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यूपी के 26 प्रमुख देवी मंदिरों में गूंजेंगे देवी गीत व दुर्गा सप्तशती पाठ: सप्तमी से नवमी तक योगी सरकार कराएगी विशेष आयोजन; 78 कलाकारों को मिलेगा मंच

योगी सरकार सप्तमी से नवमी तक प्रमुख देवी मंदिरों में कराएगी दुर्गा सप्तशती पाठ व देवी गायन: 78 स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच, देखें 26 मंदिरों की पूरी सूची

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 16 अक्टूबर 2026 | 🕉️ श्रेणी: संस्कृति एवं पर्यटन, मिशन शक्ति, नवरात्र महोत्सव, उत्तर प्रदेश समाचार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों एवं सिद्ध देवी मंदिरों में शक्ति आराधना के साथ अब नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का संदेश प्रसारित होगा। मिशन शक्ति के अंतर्गत योगी सरकार शारदीय नवरात्र की सप्तमी से नवमी तिथि (शनिवार से सोमवार) तक प्रदेश के 26 प्रमुख देवी मंदिरों में त्रिदिवसीय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराने जा रही है। इन कार्यक्रमों में दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ और पारंपरिक देवी गीतों का गायन मुख्य आकर्षण होगा। इसके माध्यम से लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ प्रदेश के 78 स्थानीय कलाकारों को मंच और मानदेय उपलब्ध कराया जाएगा।

📌 त्रिदिवसीय सांस्कृतिक नवरात्र महोत्सव: मुख्य बिंदु:

  • सप्तमी से नवमी तक आयोजन: शनिवार से सोमवार तक चयनित 26 मंदिरों में पारंपरिक गायन व पाठ का संचालन।
  • 78 स्थानीय कलाकारों को अवसर: प्रत्येक चिन्हित मंदिर में 3-3 स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जाएगा, जिसमें महिला कलाकारों को प्राथमिकता दी गई है।
  • लखनऊ व प्रयागराज में विशेष फोकस: लखनऊ के चंद्रिका देवी व संकटा देवी मंदिर और प्रयागराज के अलोपी देवी व ललिता देवी मंदिर में कुल 12 कलाकारों को मंच मिलेगा।
  • मिशन शक्ति का विस्तार: शक्ति आराधना के जरिए समाज में बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का जनजागरण।
  • लोक कला को आर्थिक संबल: पारंपरिक विधाओं से जुड़े क्षेत्रीय कलाकारों को मानदेय और रोजगार के नए अवसर।

📊 नवरात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम: रूपरेखा एवं आयोजन मानक

मानक / विवरण आधिकारिक दिशा-निर्देश
आयोजन की तिथियां सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी तिथि (शनिवार से सोमवार)
चयनित देवी मंदिरों की संख्या प्रदेशभर के 26 प्रमुख शक्तिपीठ एवं मंदिर
प्रतिभागी स्थानीय कलाकार कुल 78 कलाकार (प्रत्येक मंदिर में 3 स्थानीय प्रतिभाएं)
मुख्य कार्यक्रम विधाएं दुर्गा सप्तशती पाठ एवं शास्त्रीय/पारंपरिक देवी गीत गायन
नोडल विभाग एवं अभियान पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन (मिशन शक्ति)

'सामाजिक बदलाव का माध्यम बनेंगे धार्मिक आयोजन': संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि शारदीय नवरात्र केवल पूजा-अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना जगाने का सशक्त अवसर है।

“शारदीय नवरात्र आस्था, शक्ति और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हमारा उद्देश्य है कि ये धार्मिक आयोजन सामाजिक बदलाव का माध्यम बनें। मंदिरों के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को उनकी सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय महिला कलाकारों को प्राथमिकता देकर उनकी कला को पहचान और आजीविका को सशक्त संबल दिया जा रहा है।”
— जयवीर सिंह (पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, उत्तर प्रदेश)

📍 उत्तर प्रदेश के इन 26 प्रमुख मंदिरों में होंगे त्रिदिवसीय आयोजन

क्र.सं. मंदिर / तीर्थ स्थल का नाम संबंधित जनपद
1मां विंध्यवासिनी देवी मंदिरमीरजापुर
2विशालाक्षी मंदिरवाराणसी
3ज्वाला देवी मंदिरसोनभद्र
4सीता समाहित स्थल (सीतामढ़ी)भदोही
5अलोपशंकरी (अलोपी) देवी मंदिरप्रयागराज
6ललिता देवी मंदिरप्रयागराज
7कड़ावासिनी (शीतला माता) मंदिरकौशांबी
8मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिरबलरामपुर
9ललिता देवी मंदिर (नैमिषारण्य)सीतापुर
10मां शाकुंभरी देवी मंदिरसहारनपुर
11कात्यायनी देवी मंदिरमथुरा
12मां शीतला चौकिया धामजौनपुर
मां बेल्हा देवी मंदिरप्रतापगढ़
13महालक्ष्मी देवी मंदिरवाराणसी
14चंद्रिका देवी मंदिरउन्नाव
15देवकाली मंदिरऔरैया
16मां तरकुलहा देवी धामगोरखपुर
17मां शीतला माता स्थलमऊ
18मां सिंह वाहिनी काली देवीचित्रकूट
19गायत्री शक्तिपीठहमीरपुर
20बैरागढ़ माता मंदिर (कोंच)जालौन
21मां कुष्मांडा देवी मंदिर (घाटमपुर)कानपुर नगर
22शीतला माता मंदिरमैनपुरी
23चामुंडा देवी मंदिरफिरोजाबाद
24चंद्रिका देवी मंदिर (बक्शी का तालाब)लखनऊ
25-26संकटा देवी मंदिर (लखनऊ) एवं अन्यलखनऊ

लोक गायकी का पुनरुद्धार और कलाकारों की आजीविका को संबल

आधुनिकता की चकाचौंध में लुप्त हो रही पारंपरिक गायन शैलियों—जैसे पचरा, जस, देवी सोहर और शास्त्रीय भजनों—को पुनर्जीवित करने के लिए यह पहल अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर भजन मंडलियों, लोक गायिकाओं और वाद्य यंत्र कलाकारों को सीधे सरकारी मंच मिलने से न केवल उनकी पहचान सुदृढ़ होगी, बल्कि उन्हें पारदर्शी ढंग से वित्तीय सहायता भी प्राप्त होगी।

निष्कर्ष: योगी सरकार की यह सांस्कृतिक पहल सनातन आस्था, लोक कला और महिला सशक्तीकरण का त्रिवेणी संगम है। शक्तिपीठों के पावन प्रांगण से दुर्गा सप्तशती के श्लोकों और लोक गीतों के माध्यम से नारी गरिमा और स्वावलंबन का यह संदेश पूरे प्रदेश को नई सामाजिक दिशा देगा।

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