सिविल अस्पताल लखनऊ में न्यूरो सर्जरी की बड़ी उपलब्धि: नाक के रास्ते निकाला पिट्यूटरी ट्यूमर, बिना सिर खोले लौटी मरीज की आंखों की रोशनी
लखनऊ: राजधानी के प्रतिष्ठित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय के चिकित्सकों ने न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपिक ट्रांसनेजल ट्रांसस्फेनॉइडल तकनीक का प्रयोग करते हुए मरीज के सिर की हड्डी (कपाल) खोले बिना नाक के रास्ते मस्तिष्क के आधार में स्थित पिट्यूटरी मैक्रोएडेनोमा (Pituitary Macroadenoma) ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज की गंभीर रूप से प्रभावित आंखों की रोशनी में क्रांतिकारी सुधार हुआ और उसकी दृष्टि पूरी तरह वापस लौट आई।
📌 जटिल न्यूरो सर्जरी: प्रमुख बिंदु
- सिर खोले बिना सर्जरी: नाक के रास्ते स्फेनॉइड साइनस से होकर पिट्यूटरी ग्रंथि तक सीधी पहुंच बनाकर ट्यूमर निकाला गया।
- दृष्टि की सफल वापसी: ट्यूमर द्वारा ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) पर पड़ रहे दबाव को हटाकर मरीज की खोई रोशनी वापस लाई गई।
- मरीज की पृष्ठभूमि: देवरिया निवासी मरीज दुबई में कार्यरत था, जिसकी दृष्टि ट्यूमर बढ़ने के कारण तेजी से खत्म हो रही थी।
- लाखों के खर्च से राहत: निजी कॉरपोरेट अस्पतालों में 15 से 20 लाख रुपये में होने वाला यह अत्यंत जटिल ऑपरेशन सरकारी अस्पताल में उपलब्ध कराया गया।
- विशेषज्ञ टीम: न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के साथ एनेस्थेटिस्ट डॉ. एस. के. सिंह ने निभाई मुख्य भूमिका।
📊 सर्जिकल केस प्रोफाइल: एक नजर में
| मानक / विवरण | केस के चिकित्सीय तथ्य |
|---|---|
| चिकित्सालय | डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय, लखनऊ |
| रोग / डायग्नोसिस | पिट्यूटरी मैक्रोएडेनोमा (Pituitary Macroadenoma) |
| सर्जिकल तकनीक | Microscopic Transnasal Transsphenoidal Surgery |
| मुख्य न्यूरो सर्जन | डॉ. विनोद कुमार तिवारी |
| एनेस्थीसिया विशेषज्ञ | डॉ. एस. के. सिंह |
| मरीज का विवरण | निवासी: देवरिया (उत्तर प्रदेश), कार्यरत: दुबई |
पिट्यूटरी मैक्रोएडेनोमा: दृष्टि पर कैसे पड़ता है घातक असर?
पिट्यूटरी ग्रंथि मानव मस्तिष्क के आधार पर स्थित एक बेहद संवेदनशील अंतःस्रावी (Endocrine) ग्रंथि है, जो शरीर के प्रमुख हार्मोन्स को नियंत्रित करती है। जब इसमें ट्यूमर का आकार 1 सेंटीमीटर से अधिक (मैक्रोएडेनोमा) हो जाता है, तो यह ग्रंथि के ठीक ऊपर से गुजरने वाली दृष्टि तंत्रिकाओं (Optic Chiasm/Nerves) पर भारी दबाव बनाने लगता है।
“देवरिया निवासी मरीज दुबई में कार्यरत था। ट्यूमर के असामान्य विस्तार से उसकी दृष्टि लगातार धुंधली होती जा रही थी और वह अंधेपन की कगार पर पहुंच गया था। ऐसी जटिल अवस्था में बिना समय गंवाए ट्यूमर को डीकंप्रेस करना अनिवार्य था।”
ट्रांसनेजल ट्रांसस्फेनॉइडल तकनीक: बिना चीरा-टांके सुरक्षित रिकवरी
पारंपरिक न्यूरो सर्जरी (क्रैनियोटॉमी) में सिर की हड्डी को काटकर मस्तिष्क के ऊतकों को हटाते हुए ट्यूमर तक पहुंचा जाता है, जिसमें रक्तस्राव और मस्तिष्क क्षति का खतरा अधिक होता है।
- प्राकृतिक मार्ग का उपयोग: इस उन्नत विधि में नाक के नथुने से उपकरण डालकर स्फेनॉइड साइनस की सूक्ष्म हड्डी के रास्ते सीधे पिट्यूटरी फोसा तक पहुंचा गया।
- माइक्रोस्कोपिक सटीकता: उच्च क्षमता वाले सर्जिकल माइक्रोस्कोप की मदद से आसपास की कैरोटिड धमनियों और नाजुक नसों को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को बारीकी से बाहर निकाला गया।
- त्वरित स्वास्थ्य लाभ: सिर पर कोई बाहरी चीरा या टांका न होने से मरीज को असहनीय दर्द नहीं हुआ और सर्जरी के तुरंत बाद दृष्टि में चमत्कारी सुधार दर्ज हुआ।
निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता बोले: 'मरीज हित में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह सक्षम'
प्राइवेट मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में इस प्रकार की अत्याधुनिक सर्जरी कराने पर 15 से 20 लाख रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आता है, जो मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए वहन करना अत्यंत कठिन होता है। ऐसे में सिविल अस्पताल में यह सफल उपचार आम जनता के लिए वरदान साबित हुआ है।
अस्पताल के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने न्यूरो सर्जरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी उच्चकोटि की तकनीकी विशेषज्ञता और मरीज-केंद्रित सेवा भाव मौजूद है। अस्पताल प्रशासन प्रत्येक नागरिक को सुलभ और उन्नत जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है।



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