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राजकीय नर्सेस संघ 7 नवम्बर को पूरे UP में मनाएगा काला दिवस: सहमति पत्रों की प्रतियां जलाएंगे नर्सिंगकर्मी, 26वें दिन भी 2 घंटे कार्य बहिष्कार जारी

राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश 7 नवम्बर को मनाएगा काला दिवस: सहमति पत्रों की प्रतियां जलाकर होगा विरोध प्रदर्शन, 26वें दिन भी 2 घंटे कार्य बहिष्कार जारी

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 03 नवम्बर 2026 | 🏥 श्रेणी: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, राजकीय नर्सेस संघ, कर्मचारी आंदोलन, लखनऊ समाचार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग संवर्ग का असंतोष चरम पर पहुंच गया है। राजकीय नर्सेस संघ, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर मंगलवार को लगातार 26वें दिन भी प्रदेशभर में सुबह 2 घंटे का कार्य बहिष्कार जारी रहा। शासन स्तर पर सहमति बन जाने के बावजूद अब तक औपचारिक शासनादेश निर्गत न होने के विरोध में संघ ने आगामी 7 नवम्बर 2026 को पूरे प्रदेश में ‘काला दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है। इस दौरान नर्सिंगकर्मी सहमति पत्रों की प्रतियां जलाकर अपना तीव्र विरोध दर्ज कराएंगे।

📌 नर्सेस संघ आंदोलन: मुख्य बिंदु

  • 7 नवम्बर को प्रदेशव्यापी काला दिवस: प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में सहमति पत्रों की प्रतियां जलाई जाएंगी।
  • 26वें दिन भी कार्य बहिष्कार जारी: प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक दो घंटे काम ठप रखकर चल रहा है सांकेतिक विरोध।
  • सहमति के बाद भी आदेश नहीं: शासन स्तर पर बनी सहमति के 5 प्रमुख बिंदुओं पर शासनादेश अब तक लंबित।
  • डिप्टी सीएम से गुहार: उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से तत्काल हस्तक्षेप कर शासनादेश जारी कराने की मांग।
  • निर्णायक आंदोलन की चेतावनी: मांगें पूरी न होने पर आपातकालीन सेवाओं सहित अनिश्चितकालीन कार्यबंदी का अल्टीमेटम।

📊 शासन स्तर पर सहमत 5 प्रमुख मांगें: जिन पर रुका है शासनादेश

क्र.सं. प्रमुख मांग का विषय प्रस्तावित प्रावधान एवं अपेक्षा
1 गृह जनपद में तैनाती नर्सिंग संवर्ग को पारदर्शी नीति के तहत गृह जनपद में स्थानांतरण व पदस्थापन की सुविधा।
2 उच्च पदों पर पदोन्नति स्वास्थ्य महानिदेशालय से लेकर अस्पताल स्तर तक रिक्त प्रशासनिक व वरिष्ठ पदों पर समयबद्ध पदोन्नति।
3 पालनाघर (क्रेच) की व्यवस्था महिला नर्सिंग कर्मियों के शिशुओं की देखभाल हेतु अस्पतालों में आधुनिक पालनाघर की स्थापना।
4 सवैतनिक अध्ययन अवकाश उच्च शिक्षा (बीएससी, एमएससी नर्सिंग आदि) प्राप्त करने के लिए सवैतनिक अध्ययन अवकाश की मंजूरी।
5 मेडिकल कॉलेज में समायोजन उच्चीकृत जिला अस्पतालों के मेडिकल कॉलेज बनने पर वहां कार्यरत स्टाफ का वहीं समायोजन व कैडर सुरक्षा।

‘सहमति के बाद भी 1 साल से आदेश लटकाना अन्यायपूर्ण’: अशोक कुमार

राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि संघ द्वारा प्रेषित पत्र के क्रम में शासन स्तर पर नर्सिंग संवर्ग की 13 सूत्रीय मांगों पर कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। इन बैठकों में पांच अत्यंत महत्वपूर्ण मांगों पर शासन ने अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की थी।

“सहमति बनने के बावजूद लगभग एक वर्ष से अधिक का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लालफीताशाही के कारण शासनादेश की फाइलें दबी पड़ी हैं। 22 अक्टूबर को स्वास्थ्य भवन पर विशाल घेराव के दौरान महानिदेशक महोदय ने भी शीघ्र आदेश निर्गत कराने का ठोस आश्वासन दिया था, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरा।”
— अशोक कुमार (महामंत्री, राजकीय नर्सेस संघ, उत्तर प्रदेश)

चरणबद्ध आंदोलन: 9 अक्टूबर से अनवरत जारी है संघर्ष

प्रदेशभर के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखते हुए नर्सिंगकर्मी गांधीवादी तरीके से आंदोलन चला रहे हैं:

  • 9 अक्टूबर: प्रदेश के समस्त जनपदों में चरणबद्ध आंदोलन का औपचारिक शंखनाद हुआ।
  • 21 अक्टूबर: प्रदेशभर के जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में सुबह 2 घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया गया।
  • 22 अक्टूबर: लखनऊ स्थित महानिदेशालय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (स्वास्थ्य भवन) का हजारों नर्सिंगकर्मियों ने घेराव किया।
  • 7 नवम्बर (प्रस्तावित): सभी चिकित्सालयों में काला दिवस मनाते हुए शासन के सहमति पत्रों की प्रतियां जलाई जाएंगी और 2 घंटे काम पूरी तरह बंद रहेगा।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार

महामंत्री अशोक कुमार ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से अपील की है कि वे इस मामले का व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की लाखों जनता को 24 घंटे संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाला नर्सिंग स्टाफ आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। यदि 7 नवम्बर तक शासन ने सहमत मांगों पर लिखित शासनादेश जारी नहीं किया, तो संघ इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप देने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों की होगी।

निष्कर्ष: सहमति के बावजूद शासनादेश निर्गत करने में विभागीय लेटलतीफी से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मरीजों के हित और स्वास्थ्य प्रणाली को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार को 7 नवम्बर के प्रस्तावित उग्र आंदोलन से पहले शासनादेश जारी कर गतिरोध को समाप्त करना चाहिए।

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