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चैती महोत्सव : "ठुमक-ठुमक चलत रामचन्द्र..."

लखनऊ। श्रीराम लीला मैदान ऐशबाग में चल रहे भारतीय नववर्ष मेला व चैती महोत्सव 2022 की नवीं संस्कृतिक संध्या में कथक हरियाणवी नृत्य संग लोकगीतों की मनोरम छटा बिखरी।रविवार को नवीं सांस्कृतिक सन्ध्या का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि मौजूद पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष हरीश चन्द्र अग्रवाल और सचिव पं. आदित्य द्विवेदी ने डॉ. दिनेश शर्मा को पुष्पगुच्छ, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

संगीत से सजे कार्यक्रम का आरम्भ मानसी सिंह ने "मुझे दास बनाकर रख लेना..." से कर "उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती...", "रामही राम हो रटन लागी जिभिया...", "तुम्हे जानू ना पहचानू ना हनुमान मुदिरिया कहां पाए..." सहित अन्य भजनों को सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। राघवेन्द्र प्रताप सिंह के नृत्य निर्देशन में तनु श्री, तमन्ना सिंह, अरिन्दम सिंह, शैलेंद्र सिंह, मोहित गौतम, राघवेन्द्र  और हर्षदीप बाजपेई ने श्रृंगारी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोहा।
वहीं राष्ट्रीय कथक संस्थान के कलाकारों उपासना श्रीवास्तव, हुमा साहू, मोनिका, संजीवनी, जयश्री, अत्रांशी, खुषी, अनन्या, श्रेया केशरवानी, प्राचिता, जान्हवी, पूजा, वान्या ने सरिता श्रीवास्तव की परिकल्पना में भगवान श्रीराम की स्तुति "श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन...‘‘ पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। जिसमें आमद, तोडे़, टुकडे़, परन, तिहाईयों का सामवेेेश था। इस प्रस्तुति के उपरान्त उपासना श्रीवास्तव, हुमा साहू, मोनिका, संजीवनी, जयश्री, अत्रांशी, खुषी, अनन्या, श्रेया केशरवानी, प्राचिता, जान्हवी, पूजा, वान्या ने "ठुमक-ठुमक चलत रामचन्द्र..." पर उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। 
"विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर" द्वारा प्रस्तुत और चन्द्रभाष सिंह के निर्देशन में मंचित नाटक "जीवन संघर्ष" ने जीवन जीने की कला सिखाई। भास्कर नाट्य कला मंदिर कोलकता के कलाकारों ने देवी तुलसी नाटक द्वारा तुलसी के महत्व से परिचित कराया। इसके अलावा संदीप शर्मा व साथी कलाकारों ने हरियाणवी लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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