अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी की तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजेगी यूपी की 'टीम 12': UPSIFS के छात्रों ने AI, क्वांटम व साइबर सुरक्षा में दिखाया नवाचार
लखनऊ: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के युवा वैश्विक पटल पर राज्य का मान बढ़ाने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) के 150 विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञों के समक्ष जटिल तकनीकी समस्याओं पर अपने शोध और मॉडल प्रस्तुत किए। इनमें से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को चुनकर 'टीम 12' का गठन किया गया है, जो अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे अग्रणी देशों की बहुराष्ट्रीय तकनीकी परियोजनाओं में अपनी सीधी सहभागिता दर्ज कराएगी।
📌 'टीम 12' और UPSIFS पहल के मुख्य बिंदु:
- वैश्विक प्रस्तुतीकरण: छात्रों ने ब्राविटी (Braviti) के सीईओ पवन शर्मा (अमेरिका) और केआईपीएल (KIPL) के सीईओ पराग शेंडे के समक्ष नवाचार समाधान प्रस्तुत किए।
- 'टीम 12' का गठन: 150 प्रतिभागियों में से 12 सर्वश्रेष्ठ छात्र-छात्राओं का अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स हेतु चयन।
- त्रिवेणी मॉडल: UPSIFS देश का पहला ऐसा शैक्षणिक संस्थान है जहां आधुनिक तकनीक, कानून (विधि) और फॉरेंसिक विज्ञान का एकीकृत समन्वय है।
- फोकस एरिया: क्वांटम कंप्यूटिंग, डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण, रोबोटिक्स स्वचालन और साइबर अपराध रोकथाम।
- परियोजना नेतृत्व: संस्थान के ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल की प्रमुख डॉ. निमिषा सिंह इस दल का मार्गदर्शन कर रही हैं।
📊 'टीम 12' एवं तकनीकी नवाचार: एक नजर में
| पहलू / घटक | आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| संस्थान का नाम | उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ |
| चयनित दल | 'टीम 12' (150 में से 12 मेधावी शोधार्थी व छात्र) |
| साझेदार वैश्विक विशेषज्ञ | पवन शर्मा (सीईओ, Braviti - यूएसए) एवं पराग शेंडे (सीईओ, KIPL) |
| प्रमुख तकनीकी विषय | AI, रोबोटिक्स, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल फॉरेंसिक्स |
| मार्गदर्शक नेतृत्व | डॉ. जीके गोस्वामी (संस्थापक निदेशक) व डॉ. निमिषा सिंह (हेड, T&P सेल) |
सीएम योगी के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा: डॉ. जीके गोस्वामी
UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा उत्तर प्रदेश को फॉरेंसिक अनुसंधान और सुरक्षा तकनीक का वैश्विक हब बनाने की है। इसी सोच के तहत छात्रों को केवल सैद्धांतिक पाठ पढ़ाने के बजाय वास्तविक समस्याओं (Real-world Problem Solving) पर काम कराया जा रहा है।
“आधुनिक अपराध अब केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल फ्रॉड, डेटा ब्रीच और डार्क वेब अपराधों से निपटने के लिए तकनीक, कानून और फॉरेंसिक की त्रिवेणी आवश्यक है। हमारे छात्र वैश्विक विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसी प्रणालियां तैयार कर रहे हैं जो साइबर अपराधों की जांच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देंगी।”
— डॉ. जीके गोस्वामी (संस्थापक निदेशक, UPSIFS)
वैश्विक पटल पर चुनौती स्वीकारने वाली 'टीम 12' के सदस्य
कठिन मूल्यांकन और प्रेजेंटेशन राउंड के बाद यूपीएसआईएफएस की 'टीम 12' में निम्नलिखित 12 होनहार छात्र-छात्राओं का चयन किया गया है:
- ईशानी पांडे
- ईशानी ओझा
- सिद्धि वत्स
- साक्षी गहलोत
- पुष्कर सिंह
- रवि यादव
- विवेक मिश्रा
- प्रखर सिंह
- दिव्यम श्रीवास्तव
- अनिमेष शुक्ला
- अनुभव चतुर्वेदी
- रविशंकर कुशवाहा
इस पूरी अंतरराष्ट्रीय परियोजना और नवाचार दल का समन्वयन संस्थान की ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल प्रमुख डॉ. निमिषा सिंह के नेतृत्व में किया जा रहा है।
अनुसंधान, स्टार्टअप और वैश्विक उद्यमिता के नए द्वार
यह पहल विद्यार्थियों को अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में चल रहे तकनीकी नवाचारों के साथ सीधे जुड़ने का मंच प्रदान करती है। फॉरेंसिक विज्ञान में डिजिटल साक्ष्यों की सत्यता परखने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग और क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है।
- व्यावहारिक अनुभव: वैश्विक कंपनियों के साथ काम करने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एल्गोरिदम और सुरक्षा टूल्स विकसित करने का अनुभव मिलेगा।
- स्टार्टअप की नींव: इस तरह के प्रयोग छात्रों में जॉब सीकर बनने के बजाय डीप-टेक स्टार्टअप्स स्थापित करने का आत्मविश्वास भरते हैं।
- न्यायिक प्रणाली में मजबूती: तकनीकी दृष्टि से सक्षम फॉरेंसिक पेशेवर भविष्य में न्यायालयों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की प्रस्तुति को अधिक अचूक और पारदर्शी बनाएंगे।


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