6 दिसंबर को अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगी मायावती: बसपा ने तेज कीं चुनावी तैयारियां, लखनऊ में 75 जिलाध्यक्षों संग की समीक्षा बैठक
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आगामी 6 दिसंबर 2026 को संविधान निर्माता बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में आयोजित होने वाले विशाल श्रद्धांजलि समारोह का प्रत्यक्ष नेतृत्व करेंगी। गोमती तट स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में होने वाले इस महाआयोजन को बसपा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है। गुरुवार को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मायावती ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के संगठन और बूथ स्तर की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया।
📌 बैठक एवं महापरिनिर्वाण दिवस: प्रमुख बिंदु
- 6 दिसंबर का मेगा इवेंट: अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल (गोमती तट) में जुटने वाले लाखों कार्यकर्ताओं का स्वयं नेतृत्व करेंगी बसपा प्रमुख।
- 75 जिलाध्यक्षों की बैठक: 12 माल एवेन्यू स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रदेश, मंडल और जिला पदाधिकारियों संग चुनावी रोडमैप पर मंथन।
- बूथ कमेटियों की समीक्षा: कमजोर और गरीब वर्गों के मतदाताओं को वोट की ताकत समझाने और बूथ स्तर तक कैडर मजबूत करने के निर्देश।
- ईवीएम और निष्पक्षता पर सवाल: सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई।
- विरोधी दलों पर निशाना: भाजपा, सपा और कांग्रेस को दलित, पिछड़ा, मुस्लिम और गरीब विरोधी करार देते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का संकल्प।
📊 बसपा चुनावी समीक्षा एवं 6 दिसंबर का कार्यक्रम: एक नजर में
| विवरण / मानक | तथ्य एवं रणनीतिक रूपरेखा |
|---|---|
| आयोजन की तारीख एवं अवसर | 06 दिसंबर 2026 (डॉ. बी.आर. अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस) |
| समारोह स्थल | डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, गोमती नगर, लखनऊ |
| समीक्षा बैठक का स्थान | बसपा केंद्रीय/प्रदेश कार्यालय, 12 माल एवेन्यू, लखनऊ |
| सहभागिता | प्रदेश, मंडल और सभी 75 जनपदों के जिलाध्यक्ष व वरिष्ठ प्रभारी |
| रणनीतिक फोकस | बूथ सशक्तिकरण, मजबूत प्रत्याशी चयन, सामाजिक न्याय व बैलेट पेपर की मांग |
विधानसभा चुनाव की रणनीति: 'बूथ जीता तो चुनाव जीता'
बसपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मैराथन बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने संगठनात्मक ढांचे को धार देने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में पार्टी पूरी ताकत से उतरेगी और किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“संगठन की असली ताकत मतदान केंद्र (बूथ) पर होती है। गरीब, शोषित, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को उनके वोट के संवैधानिक अधिकार और ताकत के प्रति निरंतर जागरूक करें। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के संकल्प को लेकर संगठन हर विधानसभा क्षेत्र में मजबूत प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया तेज करे।”
चुनावी प्रणाली, ईवीएम और विपक्षी दलों पर तीखा हमला
बसपा की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में देश की वर्तमान चुनावी व्यवस्था और सरकारी मशीनरी के कथित अनुचित इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई गई। पार्टी ने स्वतंत्र, पारदर्शी और लोकतांत्रिक विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग को पुनः प्रमुखता से उठाया।
- विपक्षी दलों की उपेक्षा: मायावती ने कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी को एक ही थैली के चट्टे-बट्टे बताते हुए कहा कि इन दलों ने केवल बहुजन समाज का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है, जबकि उनके वास्तविक अधिकारों की हमेशा अनदेखी की।
- बसपा शासनकाल का मॉडल: उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे जनता के बीच जाकर बताएं कि कानून का राज और जनहितकारी योजनाएं केवल बसपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकारों में ही सुरक्षित रह सकती हैं।
6 दिसंबर को ऐतिहासिक जनसैलाब जुटाने का संकल्प
बैठक में जब पार्टी की ओर से यह घोषणा की गई कि बसपा सुप्रीमो स्वयं 6 दिसंबर को अंबेडकर स्मारक में उपस्थित रहकर श्रद्धांजलि समारोह का नेतृत्व करेंगी, तो पूरे सभागार में पदाधिकारियों ने गगनभेदी नारों और तालियों के साथ इसका स्वागत किया। प्रदेश के सभी 75 जिलों से भारी संख्या में कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध वर्ग और समर्थकों को राजधानी लखनऊ लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बसपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज के आत्मसम्मान, राजनीतिक हिस्सेदारी और सत्ता में वापसी का निर्णायक शंखनाद बनेगा।



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