ऋषिकेश के तीन प्रमुख गंगा घाटों पर गूंजेगा सामूहिक सुंदरकांड: सपना गोयल की अगुआई में 18 से 20 नवंबर तक भव्य अनुष्ठान; मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी में तय हुई रूपरेखा
लखनऊ: सनातन संस्कृति के प्रसार और भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से संचालित “सुंदरकांड महा अभियान, भारत वर्ष की बने पहचान” के अंतर्गत आगामी नवंबर माह में ऋषिकेश के पावन गंगा तटों पर दिव्य अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल के नेतृत्व में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को चिनहट स्थित सनातन धाम लॉन में आयोजित मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी में इस यात्रा की औपचारिक घोषणा की गई। इस पावन तीर्थाटन के तहत 18 से 20 नवंबर 2026 तक ऋषिकेश के तीन प्रमुख घाटों पर तीन दिवसीय सामूहिक सुंदरकांड पाठ संपन्न होगा।
📌 ऋषिकेश सुंदरकांड अनुष्ठान के मुख्य बिंदु:
- तीन दिवसीय कार्यक्रम: 18 नवंबर को जानकी झूला घाट, 19 नवंबर को त्रिवेणी घाट और 20 नवंबर को परमार्थ निकेतन घाट पर पाठ।
- मांगलिक तिथियों का संयोग: 18 नवंबर को अक्षय नवमी (आंवला नवमी) और 20 नवंबर को चातुर्मास समापन की हरिप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी।
- अभियान का उद्देश्य: राष्ट्र उत्थान, नकारात्मक ऊर्जा का शमन और सनातन चेतना के माध्यम से भारत को 'विश्व गुरु' बनाना।
- संस्था की भूमिका: बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के "ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति" द्वारा जनसहयोग से निरंतर आयोजन।
📊 ऋषिकेश सामूहिक सुंदरकांड पाठ: समय-सारणी
| दिनांक व मांगलिक दिवस | स्थान (गंगा घाट) | निर्धारित समय |
|---|---|---|
| 18 नवंबर 2026 (अक्षय नवमी) | जानकी झूला घाट, ऋषिकेश | सायं 05:00 बजे |
| 19 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल दशमी) | त्रिवेणी घाट, ऋषिकेश | दोपहर 01:00 बजे |
| 20 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी) | परमार्थ निकेतन परिसर, ऋषिकेश | प्रातः 11:00 बजे |
कार्तिक मास में ऋषिकेश तीर्थाटन का विशेष आध्यात्मिक महत्व
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सपना गोयल ने बताया कि कार्तिक मास हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र माह माना जाता है। इस यात्रा के दौरान दो अत्यंत कल्याणकारी तिथियां पड़ रही हैं:
“18 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की आंवला नवमी है, जिसे अक्षय नवमी भी कहते हैं। 'अक्षय' का अर्थ अविनाशी है, इसलिए इस दिन किए गए जप, तप और अनुष्ठान का फल कभी क्षीण नहीं होता। वहीं 20 नवंबर को हरिप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी है, जो चार महीनों के चातुर्मास व्रत का समापन करती है। ऐसे मांगलिक दिनों में देवभूमि ऋषिकेश में गंगा तट पर सुंदरकांड का पाठ सत-चित आत्माओं के जागरण के साथ राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
— सपना गोयल (संस्थापिका, सुंदरकांड महा अभियान)
मातृशक्ति की सहभागिता: देश के प्रमुख तीर्थों में लहराई सनातन पताका
ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति के बैनर तले अब तक देश के कई ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थस्थलों पर विशाल अनुष्ठान संपन्न हो चुके हैं:
- झूलेलाल घाट, लखनऊ: 10 मार्च 2024 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 5,000 से अधिक महिलाओं ने एक साथ सामूहिक पाठ किया।
- पावन तीर्थ नैमिषारण्य: 23 जून 2024 को 5,000 मातृशक्तियों की उपस्थिति में भव्य सुंदरकांड महायज्ञ आयोजित हुआ।
- कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा: 1,500 से अधिक महिलाओं ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में संगीतमय पाठ किया।
- अन्य प्रमुख तीर्थ: काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी (हरिद्वार), सिद्धबली मंदिर (कोटद्वार), रुड़की महादेव, रामघाट (चित्रकूट), लेटे हुए हनुमान जी (प्रयागराज) और आनंदेश्वर मंदिर (कानपुर)।
- प्रभु श्री राम जन्मभूमि, अयोध्या: 11 सितंबर 2024 से प्रभु रामलला के परिसर में मासिक सुंदरकांड पाठ की निरंतर श्रृंखला चलाई जा रही है।


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