुमार भरत को पिता दशरथ के देहावसान और भ्राता राम के वनवास का सत्य ज्ञात हुआ, तो उन्होंने माता कैकेयी को कटु वचन कहे और राजसिंहासन स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। वहीं, दासी मंथरा की कुटिलता पर भड़के शत्रुघ्न के क्रोध और भरत द्वारा उन्हें शांत कराने के दृश्य ने दर्शकों को प्रभावित किया।
“भगवान श्रीराम की पादुकाओं को सिर पर रखकर अयोध्या लौटने और चित्रकूट से प्रभु के दंडकारण्य की ओर प्रस्थान करने के दृश्य ने भाई-भाई के अटूट प्रेम और त्याग की अनुपम मिसाल पेश की।”
पंचवटी में शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण संहार और सीता हरण
महोत्सव के दूसरे सत्र में पंचवटी की सुरम्य कुटिया में रावण की बहन शूर्पणखा के आगमन का दृश्य प्रस्तुत किया गया। शूर्पणखा द्वारा विवाह का प्रस्ताव रखने और माता सीता पर झपटने पर लक्ष्मण द्वारा उसके नाक-कान काट देने के प्रसंग पर दर्शकों ने जोरदार करतल ध्वनि से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
- खर-दूषण का वध: बहन के अपमान का प्रतिशोध लेने आई चौदह हजार राक्षसों की सेना सहित खर और दूषण का प्रभु राम के तीरों से संहार दिखाया गया।
- मायावी मारीच प्रसंग: रावण के आदेश पर सोने का हिरण बने मारीच का वध और लक्ष्मण रेखा खींचने का दृश्य प्रभावशाली रहा।
- जोगी भेष में रावण: संन्यासी के भेष में आए दशानन द्वारा भिक्षा मांगते हुए माता सीता का हरण करने और पुष्पक विमान से लंका ले जाने के कारुणिक दृश्य ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया।
अतिथियों का स्वागत और सांस्कृतिक समिति का आभार
पंतनगर सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष उमेश चंद्र सनवाल ने मंच से मुख्य अतिथि विजय विश्वास पंत, विशिष्ट अतिथि भवान सिंह रावत तथा उपस्थित क्षेत्रीय गणमान्य नागरिकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सनातन संस्कृति, मर्यादा और नैतिक मूल्यों से जोड़े रखने के लिए बाल कलाकारों द्वारा ऐसे आयोजनों का मंचन अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक मंडल के वरिष्ठ सदस्य, स्थानीय पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी उपस्थित रहे, जिन्होंने देर रात तक पंडाल में बैठकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।


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