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NDRF की सजगता से नाव पर सवार 150 यात्रियों की बची जान

लखनऊ/कुशीनगर। "जाको राखे साईंया मार सके न कोई...।" उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में मची चीख पुकार के बीच जिला, पुलिस प्रशासन और एनडीआरएफ टीम की सजगता से कई घंटों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब करीब डेढ़ सौ जिंदगियां सकुशल बच गईं तो वहां मौजूद लोगों के मुख से यहीं पंक्तियां निकली। जानकारी के मुताबिक कुशीनगर में गुरुवार देर शाम बाढ़ से उफनाती नारायणी नदी की बीच धारा में एक नाव का इंजन अचानक बंद हो गया। इससे नाव पर सवार करीब डेढ़ सौ यात्रियों की जान सांसत में पड़ गई। बीच नदी में नाव बंद होने से यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर जुटे आसपास के ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने एनडीआरएफ की मदद से लोगों को सुरक्षित निकाला। रात भर चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सुबह सात बजे तक नाव पर सवार सभी लोगों को सुरक्षित निकालकर घर भेजा जा चुका था।

मिली जानकारी के मुताबिक अमवा खास व आसपास के गांवों के लोगों की खेती नदी के दूसरी ओर भी है। जहाँ खेतों में गए लोग नाव से नदी पार करके वापस बरवापट्टी की तरफ लौट रहे थे। इसी बीच नाव का इंजन खराब हो गया और नाव नदी की धारा के साथ बहने लगी और बीच धारा में फंसी नाव करीब तीन किलोमीटर तक बहते हुए अमवा दीगर बंधे पर पहुंच गई। नाव ऐसी जगह पर जाकर फंस गई जहां से लोगों का निकालना बहुत ही मुश्किल हो गया। इस दौरान नाव में सवार लोग लगातार चीख-पुकार मचा रहे थे। लोगों का शोर सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने छोटी नाव लेकर लोगों को बचाने की कोशिश शुरू की। उन्‍होंने कई लोगों को बाहर निकाला।

इस बीच किसी ने प्रशासन को इसकी खबर दी तो आनन फानन में राहत दल मौके पर पहुंचा और डीएम व एसपी भी मौके पर पहुंच गए। जिलाधिकारी ने 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ वाराणसी, कंट्रोल रूम को भी सूचना दी। जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ के कमान्डेंट मनोज कुमार शर्मा के दिशा निर्देश में गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय प्रतिकिया केंद्र से एनडीआरएफ की टीम उप सेनानायक पी.एल.शर्मा के नेतृत्व में घटना स्थल के लिए रवाना हुई। मध्यरात्रि में 110 किलोमीटर का सफर तय कर टीम रात ढाई बजे बरवापट्टी घाट पहुंची। 

आधी रात में घनघोर अँधेरे व नदी तट तक रास्ता ना होने के कारण टीम के लिए वहाँ तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण कार्य था। लेकिन एनडीआरएफ के जाबांज बचावकर्मियों ने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए भारी भरकम मोटर बोटों को अपने कंधों पर उठाया और अँधेरे में कंटीली झाड़ियों के बीच से एक किलोमीटर का रास्ता बनाते हुए घटना स्थल के नजदीक तट के किनारे पहुंचे और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। इस अभियान में किसी भी तरह की छोटी सी चूक जन हानि में बदल सकती थी। लेकिन सजगता से रात भर चले चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान को सुबह आठ बजे तक पूरा कर लिया गया। एनडीआरएफ टीम के मुताबिक इस अभियान में किसी भी तरह की जानमाल की हानि के बिना सभी फँसे हुए लोगों व पशुओं को सुरक्षित निकला गया। 

एनडीआरएफ की टीम ने अपनी जान की परवाह किये बिना दक्षतापूर्ण तरीके से 112 लोगों को तेज़ धारा में बहने से बचा लिया। जिसमें 62 पुरुष, 31 महिलाएं, 19 बच्चे शामिल थे। इसके साथ ही 14 पशुधन, बकरियों को भी बचाया गया। मौके पर मौजूद एसडीआरएफ टीम और स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में अपना योगदान दिया। प्रशासन की चुस्ती और एनडीआरएफ की त्वरित कार्यवाही के कारण सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों द्वारा एनडीआरएफ के इस साहसिक कार्य की खूब प्रशंसा की गयी।

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