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NHM कर्मियों का लखनऊ में महाधरना: 7वें दिन भी अड़े रहे डॉक्टर, नर्स, CHO और फार्मासिस्ट; ₹18,000 न्यूनतम वेतन की उठी मांग

ईको गार्डन में सातवें दिन भी गूंजा NHM कर्मचारियों का संघर्ष: समान वेतन और नियमितीकरण की मांग पर आर-पार की लड़ाई; वार्ताएं बेअसर

📍 स्थान: मान्यवर श्री कांशीराम जी ईको गार्डन, लखनऊ | 📅 दिनांक: 14 अक्टूबर 2026 | 🩺 श्रेणी: संविदा कर्मचारी आंदोलन, स्वास्थ्य विभाग, लखनऊ समाचार, कर्मचारी अधिकार

लखनऊ: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश के अंतर्गत कार्यरत संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में लगातार सातवें दिन भी पूरे उफान पर रहा। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश के सभी 75 जिलों से आए हजारों स्वास्थ्य कर्मियों ने एक सुर में अपनी आवाज बुलंद की। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक समान कार्य-समान वेतन, नियमितीकरण और न्यूनतम मानदेय जैसे मूलभूत अधिकारों पर शासन स्तर से लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

📌 NHM महाधरना: मुख्य बिंदु एवं ताजा स्थिति:

  • सात दिन से लगातार गतिरोध: अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) एवं उपमुख्यमंत्री स्तर की वार्ताओं के बावजूद लिखित आश्वासन न मिलने से कर्मियों में भारी आक्रोश।
  • न्यूनतम ₹18,000 मानदेय की मांग: हर संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारी के लिए न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक वेतन और पारदर्शी वेतन विसंगति निवारण नीति।
  • नियमितीकरण व सेवा सुरक्षा: स्वास्थ्य विभाग के स्वीकृत रिक्त पदों पर वर्षों से कार्यरत NHM कर्मियों का शत-प्रतिशत संविलियन।
  • सामाजिक सुरक्षा की गारंटी: सभी संवर्गों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और न्यायसंगत गृह जनपद स्थानांतरण नीति।
  • सारे संवर्ग एक मंच पर: आयुष चिकित्सक, नर्स, एएनएम, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, सीएचओ और डीईओ संयुक्त रूप से प्रदर्शन में डटे।

📊 संयुक्त संघर्ष समिति की 5 प्रमुख मांगें

प्रमुख मांग विस्तृत विवरण एवं कर्मचारियों का पक्ष
न्यूनतम वेतन सीमा न्यूनतम ₹18,000 प्रतिमाह आधार वेतन और पदवार पारदर्शी वेतन नीति
नियमितीकरण (Regularization) स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति देकर संविदा व्यवस्था से मुक्ति
समान कार्य-समान वेतन नियमित कर्मचारियों के समान कार्य दायित्व निभाने पर वेतन में समानता
सामाजिक सुरक्षा लाभ ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और दुर्घटना बीमा की कानूनी सुरक्षा
पारदर्शी स्थानांतरण नीति पारस्परिक (Mutual) एवं गृह जनपद स्थानांतरण की सुगम व्यवस्था

'केवल आश्वासनों से नहीं चलेगा काम, ठोस शासनादेश जारी करे सरकार'

धरना स्थल पर उपस्थित कर्मचारी नेताओं ने शासन की कार्यशैली पर गहरा क्षोभ प्रकट किया। उन्होंने बताया कि विगत दिनों अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) की अध्यक्षता में और राज्य के उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई भी सकारात्मक शासनादेश निर्गत नहीं किया गया।

“प्रदेश की पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों तक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ एनएचएम के संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी हैं। महामारी हो या नियमित टीकाकरण, हमने सदैव अग्रणी पंक्ति में रहकर अपनी सेवाएं दी हैं। इसके बावजूद हमारे भविष्य को अधर में लटका कर रखा गया है। जब तक समयबद्ध कार्ययोजना और नियमितीकरण का आदेश नहीं मिलता, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
— संयुक्त संघर्ष समिति, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (उ.प्र.)

तमाम संवर्गों के प्रतिनिधि जुटे: धरना स्थल बना एकता का केंद्र

ईको गार्डन में चल रहे इस आंदोलन को विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों और संवर्गों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। मंगलवार और बुधवार को प्रदर्शन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित किया:

  • डॉ. अनिल गुप्ता (प्रदेश अध्यक्ष, संयुक्त NHM संघ) एवं योगेश कुमार उपाध्याय (प्रदेश महामंत्री, संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ)।
  • ठाकुर मयंक प्रताप सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, NHM कर्मचारी संघ), आदित्य भारती (महामंत्री) एवं अम्मार जाफरी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष)।
  • डॉ. आशुतोष उपाध्याय (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम - RBSK संवर्ग)।
  • हिमालय कुमार (प्रदेश अध्यक्ष, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर - CHO संघ)।
  • हरिओम सिंह (नर्सिंग संवर्ग), प्रेमलता पाण्डेय (एएनएम संघ) तथा ज्योतिर्मि राय (काउंसलर संवर्ग)।
  • विजय बाजपेई व कमलेश कश्यप सहित आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, डेंटल सर्जन, टीबी संवर्ग और डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) प्रतिनिधि।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना, कार्य बहिष्कार की चेतावनी

संघर्ष समिति ने दो टूक शब्दों में कहा कि संविदा कर्मियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से होने वाला मानसिक और आर्थिक शोषण अब अस्वीकार्य है। यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो कर्मचारी आपातकालीन सेवाओं समेत संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली के कार्य बहिष्कार को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

निष्कर्ष: ईको गार्डन में सातवें दिन भी हजारों स्वास्थ्य कर्मियों की अटूट उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह आंदोलन केवल मानदेय का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के आत्मसम्मान, सेवा स्थायित्व और सुरक्षित भविष्य का संघर्ष बन चुका है। शासन को गतिरोध समाप्त करने के लिए अविलंब ठोस नीतिगत पहल करनी होगी।

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