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UP धान क्रय नीति 2026-27: योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी; 65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य, 48 घंटे में होगा भुगतान

धान खरीद में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगी योगी सरकार: खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य; 4,500 केंद्रों पर ₹2441 MSP पर होगी खरीद

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 09 अक्टूबर 2026 | 🌾 श्रेणी: कृषि एवं किसान कल्याण, धान क्रय नीति, उत्तर प्रदेश कैबिनेट निर्णय, खाद्य एवं रसद विभाग

लखनऊ: देश भर में सर्वाधिक धान खरीद कर शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाली उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस वर्ष अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की रूपरेखा तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को संपन्न कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की नई धान क्रय नीति को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। पिछले वर्ष खरीदे गए 62 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस बार 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 8 सरकारी एजेंसियों के माध्यम से प्रदेश भर में 4,500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे और किसानों को डीबीटी के माध्यम से 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

📌 धान क्रय नीति 2026-27 के मुख्य बिंदु:

  • 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य: पिछले वर्ष के 62 लाख मीट्रिक टन के राष्ट्रीय रिकॉर्ड से 3 लाख मीट्रिक टन अधिक खरीद का लक्ष्य।
  • बढ़ा हुआ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): सामान्य धान ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान ₹2,461 प्रति क्विंटल तय।
  • फार्मर आईडी से सीधी खरीद: एग्रीस्टैक (AgriStack) किसान पहचान धारकों को अलग से पोर्टल पर पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं।
  • 48 घंटे में PFMS भुगतान: किसानों के बैंक खातों में पीएफएमएस के जरिए 48 घंटे में भुगतान, देरी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
  • जीपीएस और क्यूआर कोड ट्रैकिंग: बिचौलियों पर नकेल कसने के लिए वाहनों में जीपीएस और बोरों पर क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग लागू।

📊 उत्तर प्रदेश धान खरीद नीति 2026-27: मुख्य मानक

मानक / विवरण आधिकारिक नीतिगत प्रावधान
कुल खरीद लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन (पिछले वर्ष 62 लाख MT)
सामान्य धान MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल (3% की वृद्धि)
ग्रेड-ए धान MSP ₹2,461 प्रति क्विंटल
पश्चिमी यूपी में खरीद अवधि 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक
पूर्वी यूपी में खरीद अवधि 01 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक
प्रस्तावित क्रय केंद्र 4,500 केंद्र (8 क्रय एजेंसियों द्वारा संचालित)

क्षेत्रवार समय-सारणी और 8 क्रय एजेंसियां

खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और फसल पकने के चक्र को ध्यान में रखते हुए दो चरणों में खरीद शुरू की जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर से और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर से क्रय केंद्र क्रियाशील हो जाएंगे।

धान खरीद कार्य को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए आठ प्रमुख एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है:

  • खाद्य एवं रसद विभाग (विपणन शाखा)
  • उत्तर प्रदेश प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन (PCF)
  • उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन (PCU)
  • उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद एवं संबद्ध FPO/FPC
  • यूपीएसएस (UPSS)
  • भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (NCCF)
  • भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED)
  • भारतीय खाद्य निगम (FCI)

*संबंधित जनपदों के जिलाधिकारी (DM) स्थानीय आवक, पैदावार और दूरी को देखते हुए क्रय संस्थाओं को केंद्रों का आवंटन करेंगे।

एग्रीस्टैक 'फार्मर आईडी' से राहत, 48 घंटे में PFMS भुगतान

प्रक्रियागत जटिलताओं को खत्म करते हुए इस वर्ष केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक प्रोजेक्ट के अंतर्गत तैयार की गई 'डिजिटल फार्मर आईडी' धारक किसानों को विभाग के पोर्टल पर दोबारा पंजीकरण कराने से छूट दी गई है। उनकी डिजिटल पहचान से ही भूमि रकबे और फसल विवरण का स्वतः सत्यापन हो जाएगा।

“धान तौल के बाद सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से अधिकतम 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में डीबीटी से राशि अंतरित की जाएगी। भुगतान में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी पर संबंधित नोडल अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय की जाएगी।”
— मनोज पांडेय (खाद्य एवं रसद मंत्री, उत्तर प्रदेश)

जीपीएस व क्यूआर कोड से निगरानी, 12.25 लाख बोरों की व्यवस्था

कालाबाजारी और फर्जी बिलिंग को रोकने के लिए क्रय केंद्रों से राइस मिलों तक धान की ढुलाई करने वाले सभी ट्रकों में जीपीएस (GPS) अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिससे गोदाम से लेकर मिल तक स्टॉक की रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग होगी।

पैकिंग संकट से बचने के लिए शासन स्तर पर 12.25 लाख जूट/एचडीपीई बोरों की व्यवस्था की जा रही है, जिसमें से 80 हजार बोरे केंद्रों पर पहले ही अग्रिम रूप से उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

निष्कर्ष: समर्थन मूल्य में वृद्धि, फार्मर आईडी से पंजीकरण में सरलता, जीपीएस आधारित परिवहन और 48 घंटे में भुगतान की व्यवस्था से प्रदेश के अन्नदाताओं को न केवल उनकी मेहनत का सही दाम मिलेगा, बल्कि समय पर नकदी मिलने से रबी फसलों की बुवाई भी गति पकड़ेगी।

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