डिजिटल केसीसी में यूपी ने रचा नया इतिहास: 1 लाख से अधिक आवेदनों के साथ बना देश में नंबर वन राज्य; कर्नाटक और हरियाणा को छोड़ा पीछे
लखनऊ: आधुनिक तकनीक और डिजिटल क्रांति के दौर में उत्तर प्रदेश ने खेती-किसानी के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड (ई-केसीसी) के क्रियान्वयन में पूरे देश में शीर्ष (नंबर-1) स्थान पर पहुंच गया है। ई-केसीसी पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से अब तक 1 लाख से अधिक किसानों ने कृषि ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया है। महज आठ महीने के अल्प समय में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
📌 डिजिटल केसीसी की प्रमुख उपलब्धियां:
- देश का पहला राज्य: महज 8 महीने के भीतर 1 लाख से अधिक डिजिटल केसीसी आवेदनों का ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया।
- राज्यों की रैंकिंग में अव्वल: उत्तर प्रदेश (1 लाख+) पहले स्थान पर, कर्नाटक (95 हजार) दूसरे और हरियाणा (42 हजार) तीसरे पायदान पर रहा।
- बैंकों के चक्करों से मुक्ति: घर बैठे मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी व त्वरित ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
- लघु व सीमांत किसानों को वरदान: कागजी औपचारिकताओं और बिचौलियों की भूमिका समाप्त, समय और धन दोनों की बचत।
- नाबार्ड का तकनीकी सहयोग: फरवरी माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाबार्ड द्वारा संचालित इस डिजिटल पहल का विधिवत शुभारंभ किया था।
📊 डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड (ई-केसीसी): राज्यों की स्थिति
| रैंक / स्थान | राज्य | ई-केसीसी आवेदनों की संख्या |
|---|---|---|
| प्रथम (नंबर 1) | उत्तर प्रदेश | 1,00,000+ (1 लाख से अधिक) |
| द्वितीय | कर्नाटक | लगभग 95,000 |
| तृतीय | हरियाणा | लगभग 42,000 |
| तकनीकी संचालक | राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) एवं सहकारिता विभाग | |
बैंक शाखाओं के चक्कर से मिली मुक्ति, घर बैठे मिल रहा ऋण
पारंपरिक व्यवस्था में किसानों को केसीसी ऋण प्राप्त करने के लिए खतौनी, पहचान पत्र और कई अन्य कागजी दस्तावेजों के साथ बार-बार बैंक शाखाओं की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल काफी समय नष्ट होता था बल्कि छोटे व सीमांत किसानों को कई प्रकार की विसंगतियों का सामना करना पड़ता था।
डिजिटल केसीसी ने इस पूरी प्रक्रिया का कायाकल्प कर दिया है। अब किसान अपने स्मार्टफोन अथवा नजदीकी जनसेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल या ऐप पर कुछ ही मिनटों में आवेदन कर सकते हैं। भूमि रिकॉर्ड्स का डिजिटल सत्यापन सीधे भूलेख पोर्टल से जुड़कर स्वतः हो जाता है, जिससे प्रक्रिया अत्यधिक सुगम और पारदर्शी बन गई है।
"तकनीक से किसान को सशक्त बना रही सरकार": जेपीएस राठौर
प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने इस उपलब्धि को डबल इंजन सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम बताया।
"मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने फरवरी माह में नाबार्ड के सहयोग से संचालित डिजिटल केसीसी व्यवस्था का शुभारंभ किया था। इसका मुख्य ध्येय अंतिम पायदान पर खड़े किसान को बिना किसी बिचौलिए के सीधे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था। महज आठ महीने में एक लाख से अधिक किसानों का डिजिटल आवेदन करना यह प्रमाणित करता है कि प्रदेश का किसान तकनीकी बदलाव को कितनी तेजी और सहजता से स्वीकार कर रहा है।"
— जेपीएस राठौर (सहकारिता मंत्री, उत्तर प्रदेश)
कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की नई दिशा
केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता खेती की लागत घटाना और समय पर सस्ता संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना है। डिजिटल केसीसी के जरिए समयबद्ध वित्तीय सहायता मिलने से किसान बुवाई, खाद, बीज और कीटनाशक की खरीद उचित समय पर कर पा रहे हैं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जहां बैंकों का परिचालन खर्च घटा है, वहीं किसानों के लिए समय पर खाद-बीज जुटाना बेहद आसान हुआ है।

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