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काशी में आज ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण: CM योगी बोले- काशी से क्योटो तक साझी समृद्धि गढ़ रही भारत-जापान मैत्री

काशी से क्योटो तक साझी समृद्धि की नई राह बना रही भारत-जापान मैत्री: पूर्व PM शिंजो आबे की स्मृति में बने ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का काशी में लोकार्पण

📍 स्थान: रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, वाराणसी (काशी) | 📅 दिनांक: 07 अक्टूबर 2026 | 🌏 श्रेणी: भारत-जापान संबंध, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, काशी-क्योटो पार्टनरशिप, उत्तर प्रदेश शासन

वाराणसी/लखनऊ: भारत और जापान के बीच सदियों पुरानी सांस्कृतिक आत्मीयता और अटूट कूटनीतिक विश्वास को नया आयाम देते हुए बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को धर्मनगरी काशी में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का भव्य लोकार्पण किया जा रहा है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों और योगदान को समर्पित इस विशिष्ट परियोजना के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के ऐतिहासिक विजन के चलते आज काशी से क्योटो तक आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों स्तरों पर दोनों देश साझी समृद्धि की मिसाल कायम कर रहे हैं।

📌 भारत-जापान साझेदारी व कॉरिडोर के मुख्य बिंदु:

  • शिंजो आबे को श्रद्धांजलि: भारत के सच्चे मित्र और आधुनिक भारत-जापान संबंधों के वास्तुकार रहे शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोने के लिए वाराणसी में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का निर्माण।
  • काशी से क्योटो का जुड़ाव: प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और आधुनिकीकरण के लिए काशी-क्योटो सिस्टर सिटी समझौते को मिली नई गति।
  • ₹90,000 करोड़ का निवेश: उत्तर प्रदेश सरकार और अग्रणी जापानी कंपनियों के बीच विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और बुनियादी ढांचे में लगभग 90 हजार करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर अमल।
  • रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजन: भारत-जापान सहयोग के प्रतीक 'रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर' में आयोजित मुख्य समारोह में सीएम योगी की मौजूदगी।
  • आस्था से अर्थव्यवस्था तक: बौद्ध और सनातन सांस्कृतिक साझा विरासत अब आधुनिक हाई-स्पीड रेल, सेमीकंडक्टर और अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास का मजबूत आधार बनी।

📊 भारत-जापान द्विपक्षीय संबंध व यूपी परिदृश्य: एक नजर में

प्रमुख घटक विवरण व रणनीतिक महत्व
लोकार्पित परियोजना आबे मेमोरियल कॉरिडोर (Abe Memorial Corridor)
समर्पित व्यक्तित्व दिवंगत शिंजो आबे (पूर्व प्रधानमंत्री, जापान)
सांस्कृतिक साझेदारी मॉडल काशी (वाराणसी) – क्योटो (जापान) सिस्टर सिटी पार्टनरशिप
यूपी में जापानी निवेश लगभग ₹90,000 करोड़ के MoUs (औद्योगिक एवं शहरी विकास)
कार्यक्रम स्थल रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, सिगरा, वाराणसी

"विश्वास की विरासत और विकास की साझी यात्रा": मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान का संबंध केवल दो सरकारों के बीच का कूटनीतिक गठजोड़ नहीं है, बल्कि यह दो अत्यंत प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों के बीच आध्यात्मिक व भावनात्मक जुड़ाव का जीवंत सेतु है।

"आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे जी ने दोनों देशों की इस आत्मीय मैत्री को नई ऐतिहासिक ऊंचाइयां प्रदान कीं। भारत-जापान के अटूट संबंधों और शिंजो आबे जी की अविस्मरणीय स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण दोनों देशों के नागरिकों के बीच सम्मान और स्नेह को और प्रगाढ़ करेगा। काशी से क्योटो तक, आस्था से अर्थव्यवस्था तक, यह मैत्री साझी प्रगति की नई दिशा तय कर रही है।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

आस्था से अर्थव्यवस्था तक: ₹90,000 करोड़ का जापानी निवेश बना संबल

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सांस्कृतिक निकटता अब उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश में तब्दील हो रही है। राज्य सरकार ने जापान की वैश्विक कंपनियों के साथ ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में करीब 90 हजार करोड़ रुपये के एमओयू किए हैं।

  • जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप: ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में जापानी कंपनियों के लिए डेडिकेटेड क्लस्टर्स और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
  • रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर: जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से निर्मित यह आधुनिक कन्वेंशन सेंटर दोनों देशों की संयुक्त वास्तुकला और तकनीकी सहयोग का प्रतीक है।
  • हेरिटेज एवं स्मार्ट सिटी तकनीक: क्योटो शहर के मॉडल पर वाराणसी के हेरिटेज जोन्स के संरक्षण, आधुनिक ड्रेनेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में जापानी विशेषज्ञता का निरंतर उपयोग किया जा रहा है।

दिसंबर 2015 की वह ऐतिहासिक शाम: जब गंगा आरती में शामिल हुए थे शिंजो आबे

दिसंबर 2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने काशी का दौरा किया था और दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती में भाग लिया था, तभी से वाराणसी के जनमानस में उनका एक आत्मीय स्थान बन गया था।

‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ न केवल काशी के बुनियादी ढांचे को नया सौंदर्य प्रदान करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत के विकास और वैश्विक मंच पर देश की साख को मजबूत करने में शिंजो आबे के अमूल्य योगदान का भी स्मरण कराएगा।

निष्कर्ष: काशी की धरती पर ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण भारत और जापान के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी और सांस्कृतिक आत्मीयता का ऐसा शाश्वत प्रमाण है, जो दोनों देशों को एशिया और पूरे विश्व में शांति व समृद्धि का पथप्रदर्शक बनाए रखेगा।

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